नई दिल्ली: देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन के शुभारंभ के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाने के अगले ही दिन हाइड्रोजन ट्रेन खराब हो गई और उसे डीजल इंजन से खींचकर ले जाना पड़ा। हालांकि, भारतीय रेलवे ने इस दावे को पूरी तरह से भ्रामक और तथ्यहीन बताया है।
क्या है वायरल दावा?
🔥 हाइड्रोजन ट्रेन के उद्घाटन के अगले ही दिन पुराने डीजल इंजन से घसीटते हुए सफर 😂💀🤡
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⬩➤ दूसरे दिन?
⬩➤ हाइड्रोजन ट्रेन का इंजन खराब और भयंकर तकनीकी फेलियर… https://t.co/4PaEYKDUVM pic.twitter.com/99CCPY8TM6
— Aryan_R9 (@Aryan_R9) July 19, 2026 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रहे वीडियो में एक डीजल इंजन के साथ हाइड्रोजन ट्रेन दिखाई दे रही है। इसे शेयर करते हुए कई यूजर्स दावा कर रहे हैं कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन लॉन्चिंग के अगले ही दिन खराब हो गई और इसलिए उसे डीजल इंजन की मदद से ले जाया जा रहा है।
यह दावा तेजी से वायरल होने के बाद लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
रेलवे ने क्या कहा?
उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल (DLI Division NR) के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल @drm_dli ने वायरल वीडियो पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि यह दावा पूरी तरह गलत है।
रेलवे के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन का नियमित संचालन केवल जींद और सोनीपत के बीच किया जा रहा है। ट्रेन के मेंटेनेंस, निरीक्षण और डिपो तक आने-जाने के दौरान सुरक्षा और संचालन संबंधी मानकों के तहत एक लोकोमोटिव (डीजल इंजन) का उपयोग किया जाता है। यह रेलवे की सामान्य और तय प्रक्रिया (Standard Operating Procedure) का हिस्सा है।
रेलवे ने स्पष्ट किया कि इसका ट्रेन के खराब होने से कोई संबंध नहीं है।
वायरल पोस्ट को बताया पूरी तरह भ्रामक
भारतीय रेलवे ने सोशल मीडिया पर वायरल दावे को तथ्यात्मक रूप से निराधार और भ्रामक करार दिया है। रेलवे ने लोगों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि किए ऐसी भ्रामक पोस्ट पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।
17 जुलाई को हुई थी ऐतिहासिक शुरुआत
17 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह भारत के स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह ट्रेन फिलहाल जींद से सोनीपत के बीच लगभग 89 किलोमीटर लंबे रूट पर संचालित की जा रही है।
सिर्फ 5 रुपये से शुरू है किराया
इस हाइड्रोजन ट्रेन की एक और खास बात इसका किफायती किराया है। यात्रियों के लिए किराया 5 रुपये से 25 रुपये के बीच रखा गया है, ताकि आम लोग भी इस आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक का अनुभव कर सकें।
हाइड्रोजन ट्रेन क्यों है खास?
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलने वाली यह ट्रेन पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल मानी जाती है। इसमें डीजल की बजाय हाइड्रोजन से बिजली पैदा होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन लगभग शून्य रहता है। यही वजह है कि इसे भारतीय रेलवे के ग्रीन ट्रांसपोर्ट मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
निष्कर्ष (Fact Check Verdict)
सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन लॉन्चिंग के अगले ही दिन खराब हो गई, पूरी तरह गलत और भ्रामक है। भारतीय रेलवे ने स्पष्ट किया है कि वीडियो में दिखाई दे रहा डीजल इंजन केवल मेंटेनेंस और मूवमेंट प्रक्रिया का हिस्सा है। ट्रेन में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी नहीं आई है।


