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    # UP के सरकारी इंजीनियर ने खड़ा किया था खरबों का JP साम्राज्य, फिर कर्ज ने किया बर्बाद; अब अदाणी के हाथों में कंपनी की कमान **JP Associates Story:** उत्तर प्रदेश के एक सरकारी इंजीनियर ने अपनी नौकरी छोड़कर कारोबार की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते हजारों करोड़ रुपये का कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर दिया। यह कहानी है जयप्रकाश गौड़ और जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) की। यमुना एक्सप्रेसवे, बड़े बांध, सीमेंट प्लांट, बिजली परियोजनाएं और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाला यह समूह कभी देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारियों में गिना जाता था। लेकिन जरूरत से ज्यादा कर्ज, आर्थिक मंदी और कारोबार में आई मुश्किलों ने इस साम्राज्य की नींव हिला दी। आखिरकार कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में पहुंच गई और अब इसका अधिग्रहण अदाणी समूह ने कर लिया है। **बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।** कारोबार की दुनिया में कई ऐसी कहानियां हैं, जहां एक छोटे से सफर की शुरुआत करने वाला व्यक्ति बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर देता है। लेकिन कभी-कभी यही साम्राज्य समय के साथ कर्ज और आर्थिक चुनौतियों के कारण ढह भी जाता है। जयप्रकाश एसोसिएट्स की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय उत्तर भारत में जेपी समूह का नाम बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता था। कंपनी ने सड़क निर्माण से लेकर बिजली उत्पादन, सीमेंट, होटल और रियल एस्टेट तक कई क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बनाई। ग्रेटर नोएडा से आगरा को जोड़ने वाला यमुना एक्सप्रेसवे भी इसी समूह की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। जेपी समूह की पहचान केवल बड़े प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं थी। लाखों निवेशकों और कर्मचारियों का भी इस कंपनी से जुड़ाव था। लेकिन लगातार बढ़ते कर्ज और कारोबार में आई गिरावट ने कंपनी को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया, जहां से वापसी मुश्किल हो गई। अब अदाणी समूह ने दिवालिया समाधान प्रक्रिया के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ कर लिया है। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे एक सरकारी इंजीनियर ने यह कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया और फिर यह आर्थिक संकट में कैसे फंस गया। ## सरकारी इंजीनियर से कारोबारी बनने तक का सफर जयप्रकाश गौड़ का जन्म वर्ष 1931 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ था। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया और इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर नौकरी शुरू की। सरकारी सेवा के दौरान उन्हें निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ी परियोजनाओं को समझने का मौका मिला। हालांकि, उनके मन में खुद का कारोबार शुरू करने की इच्छा थी। करीब सात साल तक सरकारी नौकरी करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और निर्माण कार्यों की ठेकेदारी शुरू कर दी। शुरुआत में उनके पास कारोबार के लिए बहुत ज्यादा पूंजी नहीं थी। उन्होंने अपनी करीब 10 हजार रुपये की बचत से छोटे-मोटे निर्माण और सड़क निर्माण के ठेके लेने शुरू किए। धीरे-धीरे अनुभव और काम के आधार पर उन्हें बड़ी परियोजनाएं मिलने लगीं। वर्ष 1979 में उन्होंने जयप्रकाश एसोसिएट्स की स्थापना की। शुरुआत में कंपनी का मुख्य कारोबार निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ा था। समय के साथ कंपनी ने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी जगह बनाई और जेपी समूह का विस्तार होता चला गया। ## बांध से लेकर बिजली और सीमेंट तक फैला कारोबार जेपी समूह ने निर्माण क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करने के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की तरफ कदम बढ़ाया। टिहरी बांध और विष्णुप्रयाग जलविद्युत परियोजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से कंपनी की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई। इसके बाद समूह ने सीमेंट, बिजली उत्पादन, होटल और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार शुरू किया। कंपनी का उद्देश्य केवल निर्माण ठेके लेने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के विकास और संचालन तक पहुंच गया। इस विस्तार ने जयप्रकाश एसोसिएट्स को देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर समूहों में शामिल कर दिया। कंपनी के पास अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार था और निवेशकों के बीच भी इसकी अच्छी पहचान बन गई थी। ## यमुना एक्सप्रेसवे ने दिलाई देशभर में पहचान जेपी समूह के इतिहास में यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना को एक बड़ा पड़ाव माना जाता है। वर्ष 2003 में ग्रेटर नोएडा से आगरा के बीच एक्सप्रेसवे बनाने की परियोजना जेपी समूह को मिली। करीब 165 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण समूह की कंपनी जेपी इंफ्राटेक ने किया। इस परियोजना के तहत सड़क निर्माण के साथ-साथ एक्सप्रेसवे के आसपास रियल एस्टेट विकास के अधिकार भी मिले। इससे कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रॉपर्टी कारोबार दोनों में विस्तार का अवसर मिला। वर्ष 2012 में यमुना एक्सप्रेसवे को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क बेहतर हुआ। इस परियोजना ने जेपी समूह को देशभर में पहचान दिलाई। इसी दौरान कंपनी ने ग्रेटर नोएडा में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट का निर्माण भी किया। इस रेसिंग सर्किट पर वर्ष 2011 से 2013 तक फॉर्मूला-1 इंडियन ग्रां प्री का आयोजन हुआ। यह परियोजना भारत में मोटरस्पोर्ट्स के लिहाज से काफी चर्चित रही। ## 2008 की मंदी के बाद बिगड़ने लगे हालात तेजी से विस्तार कर रहे जेपी समूह के लिए वर्ष 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी बड़ा झटका साबित हुई। मंदी के बाद रियल एस्टेट बाजार में सुस्ती आने लगी। मकानों की बिक्री प्रभावित हुई और निर्माण परियोजनाओं से मिलने वाली रकम में देरी होने लगी। दूसरी तरफ बिजली और सीमेंट कारोबार में भी कंपनी को उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हो रही थी। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश की जरूरत थी, जबकि कारोबार से पर्याप्त नकदी नहीं आ रही थी। बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट जैसी बड़ी परियोजनाओं पर हुआ निवेश भी कंपनी के वित्तीय दबाव को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल रहा। कंपनी ने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए बड़ी रकम उधार ली थी, लेकिन आमदनी और नकदी का प्रवाह कर्ज चुकाने की रफ्तार के अनुरूप नहीं रहा। कर्ज का बोझ बढ़ने के साथ कंपनी को अपनी कई संपत्तियां और कारोबारी हिस्सेदारियां बेचनी पड़ीं। इसके बावजूद वित्तीय स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। धीरे-धीरे जेपी समूह का संकट गहराता चला गया। ## घर खरीदारों से लेकर बैंकों तक, हर कोई हुआ परेशान जेपी समूह का आर्थिक संकट केवल कंपनी और बैंकों तक सीमित नहीं रहा। इसका असर उन हजारों लोगों पर भी पड़ा, जिन्होंने कंपनी के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में अपने घर बुक किए थे। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जेपी विशटाउन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में बड़ी संख्या में घर खरीदारों का पैसा फंस गया। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत लगाकर घर खरीदे थे, लेकिन उन्हें तय समय पर फ्लैट नहीं मिल पाए। इस स्थिति ने जेपी समूह की मुश्किलें और बढ़ा दीं। एक तरफ बैंक और वित्तीय संस्थान अपना कर्ज वापस मांग रहे थे, वहीं दूसरी तरफ घर खरीदार अपने घरों का इंतजार कर रहे थे। ## 2017 में शुरू हुई दिवालिया प्रक्रिया जेपी समूह की मुश्किलें सबसे पहले उसकी सहायक कंपनी जेपी इंफ्राटेक के मामले में सामने आईं। अगस्त 2017 में कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की गई। बाद में सुरक्षा समूह ने समाधान प्रक्रिया के तहत जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, इससे पूरे जेपी समूह की वित्तीय परेशानियां खत्म नहीं हुईं। समूह की प्रमुख कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड भी भारी कर्ज के कारण संकट में फंस गई। 3 जून 2024 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के खिलाफ कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। इस मामले में वित्तीय लेनदारों ने करीब 57,185 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था। इसके बाद कंपनी के कारोबार और संपत्तियों के समाधान के लिए बोली प्रक्रिया शुरू हुई। कई बड़े कारोबारी समूहों ने कंपनी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। ## वेदांता ने लगाई बड़ी बोली, लेकिन अदाणी ने मारी बाजी जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण की प्रक्रिया में वेदांता समूह और अदाणी समूह समेत कई कंपनियों ने हिस्सा लिया। सितंबर 2025 में वेदांता समूह की 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की बोली की खबर सामने आई थी। इससे माना जा रहा था कि कंपनी का नियंत्रण अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह के पास जा सकता है। हालांकि, बाद में समाधान प्रक्रिया में स्थिति बदल गई। नवंबर 2025 में वित्तीय लेनदारों ने अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस प्रस्ताव को कर्जदाताओं के करीब 89 फीसदी वोट मिले। इसके बाद 17 मार्च 2026 को NCLT की इलाहाबाद पीठ ने अदाणी एंटरप्राइजेज की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया। हालांकि, वेदांता समूह ने इस फैसले को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में चुनौती दी थी। मई 2026 में NCLAT ने वेदांता की अपील खारिज कर दी। इससे अदाणी समूह के अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ने का रास्ता मिला। ## अब अदाणी समूह के नियंत्रण में जेपी की संपत्तियां जयप्रकाश एसोसिएट्स के समाधान के बाद समूह की कई संपत्तियां और कारोबार अदाणी समूह की रणनीति का हिस्सा बन गए हैं। अदाणी समूह की अलग-अलग कंपनियां जेपी समूह की विभिन्न कारोबारी इकाइयों और परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी हासिल कर रही हैं। इसी क्रम में अदाणी पावर ने जेपी पावर से जुड़ी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया। वहीं, जेपी समूह के कुछ सीमेंट प्लांटों को अदाणी समूह ने डालमिया भारत को बेचने का फैसला किया। इस तरह जिस जेपी समूह ने कभी उत्तर भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई थी, उसका कारोबारी स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है। जयप्रकाश गौड़ की कहानी कारोबार की दुनिया में बड़े सपने, तेजी से विस्तार और वित्तीय अनुशासन के महत्व को समझाती है। महज 10 हजार रुपये की बचत से शुरू हुआ सफर देश के बड़े कारोबारी साम्राज्य तक पहुंचा, लेकिन भारी कर्ज और नकदी की कमी ने अंततः इस साम्राज्य को दिवालिया प्रक्रिया तक पहुंचा दिया। **Source:** उपलब्ध कारोबारी रिपोर्टों और दिवालिया समाधान प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी पर आधारित। jp-associates-jayprakash-gaur-rise-fall-adani-takeover-story
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Reading: DLF The Dahlias: कौन हैं मानव सरदाना? ₹271 करोड़ में खरीदा भारत का सबसे महंगा फ्लैट, जानें कहां से आया इतना पैसा
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DLF The Dahlias: कौन हैं मानव सरदाना? ₹271 करोड़ में खरीदा भारत का सबसे महंगा फ्लैट, जानें कहां से आया इतना पैसा

Namam Sharma
Last updated: 2026/08/10 at 7:52 अपराह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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9 Min Read
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DLF The Dahlias: गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड स्थित DLF के सुपर लग्जरी प्रोजेक्ट ‘द डहलियास’ में ₹271 करोड़ की रिकॉर्डतोड़ डील हुई है। इस पेंटहाउस को खरीदने वाले कारोबारी मानव सरदाना हैं। जानिए कौन हैं मानव सरदाना, उनका कारोबार क्या है और इतनी बड़ी प्रॉपर्टी खरीदने के लिए पैसा कहां से आया।

Contents
17,200 वर्ग फुट का आलीशान पेंटहाउसइससे पहले मधुसूदन केला ने बनाया था रिकॉर्डकौन हैं मानव सरदाना?1969 में शुरू हुआ था Imperial Auto का सफर25,000 से ज्यादा प्रोडक्ट्स की रेंजआखिर ₹271 करोड़ की डील के लिए पैसा कहां से आया?The Dahlias क्यों है इतना खास?भारत के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार के लिए बड़ा संकेतनिष्कर्ष

नई दिल्ली: भारत के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार में एक ऐसी डील हुई है, जिसने बड़े-बड़े रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए हैं। गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर स्थित DLF The Dahlias में एक पेंटहाउस करीब ₹271 करोड़ में खरीदा गया है। इस यूनिट के खरीदार कारोबारी मानव सरदाना (Manav Sardana) हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, यह भारत में किसी एक रेजिडेंशियल यूनिट की अब तक की सबसे महंगी खरीद बताई जा रही है।

इस डील ने सिर्फ इसलिए सुर्खियां नहीं बटोरी हैं कि इसकी कीमत ₹271 करोड़ है, बल्कि इसलिए भी कि खरीदार मानव सरदाना आम तौर पर सार्वजनिक या मीडिया की चकाचौंध में नजर नहीं आते। उनका कारोबारी परिवार लंबे समय से ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के कारोबार से जुड़ा रहा है।

17,200 वर्ग फुट का आलीशान पेंटहाउस

मानव सरदाना ने DLF के The Dahlias प्रोजेक्ट में जो पेंटहाउस खरीदा है, उसका सुपर एरिया करीब 17,200 वर्ग फुट बताया गया है। वहीं इसका कारपेट एरिया करीब 10,500 वर्ग फुट है।

₹271 करोड़ की कुल कीमत के हिसाब से देखें तो सुपर एरिया के आधार पर प्रॉपर्टी की कीमत लगभग ₹1.58 लाख प्रति वर्ग फुट बैठती है। वहीं कारपेट एरिया के हिसाब से यह कीमत करीब ₹2.6 लाख प्रति वर्ग फुट तक पहुंच जाती है।

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह सिर्फ एक सामान्य लग्जरी अपार्टमेंट नहीं, बल्कि देश के सबसे महंगे और प्रीमियम रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी सौदों में से एक है।

इससे पहले मधुसूदन केला ने बनाया था रिकॉर्ड

The Dahlias प्रोजेक्ट पहले भी अपनी महंगी प्रॉपर्टी डील के कारण चर्चा में रहा है। इससे पहले दिग्गज निवेशक मधुसूदन केला ने इसी प्रोजेक्ट में एक यूनिट करीब ₹120.7 करोड़ में खरीदी थी।

मानव सरदाना की ₹271 करोड़ की डील ने इस रिकॉर्ड को काफी पीछे छोड़ दिया है। यानी एक ही प्रोजेक्ट में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमत ने कुछ ही समय में एक नया स्तर छू लिया है।

कौन हैं मानव सरदाना?

मानव सरदाना का नाम टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप या एंटरटेनमेंट की दुनिया में भले ही ज्यादा चर्चित नहीं है, लेकिन उनका कारोबारी परिवार भारत के ऑटो कंपोनेंट उद्योग में लंबे समय से मौजूद है।

सरदाना परिवार का संबंध Imperial Auto Industries से है। यह कंपनी ऑटोमोबाइल और इंडस्ट्रियल व्हीकल इंडस्ट्री के लिए विभिन्न तरह के फ्लूइड ट्रांसमिशन और ऑटो कंपोनेंट्स बनाने के कारोबार में है।

कंपनी के उत्पादों में रबर होज, मेटल और नायलॉन ट्यूब, होज असेंबली, ब्रेक ट्यूब और फ्यूल इंजेक्शन ट्यूब जैसे उत्पाद शामिल हैं। इनका इस्तेमाल ऑटोमोबाइल और औद्योगिक वाहनों में किया जाता है।

यानी मानव सरदाना की संपत्ति का आधार किसी अचानक बने स्टार्टअप या हालिया टेक बिजनेस से नहीं, बल्कि कई दशकों पुराने मैन्युफैक्चरिंग कारोबार से जुड़ा है।

1969 में शुरू हुआ था Imperial Auto का सफर

Imperial Auto Industries की शुरुआत साल 1969 में फरीदाबाद, हरियाणा से हुई थी। पिछले पांच दशक से ज्यादा समय में कंपनी ने अपने कारोबार और मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क का काफी विस्तार किया है।

आज कंपनी की मौजूदगी भारत के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बताई जाती है। कंपनी के भारत, जर्मनी और अमेरिका में 20 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट होने की जानकारी सामने आई है।

कंपनी ऑटोमोबाइल सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों को अपने उत्पाद सप्लाई करती है। इसके उत्पादों की बड़ी रेंज होने के कारण इसका कारोबार सिर्फ किसी एक वाहन निर्माता या एक ही तरह के ऑटो पार्ट तक सीमित नहीं है।

25,000 से ज्यादा प्रोडक्ट्स की रेंज

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक Imperial Auto के पास 25,000 से ज्यादा उत्पादों की रेंज बताई जाती है। कंपनी भारत के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी ऑटोमोबाइल निर्माताओं और दूसरे औद्योगिक ग्राहकों को अपने उत्पाद सप्लाई करती है।

साल 2022 तक Imperial Group का रेवेन्यू करीब ₹2,200 करोड़ बताया गया था। हालांकि कंपनी के कारोबार और ग्रुप की मौजूदा वित्तीय स्थिति को इससे अलग-अलग समझना जरूरी है, क्योंकि समय के साथ कारोबार के आकार और हिस्सेदारी में बदलाव हो सकता है।

कंपनी ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में बदलती तकनीक के साथ खुद को आगे बढ़ाने की कोशिश भी की है। इलेक्ट्रिक व्हीकल बाजार के विस्तार के बीच कंपनी बैटरी कूलिंग और थर्मल मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर काम कर रही है।

आखिर ₹271 करोड़ की डील के लिए पैसा कहां से आया?

मानव सरदाना की इस प्रॉपर्टी खरीद को समझने के लिए Imperial Auto के इतिहास में हुई एक बड़ी डील को देखना जरूरी है।

मार्च 2022 में ग्लोबल प्राइवेट इक्विटी फर्म Warburg Pincus ने Imperial Auto Industries में दो चरणों में करीब 70% कंट्रोलिंग हिस्सेदारी हासिल की थी।

यह सौदा सरदाना परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया। दशकों से चले आ रहे मैन्युफैक्चरिंग कारोबार में बड़ी हिस्सेदारी की बिक्री से परिवार को बड़ी मात्रा में पूंजी मिली। इसी कारोबारी लेनदेन के बाद परिवार की संपत्ति का एक हिस्सा लिक्विड फंड में बदला।

यही वजह है कि मानव सरदाना की ₹271 करोड़ की प्रॉपर्टी खरीद को सिर्फ एक लग्जरी रियल एस्टेट निवेश के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे परिवार के लंबे समय से चले आ रहे कारोबार और 2022 में हुई बड़ी हिस्सेदारी बिक्री की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

The Dahlias क्यों है इतना खास?

DLF The Dahlias गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर स्थित एक अल्ट्रा-लक्जरी रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट है। इसे भारत के सबसे महंगे और प्रीमियम रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है।

इस प्रोजेक्ट में बड़े आकार के अपार्टमेंट और पेंटहाउस के साथ हाई-एंड सुविधाओं पर जोर दिया गया है। गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड की लोकेशन भी इसकी कीमतों को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल है।

दिल्ली-एनसीआर में लग्जरी रियल एस्टेट की मांग बढ़ने के साथ इस तरह की अल्ट्रा-प्रीमियम प्रॉपर्टी में निवेश करने वाले हाई-नेट-वर्थ खरीदारों की संख्या भी बढ़ी है।

भारत के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार के लिए बड़ा संकेत

मानव सरदाना की ₹271 करोड़ की खरीद सिर्फ एक व्यक्तिगत प्रॉपर्टी डील नहीं है। यह भारत के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार में बढ़ती कीमतों और अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ खरीदारों की बढ़ती क्षमता का भी संकेत देती है।

खास बात यह है कि इतनी बड़ी रकम में खरीदी गई प्रॉपर्टी का बाजार सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं रह गया है। गुरुग्राम जैसे शहरों में भी प्रीमियम रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स अब ऐसे सौदों का हिस्सा बन रहे हैं।

मानव सरदाना की डील इस बात को भी दिखाती है कि पुराने पारिवारिक कारोबार से पैदा हुई संपत्ति अब रियल एस्टेट जैसे दूसरे एसेट क्लास में बड़े पैमाने पर निवेश का आधार बन रही है।

निष्कर्ष

₹271 करोड़ में DLF The Dahlias का पेंटहाउस खरीदकर मानव सरदाना ने भारत के रेजिडेंशियल रियल एस्टेट बाजार में नया रिकॉर्ड बनाया है। सरदाना परिवार की संपत्ति का आधार कई दशकों से चल रहा Imperial Auto Industries का कारोबार है। साल 2022 में Warburg Pincus द्वारा कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने के बाद परिवार को मिली पूंजी ने इस तरह के बड़े निवेश के लिए वित्तीय आधार तैयार किया।

इस डील के साथ एक बात साफ है—भारत में अल्ट्रा-लग्जरी रियल एस्टेट का बाजार अब सिर्फ मुंबई और दक्षिण दिल्ली तक सीमित नहीं है। गुरुग्राम भी देश के सबसे महंगे रेजिडेंशियल सौदों के केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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