US Tariff on India: रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की ओर से 100% तक टैरिफ लगाने की धमकी ने भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर अमेरिका भारतीय उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाता भी है, तो भारत के पास अपने निर्यात को दूसरे बड़े बाजारों की ओर मोड़ने का विकल्प मौजूद है। विशेषज्ञों के मुताबिक, करीब 15 देशों में 200 अरब डॉलर यानी लगभग 19 लाख करोड़ रुपये का संभावित बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए उपलब्ध हो सकता है।
अमेरिका की टैरिफ धमकी के बीच भारत के पास बड़ा विकल्प
अमेरिका लंबे समय से भारत के साथ व्यापार और टैरिफ को लेकर बातचीत करता रहा है। अब रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की संभावित कार्रवाई ने भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है।
भारत के लिए अमेरिका एक महत्वपूर्ण एक्सपोर्ट मार्केट है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से अमेरिका को मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट करीब 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा करीब 86.5 अरब डॉलर था।
ऐसे में अगर अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर बहुत ज्यादा शुल्क लगाया जाता है, तो कुछ सेक्टरों पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय कंपनियों के पास दूसरे विकल्प नहीं हैं।
15 देशों में 200 अरब डॉलर का बाजार
प्रमुख अर्थशास्त्री डॉ. एसपी शर्मा के मुताबिक, अमेरिका के अलावा करीब 15 देशों में ऐसे बाजार मौजूद हैं जहां भारत अपने उत्पादों का निर्यात बढ़ा सकता है। इन बाजारों में भारत के लिए लगभग 200 अरब डॉलर का अवसर उपलब्ध हो सकता है।
इन संभावित बाजारों में नीदरलैंड्स, फ्रांस, ब्रिटेन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नेपाल और लैटिन अमेरिका के कई देश शामिल हैं।
इसका मतलब यह है कि भारतीय निर्यातक सिर्फ अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय अपने कारोबार को अलग-अलग देशों में फैला सकते हैं। अगर सही रणनीति अपनाई जाती है तो अमेरिका में संभावित टैरिफ के असर को कुछ हद तक दूसरे बाजारों में बढ़ी बिक्री से संतुलित किया जा सकता है।
अमेरिका के मुकाबले दूसरे बाजारों में तेज एक्सपोर्ट ग्रोथ
डॉ. एसपी शर्मा के अनुसार, भारत के निर्यात में सिर्फ अमेरिकी बाजार की ही भूमिका नहीं है। अमेरिका को भारत का एक्सपोर्ट करीब 10-15% की दर से बढ़ रहा है, जबकि कई वैकल्पिक बाजारों में भारतीय निर्यात की वृद्धि दर करीब 20-25% तक देखी गई है।
यह आंकड़ा भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि भारतीय कंपनियां पहले से ही अमेरिका के बाहर अपने बाजार का विस्तार कर रही हैं।
अगर इन देशों में भारतीय उत्पादों की मांग इसी तरह बढ़ती रही तो आने वाले समय में भारत के कुल एक्सपोर्ट में अमेरिका की हिस्सेदारी को संतुलित किया जा सकता है।
किन भारतीय उत्पादों को मिल सकता है फायदा?
भारत का एक्सपोर्ट पोर्टफोलियो काफी विविध है। भारतीय कंपनियां टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कई अन्य उत्पादों का निर्यात करती हैं।
इनमें से कई उत्पादों में भारत की सबसे बड़ी ताकत कम लागत और प्रतिस्पर्धी कीमत है। श्रम-केंद्रित उद्योगों में भारत की बड़ी क्षमता है और इसी वजह से वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की मांग बनी हुई है।
यदि अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगा होता है, तो निर्यातकों के लिए यूरोप, पश्चिम एशिया, दक्षिण एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर पैदा हो सकता है।
UAE और सऊदी अरब जैसे बाजार क्यों अहम हैं?
भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र पहले से ही एक महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र है। UAE और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ भारत के मजबूत कारोबारी संबंध हैं।
UAE भारत के लिए सिर्फ एक बड़ा बाजार ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों तक पहुंच बनाने का महत्वपूर्ण कारोबारी केंद्र भी है। वहीं सऊदी अरब में बुनियादी ढांचे, निर्माण, खाद्य उत्पादों, इंजीनियरिंग और कई अन्य क्षेत्रों में मांग बढ़ रही है।
अगर भारतीय कंपनियां इन बाजारों में अपनी सप्लाई बढ़ाती हैं, तो अमेरिका पर किसी एक सेक्टर या उत्पाद की निर्भरता को कम किया जा सकता है।
यूरोप में भी बढ़ाया जा सकता है एक्सपोर्ट
नीदरलैंड्स, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे यूरोपीय बाजार भी भारत के लिए महत्वपूर्ण विकल्प हैं। यूरोप में भारतीय उत्पादों की पहले से मौजूद मांग को देखते हुए निर्यातकों के पास कारोबार बढ़ाने का आधार मौजूद है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत को अब अपनी एक्सपोर्ट रणनीति में मार्केट डायवर्सिफिकेशन पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। इसका मतलब है कि किसी एक देश में बिक्री पर अत्यधिक निर्भर रहने के बजाय कई देशों में ग्राहक और सप्लाई नेटवर्क तैयार करना।
यह रणनीति सिर्फ अमेरिकी टैरिफ के जोखिम को कम नहीं करेगी, बल्कि भारतीय कंपनियों को वैश्विक व्यापार में ज्यादा मजबूत स्थिति भी दे सकती है।
अमेरिका को 100% टैरिफ लगाने से क्या नुकसान होगा?
अगर भारतीय उत्पादों पर 100% तक टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका असर सिर्फ भारत पर नहीं पड़ेगा। इसका एक हिस्सा अमेरिकी बाजार और वहां के उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है।
आयात शुल्क बढ़ने के बाद अमेरिकी आयातकों के लिए भारतीय सामान की लागत बढ़ सकती है। कंपनियां इस अतिरिक्त लागत को अपने ग्राहकों तक पहुंचा सकती हैं। ऐसी स्थिति में अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
इससे कुछ उत्पादों की कीमत बढ़ने और अमेरिकी उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बढ़ने की संभावना हो सकती है।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी पड़ेगा असर
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते काफी महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का बड़ा व्यापार होता है और दोनों अर्थव्यवस्थाओं की कंपनियों के बीच कारोबारी संबंध भी गहरे हैं।
इसके अलावा दोनों देश व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते रहे हैं। ऐसे में अगर टैरिफ को लेकर बड़ा टकराव होता है, तो इसका असर दोनों देशों के कारोबारी हितों पर पड़ सकता है।
डॉ. एसपी शर्मा का मानना है कि व्यापार को टकराव का माध्यम बनाने के बजाय दोनों देशों के आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान तलाशना ज्यादा फायदेमंद होगा।
भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए क्या है आगे की रणनीति?
अमेरिकी टैरिफ का जोखिम भारतीय निर्यातकों के लिए चुनौती जरूर है, लेकिन यह उनके लिए बाजारों में विविधता लाने का अवसर भी बन सकता है।
कंपनियां तीन स्तरों पर अपनी रणनीति मजबूत कर सकती हैं। पहला, अमेरिका के अलावा नए देशों में ग्राहक आधार बढ़ाना। दूसरा, उत्पादों की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमत बनाए रखना। तीसरा, यूरोप, पश्चिम एशिया, लैटिन अमेरिका और एशिया के उभरते बाजारों में स्थानीय कारोबारी साझेदारों के साथ नेटवर्क मजबूत करना।
अगर भारत इन बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में सफल रहता है, तो अमेरिकी टैरिफ का संभावित असर काफी हद तक कम किया जा सकता है।
भारत के लिए चुनौती से ज्यादा अवसर?
अमेरिका की 100% टैरिफ की धमकी निश्चित रूप से भारतीय निर्यातकों के लिए गंभीर चुनौती है। खासकर उन कंपनियों पर इसका असर पड़ सकता है जिनका कारोबार अमेरिकी बाजार पर ज्यादा निर्भर है।
लेकिन दूसरी तरफ, 15 देशों में करीब 200 अरब डॉलर यानी लगभग 19 लाख करोड़ रुपये के संभावित बाजार का अवसर भारत के लिए महत्वपूर्ण है। यदि भारतीय कंपनियां इन बाजारों में तेजी से विस्तार करती हैं तो एक्सपोर्ट सेक्टर को लंबे समय में फायदा हो सकता है।
इसलिए मौजूदा स्थिति को सिर्फ अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के रूप में देखने के बजाय भारत के लिए वैश्विक निर्यात बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के अवसर के तौर पर भी देखा जा सकता है।


