NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आईपीओ का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है। सेबी ने 4 सितंबर 2026 को एनएसई को ऑब्जर्वेशन लेटर जारी कर दिया है। इसके साथ ही करीब एक दशक से अटके एक्सचेंज के आईपीओ की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। बाजार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सितंबर के अंत तक NSE के शेयर बाजार में लिस्ट हो सकते हैं।
भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE के आईपीओ का निवेशकों को लंबे समय से इंतजार है। अब इस इंतजार के खत्म होने की उम्मीद बढ़ गई है। मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने 4 सितंबर को NSE को ऑब्जर्वेशन लेटर जारी कर दिया। इसे आईपीओ की दिशा में एक महत्वपूर्ण नियामकीय मंजूरी माना जा रहा है।
एनएसई ने इस साल जून में आईपीओ के लिए अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) सेबी के पास दाखिल किया था। अब ऑब्जर्वेशन लेटर मिलने के बाद कंपनी आगे की प्रक्रिया पूरी करके इश्यू को बाजार में उतार सकती है।
जून में NSE ने दाखिल किया था DRHP
एनएसई ने 17 जून 2026 को सेबी के पास आईपीओ से संबंधित DRHP दाखिल किया था। खास बात यह है कि एक्सचेंज इससे पहले भी करीब एक दशक पहले शेयर बाजार में लिस्ट होने की कोशिश कर चुका है।
हालांकि, उस समय सामने आए रेगुलेटरी और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े मामलों के कारण आईपीओ की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी। अब कई वर्षों बाद एनएसई ने दोबारा आईपीओ की तैयारी शुरू की है और सेबी का ऑब्जर्वेशन लेटर मिलने के बाद यह प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है।
11 सितंबर को हो सकता है प्राइस बैंड का ऐलान
बाजार सूत्रों के मुताबिक, एनएसई का आईपीओ इसी महीने के अंत तक लॉन्च किया जा सकता है। फिलहाल कंपनी की ओर से इश्यू की अंतिम तारीखों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सूत्रों के अनुसार, 8 सितंबर को रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल किया जा सकता है। इसके बाद 11 सितंबर को आईपीओ का प्राइस बैंड घोषित होने की संभावना है। इसके करीब एक सप्ताह बाद इश्यू निवेशकों के लिए खुल सकता है।
अगर प्रस्तावित टाइमलाइन में कोई बदलाव नहीं होता है तो एनएसई के शेयरों की 25 सितंबर के आसपास लिस्टिंग हो सकती है। हालांकि, इन तारीखों को फिलहाल संभावित माना जाना चाहिए, क्योंकि अंतिम शेड्यूल आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।
NSE IPO में नए शेयर जारी नहीं होंगे
एनएसई का यह आईपीओ एक अहम वजह से दूसरे आईपीओ से अलग है। इसमें कंपनी की ओर से कोई नए शेयर जारी नहीं किए जाएंगे। यानी यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में आएगा।
OFS में मौजूदा शेयरधारक अपने शेयरों का एक हिस्सा बाजार में बेचते हैं। इससे मिलने वाली रकम कंपनी के पास नहीं जाती, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिलती है।
इसका सीधा मतलब है कि NSE को इस आईपीओ से सीधे तौर पर कोई नया फंड नहीं मिलेगा। आईपीओ का उद्देश्य मुख्य रूप से मौजूदा शेयरधारकों को अपनी हिस्सेदारी बेचने का अवसर देना और कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराना है।
14.89 करोड़ शेयरों की होगी बिक्री
प्रस्तावित आईपीओ में करीब 14.89 करोड़ शेयर बिक्री के लिए पेश किए जाएंगे। यह संख्या एनएसई के पेड-अप कैपिटल का लगभग 6 फीसदी बताई जा रही है।
क्योंकि इश्यू OFS होगा, इसलिए NSE की बैलेंस शीट में आईपीओ से कोई नई पूंजी नहीं आएगी। हालांकि, लिस्टिंग के बाद कंपनी के शेयरों के लिए एक सार्वजनिक बाजार उपलब्ध होगा और मौजूदा शेयरधारकों को अपनी हिस्सेदारी में आंशिक रूप से बदलाव करने का अवसर मिलेगा।
करीब ₹30,000 करोड़ का हो सकता है NSE IPO
एनएसई की संभावित वैल्यूएशन को देखते हुए यह आईपीओ करीब 30,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इश्यू का अंतिम आकार और प्राइस बैंड घोषित नहीं किया है।
इसलिए आईपीओ की वास्तविक वैल्यू और कुल इश्यू साइज की तस्वीर प्राइस बैंड तथा अंतिम ऑफर डॉक्यूमेंट सामने आने के बाद ही साफ होगी।
टूट सकता है Hyundai Motor India के IPO का रिकॉर्ड
अगर NSE का आईपीओ करीब 30,000 करोड़ रुपये के आकार के साथ आता है तो यह भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है।
इस समय सबसे बड़े भारतीय आईपीओ का रिकॉर्ड Hyundai Motor India के नाम है। कंपनी ने 2024 में करीब ₹27,870 करोड़ का आईपीओ पेश किया था।
ऐसे में यदि NSE का इश्यू 27,870 करोड़ रुपये से ऊपर रहता है तो यह Hyundai Motor India का रिकॉर्ड तोड़ देगा। हालांकि, NSE के आईपीओ का अंतिम आकार अभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है।
SBI Group सबसे ज्यादा शेयर बेच सकता है
एनएसई के प्रस्तावित आईपीओ में कई मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। इनमें SBI Group सबसे बड़े शेयर बेचने वालों में शामिल है और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसी ग्रुप की ओर से सबसे ज्यादा शेयर ऑफर किए जाने हैं।
आईपीओ में अन्य मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी भी शामिल हो सकती है। OFS की वजह से आईपीओ के जरिए मिलने वाली रकम शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी।
NSE और BSE के बीच मुकाबला
भारतीय शेयर बाजार में NSE का प्रमुख मुकाबला BSE से है। दोनों एक्सचेंज देश के इक्विटी और डेरिवेटिव मार्केट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
NSE की खास ताकत कैश मार्केट और खासकर डेरिवेटिव सेगमेंट में उसकी मजबूत बाजार हिस्सेदारी है। वहीं BSE भी अपनी पुरानी विरासत और बढ़ते ट्रेडिंग कारोबार के कारण निवेशकों के बीच महत्वपूर्ण एक्सचेंज बना हुआ है।
4 सितंबर के कारोबार में BSE के शेयर में करीब 3.17 फीसदी की गिरावट आई और यह लगभग ₹3,411 के स्तर पर बंद हुआ। हालांकि, साल 2026 में अब तक BSE के शेयर में करीब 30 फीसदी की तेजी देखने को मिली है।
निवेशकों की नजर अब प्राइस बैंड और इश्यू डेट पर
सेबी से ऑब्जर्वेशन लेटर मिलने के बाद अब निवेशकों की नजर NSE के अगले कदम पर है। सबसे महत्वपूर्ण जानकारी में RHP दाखिल करने की तारीख, प्राइस बैंड, आईपीओ खुलने और बंद होने की तारीख तथा शेयरों की लिस्टिंग डेट शामिल हैं।
अगर बाजार सूत्रों की बताई संभावित टाइमलाइन सही रहती है, तो सितंबर में भारत के कैपिटल मार्केट को एक बेहद बड़ा आईपीओ देखने को मिल सकता है। NSE की लिस्टिंग से न केवल मौजूदा शेयरधारकों के लिए वैल्यू अनलॉक हो सकती है, बल्कि निवेशकों को देश के सबसे बड़े एक्सचेंज में सीधे निवेश का मौका भी मिलेगा।
डिस्क्लेमर: यह खबर बाजार सूत्रों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। NSE IPO की प्राइस बैंड, इश्यू डेट, इश्यू साइज और लिस्टिंग से जुड़ी अंतिम जानकारी कंपनी और सेबी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही सुनिश्चित होगी। निवेश से पहले आधिकारिक दस्तावेजों और अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।


