Share Market Crash: घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार, 11 अगस्त को कारोबार की शुरुआत कमजोर रही। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 350 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी भी फिसलकर 24,500 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे पहुंच गया। बाजार में बिकवाली का दबाव कई प्रमुख कारणों से बढ़ा है। एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, वहीं दूसरी ओर बैंकिंग शेयरों में कमजोरी ने घरेलू बाजार की चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा आज निफ्टी की वीकली एक्सपायरी भी है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा हुआ है।
एक कारोबारी दिन पहले यानी 10 अगस्त को सेंसेक्स 43.27 अंक यानी 0.06 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ 78,542.44 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 13.15 अंक यानी 0.05 फीसदी की तेजी के साथ 24,583.80 पर बंद हुआ था। मंगलवार को बाजार इन स्तरों से नीचे खुला और शुरुआती कारोबार में बिकवाली तेज हो गई।
सुबह करीब 9:30 बजे सेंसेक्स 360.95 अंक यानी 0.46 फीसदी की गिरावट के साथ 78,181.49 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह निफ्टी 50 करीब 102.20 अंक यानी 0.42 फीसदी टूटकर 24,481.60 के स्तर पर पहुंच गया। इंट्रा-डे कारोबार में सेंसेक्स 371.33 अंक गिरकर 78,171.11 और निफ्टी 105.20 अंक टूटकर 24,478.60 के स्तर तक पहुंच गया।
बाजार में क्यों आई गिरावट?
मंगलवार के कारोबार में गिरावट के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण काम कर रहे हैं। बाजार की चाल पर खास तौर पर अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, डेरिवेटिव एक्सपायरी और बैंकिंग शेयरों का प्रदर्शन असर डाल रहा है।
1. ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी
शेयर बाजार में दबाव बढ़ने की एक बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। ईरान की ओर से युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए अमेरिका से हर्जाने की मांग किए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सख्त रुख अपनाया है।
ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका भी ईरान से हुए नुकसान की भरपाई की मांग करेगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इस मुद्दे को लेकर अपनी बात रखी। बाजार के लिए इस तरह का भू-राजनीतिक तनाव चिंता का विषय है, क्योंकि इससे निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ती है और जोखिम वाली परिसंपत्तियों पर दबाव आ सकता है।
निवेशक फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और आगे की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अगर तनाव बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक बाजारों के साथ-साथ कच्चे तेल और भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
अमेरिका-ईरान तनाव का सीधा असर कच्चे तेल के बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। होर्मुज स्ट्रेट से तेल और अन्य सामान ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही सामान्य होने को लेकर बनी उम्मीदों पर दबाव आया है। इसके चलते ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 88 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई।
भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी खास महत्व रखती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है और कंपनियों की लागत पर भी असर पड़ सकता है। यही वजह है कि क्रूड में अचानक तेजी को घरेलू शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत माना जाता है।
तेल की कीमतों में लगातार तेजी रहने पर महंगाई, चालू खाते और रुपये जैसी कई आर्थिक variables पर भी दबाव बन सकता है। ऐसे माहौल में निवेशक खास तौर पर उन सेक्टरों में सतर्क रहते हैं जिनकी लागत सीधे ऊर्जा कीमतों से प्रभावित होती है।
3. Nifty की वीकली एक्सपायरी से बढ़ी अस्थिरता
मंगलवार को निफ्टी के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी भी है। एक्सपायरी वाले दिन बाजार में सामान्य दिनों की तुलना में उतार-चढ़ाव ज्यादा देखने को मिल सकता है।
ऑप्शन और फ्यूचर्स में बड़ी पोजीशन होने के कारण एक्सपायरी के दौरान ट्रेडिंग गतिविधियां तेज हो जाती हैं। महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के आसपास इंडेक्स में अचानक तेज मूव देखने को मिल सकता है।
ऐसे में जब बाजार पहले से ही वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की तेजी जैसे दबावों से जूझ रहा हो, तब एक्सपायरी की वजह से वोलैटिलिटी और बढ़ सकती है। निवेशक फिलहाल 24,500 के स्तर के आसपास निफ्टी की चाल पर विशेष नजर रख रहे हैं।
4. बैंकिंग शेयरों में भारी दबाव
मंगलवार के कारोबार में बैंकिंग शेयर बाजार पर सबसे बड़ा दबाव बनाने वाले प्रमुख सेक्टरों में शामिल हैं। सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकिंग इंडेक्स दोनों में शुरुआती कारोबार में करीब आधे फीसदी की कमजोरी देखने को मिली।
बैंकिंग शेयरों का इंडेक्स में बड़ा वजन होने के कारण इनमें गिरावट का सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर पड़ता है। जब बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में बिकवाली बढ़ती है तो इंडेक्स को संभालना दूसरे सेक्टरों के लिए मुश्किल हो जाता है।
दूसरी तरफ आईटी सेक्टर बाजार को सपोर्ट देने की कोशिश कर रहा है। निफ्टी आईटी इंडेक्स में शुरुआती कारोबार में आधे फीसदी से अधिक की बढ़त दिखाई दी। हालांकि बैंकिंग शेयरों में कमजोरी इतनी अधिक रही कि आईटी सेक्टर की मजबूती बाजार की कुल गिरावट को रोकने में सफल नहीं हो सकी।
सेंसेक्स के टॉप गेनर और लूजर
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के कुछ शेयर बाजार की कमजोरी के बावजूद मजबूती दिखा रहे थे। HCLTech, Titan और Tech Mahindra शुरुआती कारोबार में प्रमुख टॉप गेनर्स में शामिल रहे।
वहीं दूसरी तरफ IndiGo, Axis Bank और UltraTech Cement पर बिकवाली का दबाव देखने को मिला। खासकर बैंकिंग शेयरों में कमजोरी ने प्रमुख इंडेक्स पर दबाव बनाए रखा।
ब्रॉडर मार्केट में मिला-जुला रुख
मुख्य इंडेक्स में गिरावट के बावजूद पूरे बाजार में एकतरफा बिकवाली नहीं दिखाई दी। ब्रॉडर मार्केट में मिला-जुला रुझान देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 में कमजोरी रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब आधे फीसदी की तेजी देखने को मिली।
इससे संकेत मिलता है कि शुरुआती गिरावट मुख्य रूप से लार्ज-कैप और इंडेक्स हैवीवेट शेयरों से प्रभावित है। हालांकि कारोबार के दौरान बाजार की दिशा बदल सकती है, इसलिए निवेशकों के लिए इंडेक्स के साथ-साथ सेक्टर और ब्रॉडर मार्केट की चाल पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
किन सेक्टर्स पर कितना दबाव?
सेक्टोरल स्तर पर बैंकिंग शेयर सबसे ज्यादा दबाव में दिखाई दे रहे हैं। सरकारी और निजी बैंकिंग दोनों इंडेक्स में कमजोरी दर्ज की गई। एफएमसीजी इंडेक्स में भी करीब आधे फीसदी की गिरावट रही।
इसके विपरीत आईटी सेक्टर बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहा है। निफ्टी आईटी में आधे फीसदी से अधिक की तेजी देखने को मिली। हालांकि अभी तक किसी भी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स में 1 फीसदी से अधिक की बड़ी हलचल नहीं दिखाई दी है।
निफ्टी के लिए 24,500 का स्तर क्यों अहम?
निफ्टी का 24,500 के नीचे जाना तकनीकी नजरिए से भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछली क्लोजिंग 24,583.80 के मुकाबले इंडेक्स ने मंगलवार को कमजोर शुरुआत की और शुरुआती कारोबार में 24,478.60 तक फिसल गया।
अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि निफ्टी 24,500 के आसपास वापस मजबूती हासिल करता है या इसके नीचे दबाव बना रहता है। अगर बिकवाली बढ़ती है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। वहीं, 24,500 के आसपास खरीदारी लौटने पर इंडेक्स में रिकवरी की कोशिश भी दिखाई दे सकती है।
हालांकि सिर्फ एक स्तर के आधार पर बाजार की दिशा तय करना उचित नहीं होगा। वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमत, बैंकिंग शेयरों की चाल और एक्सपायरी से जुड़ी गतिविधियां मंगलवार के कारोबार को प्रभावित कर सकती हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
मौजूदा बाजार में वैश्विक घटनाक्रम और घरेलू सेक्टोरल दबाव दोनों एक साथ दिखाई दे रहे हैं। ऐसे समय में निवेशकों को जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय कंपनियों के फंडामेंटल, वैल्यूएशन और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखना चाहिए।
खासकर एक्सपायरी वाले दिन बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए केवल शॉर्ट-टर्म मूवमेंट देखकर निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है। कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान तनाव में आगे होने वाले बदलाव भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पर चार बड़े दबाव दिखाई दे रहे हैं—अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, निफ्टी की वीकली एक्सपायरी और बैंकिंग शेयरों में कमजोरी। इन कारणों से सेंसेक्स 350 अंकों से अधिक टूट गया और निफ्टी 24,500 के नीचे पहुंच गया।
हालांकि आईटी और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूती बाजार के लिए कुछ राहत दे रही है। अब निवेशकों की नजर निफ्टी के 24,500 के स्तर, बैंकिंग शेयरों की चाल और ग्लोबल संकेतों पर रहेगी। कारोबार आगे बढ़ने के साथ बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
डिस्क्लेमर: यह लेख शेयर बाजार की मौजूदा गतिविधियों और उपलब्ध बाजार संकेतों की जानकारी देने के उद्देश्य से है। इसमें किसी भी शेयर या वित्तीय उत्पाद में निवेश की सलाह नहीं दी गई है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, निवेश लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखें तथा जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।


