IPO Market FY26: भारतीय IPO बाजार ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक बार फिर अपनी मजबूती साबित की है। कंपनियों ने 360 से अधिक IPO के जरिए करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये की पूंजी जुटाई। हालांकि, जहां फंडरेजिंग का आंकड़ा मजबूत रहा, वहीं IPO के ओवरसब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग डे गेन में बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसका संकेत साफ है कि अब निवेशक सिर्फ IPO की चमक देखकर पैसा लगाने के बजाय कंपनी की वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन, गवर्नेंस और भविष्य की ग्रोथ को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
भारतीय कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 यानी FY26 पब्लिक मार्केट से पूंजी जुटाने के लिहाज से काफी मजबूत रहा। ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 360 से अधिक IPO आए और इनके जरिए करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए। वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और करेंसी मार्केट में अस्थिरता के बावजूद भारतीय IPO बाजार की गतिविधियां मजबूत बनी रहीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान निवेशकों के व्यवहार में भी बदलाव देखने को मिला। बाजार में अब ऐसी कंपनियों को ज्यादा प्राथमिकता मिल रही है जिनकी कारोबारी बुनियाद मजबूत है, कॉरपोरेट गवर्नेंस बेहतर है, कमाई में स्पष्ट वृद्धि की संभावना है और जिनका वैल्यूएशन निवेशकों को उचित लगता है।
मेनबोर्ड IPO ने बनाया नया रिकॉर्ड
FY26 में मेनबोर्ड IPO सेगमेंट सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। इस वित्त वर्ष में कुल 109 मेनबोर्ड IPO आए और इनके जरिए करीब 1.77 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए।
अगर पिछले वित्त वर्ष से तुलना करें तो FY25 में 80 मेनबोर्ड IPO के जरिए करीब 1.63 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए थे। यानी FY26 में IPO की संख्या के साथ-साथ कुल फंडरेजिंग में भी बढ़ोतरी हुई।
यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक बाजारों में कई तरह की चुनौतियों के बावजूद भारतीय कंपनियां सार्वजनिक बाजार से बड़ी मात्रा में पूंजी जुटाने में सफल रहीं। कंपनियों के लिए IPO सिर्फ पैसा जुटाने का माध्यम नहीं रहा, बल्कि इससे उन्हें बाजार में अपनी पहचान बनाने और भविष्य के विस्तार के लिए वित्तीय आधार मजबूत करने का मौका भी मिला।
IPO फंडरेजिंग में OFS का दबदबा
मेनबोर्ड IPO के जरिए जुटाई गई राशि में Offer for Sale यानी OFS की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही। रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 में मेनबोर्ड IPO से जुटाई गई कुल राशि में OFS की हिस्सेदारी करीब 61 प्रतिशत रही।
वहीं, नए शेयर जारी करके कंपनी में नई पूंजी लाने यानी Fresh Issue की हिस्सेदारी करीब 39 प्रतिशत रही।
OFS और Fresh Issue के बीच अंतर निवेशकों के लिए समझना काफी जरूरी है। Fresh Issue में कंपनी नए शेयर जारी करती है और उससे मिलने वाली रकम आम तौर पर कंपनी के कारोबार के विस्तार, कर्ज कम करने, कैपिटल एक्सपेंडिचर या अन्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।
इसके विपरीत OFS में मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचते हैं। इससे IPO के जरिए जुटाई गई रकम सीधे कंपनी के पास नहीं जाती, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों या प्रमोटरों को मिलती है।
इसलिए किसी IPO का विश्लेषण करते समय निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी है कि इश्यू में Fresh Issue और OFS का अनुपात क्या है और कंपनी Fresh Issue से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल किस तरह करने वाली है।
SME IPO मार्केट में भी जोरदार तेजी
FY26 में सिर्फ मेनबोर्ड IPO ही मजबूत नहीं रहे, बल्कि SME IPO सेगमेंट ने भी शानदार प्रदर्शन किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में 258 SME IPO आए और इनके जरिए करीब 12,030 करोड़ रुपये जुटाए गए। यह पिछले तीन वर्षों में SME IPO के जरिए जुटाई गई सबसे ज्यादा रकम है।
FY25 में 242 SME IPO के जरिए करीब 9,900 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। इस तरह एक साल में SME IPO की संख्या और इनके जरिए जुटाई गई पूंजी दोनों में बढ़ोतरी देखने को मिली।
SME कंपनियों के लिए IPO बाजार तक पहुंच बनाने का एक अहम माध्यम बनता जा रहा है। इससे छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों को कारोबार के विस्तार के लिए पूंजी जुटाने के साथ-साथ सार्वजनिक बाजार में अपनी पहचान बनाने का मौका मिलता है।
हालांकि, SME IPO में निवेश करने वाले निवेशकों को कंपनी के कारोबार, लिक्विडिटी, वैल्यूएशन और वित्तीय प्रदर्शन की अतिरिक्त सावधानी से जांच करनी चाहिए, क्योंकि छोटे आकार की कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।
IPO ओवरसब्सक्रिप्शन में बड़ी गिरावट
IPO बाजार में फंडरेजिंग का रिकॉर्ड भले ही मजबूत रहा हो, लेकिन निवेशकों की बोली के आंकड़ों में एक महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई दिया।
FY26 में IPO का औसत ओवरसब्सक्रिप्शन घटकर 39 गुना रह गया। इसके मुकाबले FY25 में औसत ओवरसब्सक्रिप्शन करीब 71 गुना था।
यानी एक साल के भीतर IPO के लिए निवेशकों की मांग में काफी बदलाव आया। इसका अर्थ यह नहीं है कि निवेशकों की IPO में रुचि खत्म हो गई है। बल्कि इसका संकेत यह है कि निवेशक अब हर IPO में आंख बंद करके पैसा लगाने के बजाय ज्यादा चयनात्मक हो रहे हैं।
बाजार में IPO की संख्या बढ़ने के साथ निवेशकों के सामने विकल्प भी बढ़े हैं। ऐसे में कंपनियों के लिए केवल IPO लॉन्च करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें निवेशकों को यह भरोसा दिलाना पड़ता है कि कंपनी का कारोबार लंबे समय में टिकाऊ ग्रोथ दे सकता है।
Listing Gain भी हुआ कम
IPO बाजार में निवेशकों के बदलते रुख का असर लिस्टिंग डे परफॉर्मेंस में भी दिखाई दिया।
FY26 में IPO के लिस्टिंग डे पर औसत गेन घटकर सिर्फ 7 प्रतिशत रह गया। FY25 में यही औसत लिस्टिंग गेन करीब 29 प्रतिशत था।
इस आंकड़े से पता चलता है कि IPO में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए केवल लिस्टिंग गेन कमाने की रणनीति पहले की तुलना में कम प्रभावी हो सकती है।
पहले कई IPO में निवेशकों को लिस्टिंग के दिन ही बड़ा प्रीमियम मिल जाता था। लेकिन अब बाजार में कंपनियों की संख्या बढ़ने और वैल्यूएशन को लेकर निवेशकों की सतर्कता बढ़ने के कारण हर IPO से लिस्टिंग के दिन बड़ा रिटर्न मिलने की संभावना कम हुई है।
इसका सीधा मतलब यह है कि IPO निवेशकों को अब कंपनी के कारोबार और वैल्यूएशन पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
निवेशक अब सिर्फ मुनाफा नहीं, कंपनी की गुणवत्ता भी देख रहे
ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशकों का फोकस अब केवल कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। वे कंपनी के कॉरपोरेट गवर्नेंस, डिस्क्लोजर की गुणवत्ता, पूंजी के इस्तेमाल और लिस्टेड कंपनी के तौर पर संचालन की क्षमता को भी महत्व दे रहे हैं।
यही वजह है कि मजबूत बिजनेस मॉडल और बेहतर गवर्नेंस वाली कंपनियों को बाजार में ज्यादा भरोसा मिल सकता है।
IPO में निवेश से पहले कंपनी की बिक्री और मुनाफे की ग्रोथ, कर्ज का स्तर, कैश फ्लो, प्रमोटर होल्डिंग, IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल, OFS की हिस्सेदारी और इश्यू का वैल्यूएशन जैसे पहलुओं की जांच करना महत्वपूर्ण है।
IPO के बाद कंपनी का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण
किसी कंपनी के लिए IPO की सफलता सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि उसका इश्यू कितनी बार सब्सक्राइब हुआ या शेयर कितने प्रीमियम पर लिस्ट हुआ।
असल परीक्षा IPO के बाद शुरू होती है।
लिस्टिंग के बाद कंपनी को अपने शेयरधारकों के प्रति पारदर्शिता बनाए रखनी होती है, नियमित रूप से बेहतर वित्तीय प्रदर्शन दिखाना होता है और जुटाई गई पूंजी का प्रभावी इस्तेमाल करना होता है।
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और CFO एडवाइजरी लीडर करण मारवाह के मुताबिक, आज के IPO बाजार में सफलता सिर्फ लिस्ट होने से तय नहीं होती। कंपनी को पब्लिक कंपनी के रूप में काम करने के लिए तैयार होना और निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए बेहतर संचालन, अनुशासन और विश्वसनीयता दिखाना जरूरी है।
घरेलू निवेशकों ने संभाला IPO बाजार
भारतीय पूंजी बाजार की मजबूती के पीछे घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भी एक महत्वपूर्ण कारण रही है। देश में लगातार बढ़ता निवेशक आधार कंपनियों को IPO के लिए बड़ा घरेलू बाजार उपलब्ध करा रहा है।
बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों के साथ-साथ रिटेल निवेशकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, वैश्विक घटनाक्रमों, कमोडिटी की कीमतों, ब्याज दरों और रुपये की चाल में होने वाले बदलाव का निवेशकों के फैसलों पर असर बढ़ा है।
इसका मतलब है कि भारतीय IPO बाजार घरेलू स्तर पर मजबूत जरूर है, लेकिन पूरी तरह वैश्विक बाजारों से अलग नहीं है।
आगे भी मजबूत रह सकता है IPO बाजार
आने वाले समय में भारत के IPO बाजार के मजबूत बने रहने की उम्मीद जताई गई है। इसके पीछे घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी, भारतीय अर्थव्यवस्था की संरचनात्मक ग्रोथ और लगातार बढ़ता निवेशक आधार प्रमुख कारण हो सकते हैं।
हालांकि, IPO बाजार में कंपनियों की सफलता अब सिर्फ बाजार की तेजी पर निर्भर नहीं करेगी। जिन कंपनियों की बुनियाद मजबूत, वैल्यूएशन उचित, गवर्नेंस बेहतर और बिजनेस मॉडल टिकाऊ होगा, उनके लिए निवेशकों का भरोसा हासिल करना आसान हो सकता है।
वहीं निवेशकों के लिए भी FY26 के आंकड़े एक महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। IPO की संख्या और कुल फंडरेजिंग बढ़ने के बावजूद ओवरसब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग गेन में गिरावट यह बताती है कि बाजार अब ज्यादा परिपक्व और चयनात्मक हो रहा है।
इसलिए किसी भी नए IPO में निवेश से पहले सिर्फ GMP, सोशल मीडिया चर्चा या संभावित लिस्टिंग गेन के आधार पर फैसला लेने के बजाय कंपनी के वित्तीय आंकड़ों, वैल्यूएशन, प्रमोटर रिकॉर्ड, IPO के उद्देश्य और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं का स्वतंत्र रूप से विश्लेषण करना जरूरी है।
Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य सूचना और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। शेयर बाजार और IPO में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी IPO या शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों और वित्तीय आंकड़ों का अध्ययन करें तथा जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी शेयर, IPO या अन्य निवेश में पैसा लगाने की सलाह नहीं देता।


