GIFT Nifty Indicator: भारतीय शेयर बाजार में आज यानी मंगलवार को कारोबार की शुरुआत सुस्त रहने के संकेत मिल रहे हैं। निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों के बीच निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान बातचीत और अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी। GIFT Nifty में मामूली कमजोरी देखने को मिल रही है, जिससे घरेलू बाजार में फ्लैट से हल्की गिरावट के साथ शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं।
भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड करीब 88 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जबकि WTI क्रूड 82.45 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया। तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए अहम है, क्योंकि इससे महंगाई, कंपनियों की लागत और देश के व्यापार घाटे पर दबाव पड़ सकता है।
GIFT Nifty में मामूली गिरावट
मंगलवार सुबह करीब 7:45 बजे GIFT Nifty लगभग 20 अंक यानी 0.08 फीसदी की गिरावट के साथ 24,611 के आसपास कारोबार कर रहा था। यह संकेत देता है कि सोमवार को निफ्टी 50 के 24,583.80 पर बंद होने के बाद घरेलू बाजार की शुरुआत काफी हद तक सपाट रह सकती है।
सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में पूरे दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार के दौरान शुरुआती बढ़त के बावजूद प्रमुख इंडेक्स अपने इंट्राडे हाई को बरकरार नहीं रख सके। अंत में सेंसेक्स 43.30 अंक यानी 0.06 फीसदी की बढ़त के साथ 78,542.40 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 13.20 अंक यानी 0.05 फीसदी चढ़कर 24,583.80 के स्तर पर बंद हुआ।
ऐसे में मंगलवार को बाजार की दिशा तय करने में ग्लोबल संकेतों के साथ-साथ निफ्टी के अहम तकनीकी स्तर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से बढ़ी चिंता
बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते तथा Strait of Hormuz को दोबारा खोलने को लेकर बातचीत में नई अड़चनें सामने आई हैं। इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई दिया।
ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 88 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 82.45 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया। दोनों प्रमुख बेंचमार्क में सोमवार को भी लगभग 5 फीसदी की जोरदार तेजी देखने को मिली थी।
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अनिश्चितता का असर कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारतीय शेयर बाजार के लिए भी चिंता का कारण बन सकती है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में क्रूड महंगा होने पर आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर भी दबाव बन सकता है। इसका असर उन कंपनियों पर ज्यादा पड़ सकता है जिनकी लागत सीधे तौर पर पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़ी है।
अमेरिका-ईरान बातचीत पर बाजार की नजर
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर निवेशकों की नजर बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की शांति समझौते से जुड़ी शर्तों के जवाब में मुआवजे की मांग रखी है।
इससे Strait of Hormuz को दोबारा खोलने और क्षेत्रीय तनाव कम करने को लेकर बातचीत और जटिल हो गई है। बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर इस क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
यही वजह है कि घरेलू शेयर बाजार में निवेशक फिलहाल आक्रामक खरीदारी से बचते हुए ग्लोबल घटनाक्रम पर नजर रख सकते हैं।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में कोई स्पष्ट दिशा नहीं दिखाई दी। निवेशक एक तरफ भू-राजनीतिक घटनाक्रम का आकलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत शेयरों का MSCI इंडेक्स करीब 0.2 फीसदी ऊपर रहा। दक्षिण कोरिया का KOSPI भी लगभग 0.3 फीसदी की बढ़त में कारोबार करता दिखाई दिया। जापान के बाजार छुट्टी के कारण बंद रहे।
अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स में भी मामूली मजबूती देखने को मिली। नैस्डैक फ्यूचर्स करीब 0.28 फीसदी और S&P 500 फ्यूचर्स लगभग 0.10 फीसदी ऊपर रहे।
हालांकि, पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजारों में कमजोरी रही थी। S&P 500 में 0.06 फीसदी, नैस्डैक कंपोजिट में 0.32 फीसदी और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
सेमीकंडक्टर शेयरों में कमजोरी और Strait of Hormuz को लेकर अनिश्चितता ने अमेरिकी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर भी नजर
इस सप्ताह बाजार की नजर अमेरिका के महंगाई संबंधी आंकड़ों पर भी रहेगी। इन आंकड़ों से निवेशकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि फेडरल रिजर्व आने वाले समय में ब्याज दरों को लेकर किस दिशा में आगे बढ़ सकता है।
अगर महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा आते हैं तो ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हो सकती है। दूसरी ओर, महंगाई में नरमी आने पर बाजार में यह उम्मीद बढ़ सकती है कि फेड भविष्य में नरम मौद्रिक नीति अपना सकता है।
इसलिए अमेरिकी महंगाई के आंकड़े भारतीय बाजार समेत दुनिया भर के इक्विटी बाजारों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
निफ्टी के लिए 24,500 का स्तर अहम
तकनीकी स्तरों की बात करें तो एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, अमेरिकी-ईरान बातचीत बाजार के लिए फिलहाल एक प्रमुख ट्रिगर बनी हुई है। जब तक इस मोर्चे पर तस्वीर साफ नहीं होती, तब तक बाजार में खबरों के आधार पर उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
उनके मुताबिक निकट अवधि में निफ्टी करीब 24,500 से 24,700 के दायरे में रह सकता है।
निफ्टी के लिए 24,600-24,700 का क्षेत्र महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस के तौर पर देखा जा रहा है। यदि इंडेक्स इस जोन के ऊपर मजबूती से टिकता है और ब्रेकआउट देता है, तो आगे 24,800 से 25,000 के स्तर की ओर बढ़ने की संभावना बन सकती है।
वहीं दूसरी तरफ 24,500 तत्काल सपोर्ट के तौर पर महत्वपूर्ण रहेगा। यदि निफ्टी इस स्तर के नीचे निर्णायक रूप से फिसलता है तो बिकवाली बढ़ सकती है और इंडेक्स 24,400-24,300 के स्तर तक कमजोर हो सकता है।
बैंक निफ्टी में भी उतार-चढ़ाव संभव
बैंक निफ्टी समेत अन्य प्रमुख इंडेक्स में भी आज ग्लोबल संकेतों और बाजार की दिशा के आधार पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वीकली एक्सपायरी के कारण बाजार में सामान्य दिनों की तुलना में वोलैटिलिटी बढ़ने की संभावना रहती है।
ऐसे में ट्रेडर्स को केवल शुरुआती तेजी या गिरावट देखकर पोजीशन बनाने के बजाय अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस के आसपास प्राइस एक्शन पर नजर रखनी चाहिए।
विशेष रूप से निफ्टी के 24,500 और 24,700 के स्तर आज बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। 24,700 के ऊपर टिकाव तेजी को मजबूत कर सकता है, जबकि 24,500 के नीचे कमजोरी बढ़ने की आशंका रहेगी।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
कुल मिलाकर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार के लिए संकेत सावधानी भरे नजर आ रहे हैं। GIFT Nifty में मामूली कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिका-ईरान तनाव और अमेरिकी बाजारों की कमजोरी बाजार पर दबाव डाल सकती है।
हालांकि, एशियाई बाजारों में पूरी तरह से बिकवाली नहीं है और अमेरिकी फ्यूचर्स में भी मामूली मजबूती दिखाई दे रही है। इसलिए बाजार में किसी एक दिशा में तेज मूवमेंट की बजाय शुरुआती कारोबार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
निवेशकों को आज कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और ग्लोबल मार्केट संकेतों के साथ निफ्टी के 24,500-24,700 जोन पर विशेष नजर रखनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह खबर बाजार में उपलब्ध जानकारी और एक्सपर्ट की राय के आधार पर तैयार की गई है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। NewsJagran.in पर दिए गए विचार संबंधित एक्सपर्ट के निजी विचार हैं और इन्हें निवेश सलाह न माना जाए। निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले अपने प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


