Gautam Adani Net Worth: शेयरों में आई तेजी से बढ़ी दौलत, एशिया के अरबपतियों की सूची में फिर नंबर-1 पर पहुंचे अदाणी
नई दिल्ली: भारत के दिग्गज उद्योगपति और अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने एक बार फिर एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का स्थान हासिल कर लिया है। हाल के सप्ताहों में अदाणी समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में आई तेज बढ़त और अमेरिका में चल रहे कानूनी विवादों के समाप्त होने से उनकी व्यक्तिगत संपत्ति में बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ते हुए एशिया के सबसे धनी कारोबारी का ताज फिर से अपने नाम कर लिया है।
फोर्ब्स की रियल-टाइम बिलियनेयर्स सूची के अनुसार गौतम अदाणी की कुल संपत्ति बढ़कर करीब 90 अरब डॉलर पहुंच गई है, जबकि मुकेश अंबानी की नेटवर्थ लगभग 88.8 अरब डॉलर आंकी गई है। इस तरह अदाणी फिलहाल करीब 1.2 अरब डॉलर की बढ़त के साथ एशिया में पहले स्थान पर हैं।
कैसे बढ़ी गौतम अदाणी की संपत्ति?
पिछले कुछ वर्षों में अदाणी समूह को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। खासकर 2023 में हिंडनबर्ग रिपोर्ट आने के बाद समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि इसके बाद समूह ने धीरे-धीरे निवेशकों का भरोसा वापस हासिल किया।
अब हालात पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी एजेंसियों की जांच से जुड़े विवाद कम होने और बाजार में सकारात्मक धारणा बनने के बाद अदाणी समूह की कई कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। इसका सीधा असर गौतम अदाणी की संपत्ति पर पड़ा है क्योंकि उनकी अधिकांश संपत्ति समूह की कंपनियों में हिस्सेदारी से जुड़ी हुई है।
फोर्ब्स के आंकड़ों के अनुसार बीते तीन सप्ताह में ही उनकी कुल संपत्ति में लगभग 10 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है। हाल ही में एक कारोबारी सत्र में उनकी नेटवर्थ करीब 2.5 अरब डॉलर तक बढ़ गई थी।
US SEC केस बंद होने से क्यों मिला फायदा?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों के विश्वास में लौटती मजबूती की सबसे बड़ी वजह अमेरिका में चल रहे कानूनी मामलों पर स्पष्टता आना है। अमेरिकी नियामकीय जांच और आरोपों को लेकर लंबे समय तक बनी अनिश्चितता निवेशकों के लिए चिंता का विषय थी।
जब जांच से जुड़े मामलों में राहत के संकेत मिले तो वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। इसका असर सीधे अदाणी समूह की कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया। निवेशकों की खरीदारी बढ़ी और कई कंपनियों के शेयरों ने मजबूत प्रदर्शन किया।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बड़े कारोबारी समूह के लिए कानूनी अनिश्चितता खत्म होना बाजार मूल्यांकन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। अदाणी समूह के मामले में भी यही देखने को मिला।
अदाणी और अंबानी के बीच कितने का अंतर?
फोर्ब्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार:
- गौतम अदाणी की नेटवर्थ: 90 अरब डॉलर
- मुकेश अंबानी की नेटवर्थ: 88.8 अरब डॉलर
इस हिसाब से गौतम अदाणी करीब 1.2 अरब डॉलर की बढ़त के साथ एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं। भारतीय रुपये में यह अंतर लगभग 10,000 करोड़ रुपये से अधिक बैठता है।
हालांकि फोर्ब्स की रियल-टाइम सूची शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के साथ लगातार बदलती रहती है। इसलिए आने वाले दिनों में दोनों उद्योगपतियों की रैंकिंग में बदलाव भी संभव है।
दुनिया के सबसे अमीर लोगों में कहां हैं गौतम अदाणी?
फोर्ब्स रियल टाइम बिलियनेयर इंडेक्स के मुताबिक गौतम अदाणी वर्तमान में दुनिया के शीर्ष 25 अरबपतियों में शामिल हैं। वह वैश्विक सूची में 22वें स्थान पर हैं जबकि मुकेश अंबानी 24वें स्थान पर मौजूद हैं।
भारत के दोनों उद्योगपति दुनिया के सबसे प्रभावशाली कारोबारी नेताओं में गिने जाते हैं। एक ओर अदाणी समूह बंदरगाह, ऊर्जा, हवाई अड्डों और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रहा है, वहीं रिलायंस इंडस्ट्रीज टेलीकॉम, रिटेल, डिजिटल सेवाओं और ऊर्जा कारोबार में मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है।
एशिया के टॉप 10 सबसे अमीर लोग
फोर्ब्स के अनुसार एशिया के शीर्ष अरबपतियों की सूची में भारत, चीन, जापान और हांगकांग के कारोबारी शामिल हैं।
- गौतम अदाणी – 90 अरब डॉलर (भारत)
- मुकेश अंबानी – 88.8 अरब डॉलर (भारत)
- मासायोशी सोन – 86.8 अरब डॉलर (जापान)
- झांग यिमिंग – 69.3 अरब डॉलर (चीन)
- झोंग शानशान – 69.3 अरब डॉलर (चीन)
- रॉबिन जेंग – 63.1 अरब डॉलर (हांगकांग)
- तदाशी यानाई एवं परिवार – 66.8 अरब डॉलर (जापान)
- ली का-शिंग – 48.3 अरब डॉलर (हांगकांग)
- मा हुआतेंग – 48 अरब डॉलर (चीन)
- सावित्री जिंदल एवं परिवार – 38.6 अरब डॉलर (भारत)
भारत की कॉर्पोरेट दुनिया में क्या संकेत?
गौतम अदाणी का फिर से एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति बनना केवल व्यक्तिगत संपत्ति का मामला नहीं है। यह भारतीय कॉर्पोरेट क्षेत्र की बढ़ती वैश्विक ताकत का भी संकेत माना जा रहा है। दुनिया के शीर्ष 25 अरबपतियों में दो भारतीय उद्योगपतियों की मौजूदगी यह दिखाती है कि भारत की कंपनियां वैश्विक स्तर पर तेजी से प्रभाव बढ़ा रही हैं।
ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल सेवाएं और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश के कारण आने वाले वर्षों में भारत के कॉर्पोरेट समूहों की वैश्विक हिस्सेदारी और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
नोट: फोर्ब्स की रियल-टाइम बिलियनेयर्स सूची शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के साथ लगातार बदलती रहती है। इसलिए नेटवर्थ और रैंकिंग समय-समय पर बदल सकती है।


