नई दिल्ली। अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी (Gautam Adani) के खिलाफ अमेरिका में चल रहे कथित रिश्वतखोरी मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अदाणी के वकीलों ने अमेरिकी अदालत से उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक आरोपों को औपचारिक रूप से खारिज करने की मांग की है। यह अनुरोध ऐसे समय किया गया है जब अमेरिकी न्याय विभाग (U.S. Department of Justice) पहले ही संकेत दे चुका है कि वह इस मामले में आगे आपराधिक मुकदमा नहीं चलाएगा।
HighLights
- गौतम अदाणी के वकीलों ने अमेरिकी जज से आपराधिक आरोप खारिज करने की मांग की।
- अमेरिकी न्याय विभाग पहले ही इस मामले में मुकदमा न चलाने का फैसला कर चुका है।
- मामला भारतीय अधिकारियों को कथित रिश्वत देने के आरोपों से जुड़ा है।
यदि अदालत इस अनुरोध को स्वीकार कर लेती है, तो गौतम अदाणी के खिलाफ अमेरिका में चल रहा आपराधिक मामला समाप्त हो सकता है। हालांकि अंतिम फैसला अमेरिकी अदालत के हाथ में है।
क्या है पूरा मामला?
साल 2024 में अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि गौतम अदाणी और उनके सहयोगियों ने भारत में सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने की योजना बनाई थी। आरोपों के अनुसार, इसका उद्देश्य अदाणी समूह की एक सहयोगी कंपनी को सौर ऊर्जा (Solar Power) परियोजनाओं से जुड़े अनुबंध और मंजूरी दिलाना था।
अदाणी समूह ने शुरुआत से ही इन आरोपों को खारिज करते हुए किसी भी तरह की गलत गतिविधि से इनकार किया है।
जज को लिखी गई चिट्ठी में क्या कहा गया?
ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज निकोलस गारौफिस को भेजे गए पत्र में गौतम अदाणी के वरिष्ठ वकील रॉबर्ट जिउफ्रा ने अदालत से अनुरोध किया कि आपराधिक आरोपों को तत्काल खारिज किया जाए।
पत्र में कहा गया कि:
- यह मामला अमेरिकी कानून के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से बाहर आता है।
- अभियोजन पक्ष भारत में कथित रिश्वतखोरी के आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर सकता।
- जब अमेरिकी न्याय विभाग स्वयं मुकदमा नहीं चलाना चाहता, तब इस मामले को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है।
वकीलों ने अदालत से इस आधार पर पूरे आपराधिक मामले को समाप्त करने की मांग की है।
सिविल केस को लेकर भी की गई मांग
गौतम अदाणी के वकीलों ने अदालत से अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) द्वारा लगाए गए सिविल आरोपों को भी औपचारिक रूप से समाप्त करने का अनुरोध किया है।
जानकारी के अनुसार, इस मामले में एक सेटलमेंट प्रस्ताव रखा गया है, जिसके तहत:
- गौतम अदाणी 6 मिलियन डॉलर का भुगतान करेंगे।
- सागर अदाणी 12 मिलियन डॉलर का भुगतान करेंगे।
इसके अलावा, अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने ईरान पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन से जुड़े एक अलग मामले के निपटारे के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को 275 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर भी सहमति जताई है। यह मामला कथित रिश्वतखोरी वाले केस से अलग माना जा रहा है।
अदाणी समूह का क्या कहना है?
अदाणी समूह लगातार यह कहता रहा है कि उसने कोई गैरकानूनी कार्य नहीं किया है। कंपनी का कहना है कि वह सभी कानूनी प्रक्रियाओं में पूरा सहयोग कर रही है और अपने पक्ष को अदालत के सामने मजबूती से रखेगी।
समूह का यह भी कहना है कि उसके कारोबारी निर्णय पूरी पारदर्शिता और कानून के दायरे में लिए गए हैं।
AGM में भी बोले गौतम अदाणी
24 जून को आयोजित अदाणी समूह की वार्षिक आम बैठक (AGM) में गौतम अदाणी ने कंपनी की विकास यात्रा पर बात करते हुए कहा कि समूह ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद लगातार प्रगति की है।
उन्होंने कहा,
“हमारे लिए यह तरक्की आसान हालात में नहीं हुई। यह बहुत अधिक जांच-पड़ताल के बीच हुई। फिर भी, हम झुके नहीं। हम रुके नहीं।”
उन्होंने भविष्य में इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और नई तकनीकों में निवेश जारी रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
आगे क्या होगा?
अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण फैसला अमेरिकी अदालत का होगा। यदि अदालत अदाणी के वकीलों की दलीलों से सहमत होती है, तो उनके खिलाफ चल रहे आपराधिक आरोप औपचारिक रूप से समाप्त हो सकते हैं। वहीं यदि अदालत इस अनुरोध को अस्वीकार करती है, तो मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
फिलहाल निवेशकों और बाजार की नजर अदालत के अगले कदम पर बनी हुई है, क्योंकि इस फैसले का असर अदाणी समूह की वैश्विक कारोबारी छवि और निवेशकों के भरोसे पर पड़ सकता है।


