Nifty Manipulation Investigation: 3 और 4 अगस्त को शेयर बाजार में क्लोजिंग के आसपास निफ्टी में आई तेज चाल ने बाजार नियामक SEBI का ध्यान खींचा है। रिपोर्ट के मुताबिक, Securities and Exchange Board of India (SEBI) इन दोनों दिनों के Closing Auction Session (CAS) के दौरान हुए ट्रेड्स और ऑर्डर्स की जांच कर रहा है। नियामक यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि आखिरी समय में निफ्टी में आई तेज हलचल सामान्य बाजार गतिविधि का हिस्सा थी या इसके पीछे क्लोजिंग प्राइस को प्रभावित करने की कोई कोशिश की गई थी।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि किसी ट्रेड या कुछ मिनटों की तेज चाल को अपने आप में मार्केट मैनिपुलेशन का सबूत नहीं माना जा सकता। किसी कार्रवाई से पहले नियामक को ट्रेडिंग पैटर्न, ऑर्डर की प्रकृति, संबंधित पक्षों की पोजिशन और संभावित मंशा जैसे कई पहलुओं की जांच करनी होगी।
3 और 4 अगस्त के ट्रेड्स पर क्यों नजर?
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, SEBI ने 3 और 4 अगस्त को Closing Auction Session के दौरान हुई गतिविधियों से संबंधित ट्रेडिंग डेटा स्टॉक एक्सचेंजों से मांगा था। एक्सचेंजों की ओर से डेटा उपलब्ध कराए जाने के बाद अब नियामक उसकी जांच कर रहा है।
SEBI का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इन दोनों कारोबारी दिनों में क्लोजिंग के आसपास निफ्टी में जो तेज बदलाव दिखाई दिया, उसके पीछे सामान्य खरीद-बिक्री थी या किसी खास रणनीति के तहत क्लोजिंग प्राइस को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
यह जांच इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इंडेक्स की क्लोजिंग वैल्यू का इस्तेमाल कई तरह के वित्तीय उत्पादों, डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स और निवेश रणनीतियों में होता है। ऐसे में क्लोजिंग के समय अचानक आने वाली बड़ी चाल बाजार प्रतिभागियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
3 अगस्त को क्या हुआ था?
उपलब्ध ट्रेडिंग डेटा के अनुसार, 3 अगस्त को Closing Auction Session से पहले निफ्टी में काफी तेज हलचल देखने को मिली।
बताया गया है कि 3 अगस्त को करीब 3:28 बजे निफ्टी लगभग 24,573 के स्तर पर था। इसके बाद महज दो मिनट में इंडेक्स करीब 201 अंक चढ़कर 24,774 के आसपास पहुंच गया।
इतने कम समय में इंडेक्स में आया यह बड़ा बदलाव बाजार के लिए असामान्य नजर आया। इसी वजह से अब SEBI यह समझने की कोशिश कर रहा है कि इस तेजी के पीछे कौन से ट्रेड्स और ऑर्डर्स थे और क्या उनका क्लोजिंग प्राइस पर कोई असामान्य प्रभाव पड़ा।
हालांकि, किसी इंडेक्स में अचानक तेजी आने का मतलब यह नहीं है कि उसमें हेरफेर हुआ है। बाजार में बड़े ऑर्डर, इंडेक्स के प्रमुख शेयरों में खरीदारी, डेरिवेटिव पोजिशन और अन्य तकनीकी कारणों से भी कम समय में तेज उतार-चढ़ाव संभव है।
4 अगस्त को भी दिखी तेज चाल
अगले दिन यानी 4 अगस्त को भी निफ्टी में क्लोजिंग से पहले तेज मूवमेंट देखने को मिली।
जानकारी के मुताबिक, 4 अगस्त को करीब 3 बजे निफ्टी 24,463 के आसपास कारोबार कर रहा था। इसके बाद करीब 3:15 बजे तक इंडेक्स लगभग 152 अंक बढ़कर 24,615 के आसपास पहुंच गया।
लगातार दो कारोबारी दिनों में क्लोजिंग के आसपास दिखाई देने वाली ऐसी तेज गतिविधि ने बाजार में सवाल खड़े किए। यही वजह है कि SEBI दोनों दिनों के ऑर्डर और ट्रेडिंग डेटा की बारीकी से जांच कर रहा है।
SEBI किन चीजों की जांच कर रहा है?
SEBI की जांच का उद्देश्य केवल यह पता लगाना नहीं है कि निफ्टी कितने अंक ऊपर या नीचे गया। नियामक को यह देखना होगा कि उस दौरान बाजार में किस तरह के ऑर्डर लगाए गए और उनका उद्देश्य क्या था।
जांच में कई पहलुओं पर गौर किया जा सकता है, जैसे:
- Closing Auction Session से ठीक पहले कौन से बड़े ऑर्डर लगाए गए।
- किन शेयरों में अचानक खरीदारी या बिक्री बढ़ी।
- क्या कुछ चुनिंदा शेयरों की गतिविधि का निफ्टी पर असामान्य प्रभाव पड़ा।
- संबंधित ट्रेडर्स के पास पहले से कोई बड़ी डेरिवेटिव पोजिशन थी या नहीं।
- क्या CAS के दौरान किसी खास स्तर पर क्लोजिंग प्राइस लाने की कोशिश की गई।
- क्या अलग-अलग ट्रेडिंग अकाउंट्स या पक्षों के बीच कोई असामान्य पैटर्न दिखाई देता है।
- ट्रेडिंग गतिविधि का एक्सपायरी या अन्य डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स से कोई संबंध था या नहीं।
इन सभी पहलुओं को देखने के बाद ही यह तय किया जा सकता है कि गतिविधि सामान्य थी या नियामकीय जांच की जरूरत वाला कोई पैटर्न मौजूद था।
Closing Auction Session क्या होता है?
Closing Auction Session यानी CAS शेयर बाजार में क्लोजिंग प्राइस तय करने की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
भारतीय शेयर बाजार में सामान्य ट्रेडिंग के बाद क्लोजिंग ऑक्शन की प्रक्रिया होती है। इस दौरान खरीद और बिक्री के ऑर्डर्स को एकत्र किया जाता है और ऐसा संतुलित मूल्य तय करने की कोशिश की जाती है, जिस पर अधिकतम संख्या में ऑर्डर्स का मिलान हो सके।
आसान भाषा में समझें तो Closing Auction Session का उद्देश्य दिन के अंत में ऐसा क्लोजिंग प्राइस तय करना है जो बाजार में उपलब्ध खरीद और बिक्री के ऑर्डर्स को बेहतर तरीके से प्रतिबिंबित करे।
यह प्रक्रिया खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दिन का आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस कई निवेशकों और वित्तीय संस्थानों के लिए संदर्भ मूल्य का काम करता है।
Closing Price इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
किसी शेयर या इंडेक्स का क्लोजिंग प्राइस केवल दिन का आखिरी भाव नहीं होता। इसका इस्तेमाल कई जगहों पर किया जाता है।
उदाहरण के तौर पर, क्लोजिंग वैल्यू का असर निवेश पोर्टफोलियो के वैल्यूएशन, इंडेक्स फंड्स, डेरिवेटिव्स और कई अन्य वित्तीय गणनाओं पर पड़ सकता है।
इसी कारण बाजार नियामक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि क्लोजिंग प्राइस किसी कृत्रिम गतिविधि के कारण प्रभावित न हो।
यदि कोई व्यक्ति या समूह जानबूझकर बड़े ऑर्डर्स के जरिए किसी शेयर या इंडेक्स के क्लोजिंग स्तर को प्रभावित करने की कोशिश करता है और उससे उसे आर्थिक फायदा मिलता है, तो ऐसी गतिविधि नियामकीय जांच के दायरे में आ सकती है।
क्या सिर्फ तेज तेजी से हेरफेर साबित हो जाता है?
नहीं।
यह इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। किसी शेयर या इंडेक्स में कुछ मिनटों के भीतर बड़ी तेजी या गिरावट आना अपने आप में बाजार हेरफेर का प्रमाण नहीं है।
SEBI को अगर किसी तरह की कार्रवाई करनी है तो उसे ट्रेडिंग पैटर्न के साथ-साथ मंशा और संभावित लाभ जैसे पहलुओं को भी देखना होगा।
मसलन, अगर किसी ट्रेडर ने पहले से बड़ी डेरिवेटिव पोजिशन ले रखी हो और उसके बाद जानबूझकर कुछ शेयरों में ऐसे ऑर्डर लगाए हों जिनसे इंडेक्स का क्लोजिंग स्तर प्रभावित हो, तो यह जांच का महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है।
इसके उलट यदि तेजी किसी वास्तविक बाजार गतिविधि, बड़े संस्थागत ऑर्डर, ग्लोबल संकेतों या अन्य सामान्य कारणों से आई हो, तो केवल कीमत में बदलाव के आधार पर हेरफेर का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
एक्सपायरी के आसपास क्यों बढ़ सकती है संवेदनशीलता?
इंडेक्स डेरिवेटिव्स की वजह से क्लोजिंग स्तर कई बाजार प्रतिभागियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। खासकर जब किसी कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी करीब हो, तब कुछ खास स्ट्राइक या इंडेक्स लेवल पर बाजार की गतिविधि बढ़ सकती है।
ऐसे समय में बड़े ट्रेडर्स और संस्थागत निवेशकों की पोजिशन का असर बाजार की चाल पर दिखाई दे सकता है। इसलिए नियामक के लिए यह देखना जरूरी होता है कि कोई गतिविधि सामान्य हेजिंग या ट्रेडिंग का हिस्सा है या जानबूझकर कीमत को किसी खास स्तर पर ले जाने की कोशिश।
SEBI की निगरानी का व्यापक उद्देश्य
SEBI की यह निगरानी केवल 3 और 4 अगस्त की गतिविधियों तक सीमित नहीं मानी जानी चाहिए। बाजार में क्लोजिंग प्राइस की विश्वसनीयता बनाए रखना नियामक के लिए व्यापक निवेशक-सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है।
रेगुलेटर यह सुनिश्चित करना चाहता है कि छोटे और रिटेल निवेशकों को ऐसी गतिविधियों से नुकसान न हो, जिनमें कुछ बड़े बाजार प्रतिभागी अपने हित में कीमतों को प्रभावित करने की कोशिश करें।
इसी संदर्भ में ब्रोकरों और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स को भी निवेशकों के लिए Indicative Price जैसी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने और बाजार की प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल यह मामला जांच के स्तर पर है। जब तक SEBI की जांच पूरी नहीं होती, तब तक यह कहना सही नहीं होगा कि 3 और 4 अगस्त की निफ्टी की तेज चाल के पीछे बाजार हेरफेर था।
SEBI ट्रेडिंग डेटा, ऑर्डर पैटर्न और संबंधित बाजार गतिविधियों का विश्लेषण करने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगा। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या जानबूझकर क्लोजिंग प्राइस प्रभावित करने के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो नियामक आगे की कार्रवाई कर सकता है।
दूसरी ओर, यदि जांच में यह सामने आता है कि तेज चाल सामान्य बाजार गतिविधियों और उपलब्ध ऑर्डर्स के कारण हुई थी, तो मामले में किसी तरह की मैनिपुलेशन कार्रवाई जरूरी नहीं होगी।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
रिटेल निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि सिर्फ कुछ मिनटों की तेज तेजी या गिरावट देखकर किसी शेयर या इंडेक्स में हेरफेर का निष्कर्ष न निकालें।
निफ्टी में अचानक मूवमेंट के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इसलिए निवेशकों को आधिकारिक एक्सचेंज डेटा, SEBI के बयान और कंपनी या एक्सचेंज से जुड़ी जानकारी को प्राथमिकता देनी चाहिए।
SEBI की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 3 और 4 अगस्त की गतिविधियों में वास्तव में कोई अनियमितता थी या यह सामान्य बाजार उतार-चढ़ाव का हिस्सा था।
Disclaimer: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर, इंडेक्स या वित्तीय उत्पाद में निवेश करने से पहले अपनी रिसर्च करें और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। यह लेख केवल सूचना और शैक्षिक उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। NewsJagran.in किसी भी निवेश या ट्रेडिंग की सलाह नहीं देता।


