FSSAI Action on Food Safety: देश में खाद्य सुरक्षा को लेकर नियम लगातार सख्त किए जा रहे हैं। प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड के बाद अब फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की नजर एनालॉग पनीर, स्कूलों के आसपास बिकने वाले जंक फूड और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध खाद्य उत्पादों पर है। प्राधिकरण देशभर में एनालॉग पनीर की बिक्री पर रोक लगाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
फिलहाल देश के 8 राज्यों में एनालॉग पनीर की बिक्री को प्रतिबंधित करने के लिए कदम उठाए जा चुके हैं। अब इसी तरह की कार्रवाई को पूरे देश में लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा स्कूलों के आसपास हाई फैट, हाई शुगर और हाई सॉल्ट यानी HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री पर भी अंकुश लगाने के लिए नियम तैयार किए जा रहे हैं।
8 राज्यों में एनालॉग पनीर पर कार्रवाई
FSSAI के CEO राजित पुनहानी के मुताबिक, देश के आठ राज्यों ने एनालॉग पनीर के खिलाफ कदम उठाए हैं। इनमें महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड शामिल हैं।
अब FSSAI का लक्ष्य इस तरह की कार्रवाई को देशभर में विस्तार देना है। इसके पीछे खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता प्रमुख वजह है।
एनालॉग पनीर को लेकर खाद्य नियामक की सख्ती ऐसे समय में बढ़ी है, जब बाजार में पनीर के नाम पर अलग-अलग तरह के उत्पादों की बिक्री को लेकर सवाल उठते रहे हैं। FSSAI देश में खाद्य मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के साथ मिलकर कार्रवाई कर रहा है।
स्कूलों के 50 मीटर दायरे में जंक फूड पर रोक की तैयारी
FSSAI की अगली बड़ी पहल बच्चों के खान-पान से जुड़ी है। स्कूलों के आसपास मिलने वाले ऐसे खाद्य पदार्थों को लेकर सख्ती की तैयारी है, जिनमें फैट, नमक और चीनी की मात्रा अधिक होती है।
प्रस्तावित नियमों के तहत स्कूल परिसर से 50 मीटर के दायरे में HFSS यानी High Fat, High Sugar और High Salt फूड की बिक्री पर रोक लगाने की योजना है।
इसका उद्देश्य बच्चों को कम पौष्टिक खाद्य पदार्थों से दूर रखना और स्कूलों के आसपास ऐसा फूड एनवायरनमेंट तैयार करना है, जहां उन्हें अपेक्षाकृत बेहतर और पौष्टिक विकल्प मिल सकें।
यह पहल FSSAI के Eat Right Campaign से भी जुड़ी हुई है। खाद्य नियामक लंबे समय से लोगों, खासकर बच्चों और युवाओं के बीच स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देने पर जोर देता रहा है।
कुछ जगहों पर पहले से लागू हैं ऐसे नियम
स्कूलों के आसपास जंक फूड को लेकर कुछ क्षेत्रों में पहले ही कदम उठाए जा चुके हैं। महाराष्ट्र और दिल्ली में स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री और उससे जुड़े विज्ञापनों पर रोक लगाने के उपाय किए गए हैं।
अब इसी तरह के नियमों को व्यापक स्तर पर लागू करने की तैयारी की जा रही है।
ऑनलाइन फूड प्लेटफॉर्म्स पर भी FSSAI की नजर
खाद्य सुरक्षा को लेकर FSSAI की निगरानी सिर्फ दुकानों और बाजारों तक सीमित नहीं है। अब ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बिकने वाले खाद्य उत्पाद भी नियामक के फोकस में हैं।
ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान ग्राहकों को किसी पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट की जानकारी हमेशा स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती। ऐसे में ग्राहक के लिए यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि वह उत्पाद कितना पुराना है और उसकी वैधता कितने समय तक है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, FSSAI कंपनियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इन जानकारियों को अधिक स्पष्ट और प्रमुख तरीके से प्रदर्शित करने के लिए नियमों को सख्त करने की दिशा में काम कर रहा है।
क्विक-कॉमर्स कंपनियों को दिखानी होगी जरूरी जानकारी
आज के समय में Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोग कुछ ही मिनटों में पैकेज्ड फूड और दूसरे किराना उत्पाद मंगा लेते हैं। ऐसे में ऑनलाइन दिखाई जाने वाली प्रोडक्ट जानकारी उपभोक्ता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
FSSAI चाहता है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर खाद्य उत्पादों की लिस्टिंग के दौरान जरूरी जानकारी उपभोक्ताओं को आसानी से दिखाई दे। इसमें खास तौर पर मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और उत्पाद से जुड़ी अन्य अनिवार्य जानकारी शामिल हो सकती है।
इसका उद्देश्य ऑनलाइन खरीदारों को उत्पाद के बारे में पर्याप्त जानकारी देना और खाद्य सुरक्षा मानकों को मजबूत करना है।
क्यों महत्वपूर्ण है FSSAI का यह कदम?
FSSAI की प्रस्तावित सख्ती का सीधा असर खाद्य कारोबारियों, रिटेल दुकानों, स्कूलों के आसपास के विक्रेताओं और ऑनलाइन फूड प्लेटफॉर्म्स पर पड़ सकता है।
एक तरफ एनालॉग पनीर जैसे उत्पादों को लेकर गुणवत्ता मानकों पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बच्चों को ज्यादा नमक, चीनी और फैट वाले खाद्य पदार्थों से दूर रखने की कोशिश की जा रही है। ऑनलाइन बाजार में भी ग्राहकों को उत्पाद की महत्वपूर्ण जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने पर जोर बढ़ रहा है।
अगर प्रस्तावित नियम व्यापक रूप से लागू होते हैं, तो आने वाले समय में ग्राहकों को ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों जगह खाद्य उत्पाद खरीदते समय ज्यादा पारदर्शिता देखने को मिल सकती है।


