बिहार के अररिया जिले में राजस्व विभाग में अनियमितताओं और कार्य में लापरवाही को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी विनोद दूहन के निर्देश पर तीन राजस्व कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक अंचलाधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
यह कार्रवाई जिले में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
जिलाधिकारी के आदेश पर हुई सख्त कार्रवाई
अररिया जिले में यह कार्रवाई जिलाधिकारी Vinod Duhan के आदेश पर की गई। उन्होंने राजस्व कार्यों में लगातार मिल रही शिकायतों और लंबित मामलों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए थे।
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन ने तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया और संबंधित अंचलाधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी।
किन कर्मचारियों पर गिरी गाज?
निलंबित किए गए कर्मचारियों में फारबिसगंज अंचल के विकास कुमार मंडल और राजेश कुमार शशि तथा नरपतगंज अंचल की रेणु कुमारी शामिल हैं।
इन सभी पर बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन और कार्य में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। यह कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के तहत की गई है।
प्रशासन का कहना है कि इन कर्मचारियों की वजह से राजस्व कार्यों में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो रही थीं।
लंबित मामलों ने बढ़ाई प्रशासनिक समस्या
जांच के दौरान यह सामने आया कि विकास कुमार मंडल के लॉगिन में परिमार्जन प्लस और दाखिल-खारिज से जुड़े सैकड़ों मामले लंबित पड़े थे।
इसी तरह राजेश कुमार शशि के पास भी बड़ी संख्या में फाइलें पेंडिंग पाई गईं, जिनका समय पर निपटारा नहीं किया गया था। इससे आम जनता के राजस्व संबंधित काम प्रभावित हो रहे थे और प्रक्रिया में भारी देरी हो रही थी।
प्रशासन का मानना है कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने वाला गंभीर मामला है।
सबसे गंभीर मामला: वीडियो में अवैध वसूली का आरोप
सबसे गंभीर मामला नरपतगंज अंचल की कर्मचारी रेणु कुमारी से जुड़ा सामने आया है। जांच के दौरान एक वीडियो सामने आया जिसमें कथित तौर पर अवैध राशि की मांग की जा रही थी।
इसके अलावा उन पर बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के जमाबंदी सृजित करने जैसी गंभीर अनियमितताओं के भी आरोप लगे हैं।
इस मामले ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख दिया है क्योंकि इसमें भ्रष्टाचार और शक्ति के दुरुपयोग दोनों के संकेत मिले हैं।
अंचलाधिकारी पर भी शुरू हुई विभागीय कार्रवाई
इस पूरे प्रकरण में केवल कर्मचारी ही नहीं बल्कि संबंधित अंचलाधिकारी पर भी कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने उनके खिलाफ प्रपत्र ‘क’ के तहत विभागीय जांच शुरू करने का आदेश दिया है।
यह संकेत देता है कि जिला प्रशासन अब केवल निचले स्तर पर नहीं बल्कि उच्च अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय करने के मूड में है।
प्रशासन का सख्त संदेश
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में भी यदि इसी तरह के मामले सामने आते हैं तो और कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
जनता पर असर और व्यवस्था सुधार की उम्मीद
राजस्व विभाग से जुड़े मामलों में देरी और भ्रष्टाचार का सीधा असर आम जनता पर पड़ता है, खासकर जमीन से जुड़े दस्तावेजों और दाखिल-खारिज प्रक्रियाओं में।
इस कार्रवाई के बाद उम्मीद की जा रही है कि लंबित मामलों का निपटारा तेज होगा और सिस्टम में सुधार आएगा।
निष्कर्ष
अररिया जिले में हुई यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ सख्त रुख अपना रहा है।
Vinod Duhan के निर्देश पर की गई यह कार्रवाई न केवल तीन कर्मचारियों के निलंबन तक सीमित है, बल्कि पूरे विभाग के लिए एक चेतावनी भी है कि कार्य में ढिलाई और अनियमितता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह कदम भविष्य में राजस्व व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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