अगले सप्ताह बाजार में बढ़ सकती है हलचल, भू-राजनीतिक तनाव से लेकर महंगाई के आंकड़े तक कई बड़े ट्रिगर रहेंगे अहम
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। बीते सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन अगले सप्ताह कई ऐसे घरेलू और वैश्विक कारक सामने आने वाले हैं जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। निवेशकों की नजर विशेष रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों के प्रदर्शन और भारत के खुदरा महंगाई आंकड़ों पर रहेगी।
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। हालांकि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की चाल को प्रभावित करेंगी।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ता तनाव वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इजरायल और लेबनान के बीच जारी संघर्ष तथा ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ती बयानबाजी ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है।
जब भी किसी बड़े भू-राजनीतिक संकट की आशंका बढ़ती है तो निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसका असर शेयर बाजारों पर देखने को मिलता है।
भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह स्थिति और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि पश्चिम एशिया में किसी भी तरह की अस्थिरता सीधे तौर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
यदि अगले सप्ताह संघर्ष से जुड़ी कोई बड़ी खबर सामने आती है तो भारतीय बाजार में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
कच्चे तेल की कीमतें बन सकती हैं सबसे बड़ा ट्रिगर
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल की कीमतें हमेशा एक महत्वपूर्ण कारक रही हैं। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड करीब 93 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में वृद्धि से आयात बिल बढ़ता है, चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और महंगाई पर भी दबाव बनता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ब्रेंट क्रूड लगातार 95 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना रहता है तो इसका असर भारतीय कंपनियों की लागत और उपभोक्ताओं पर दिखाई दे सकता है।
तेल कीमतों में तेजी का असर सबसे अधिक एविएशन, पेंट, केमिकल, लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्र की कंपनियों पर पड़ता है। वहीं तेल एवं गैस कंपनियों के शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती देखने को मिल सकती है।
अमेरिकी एआई शेयरों की चाल पर भी रहेगी नजर
पिछले डेढ़ वर्ष में वैश्विक शेयर बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI सबसे बड़ा निवेश थीम बनकर उभरा है। लेकिन पिछले सप्ताह अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली।
विशेष रूप से टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक में करीब 5 प्रतिशत तक कमजोरी दर्ज की गई। इस दौरान AI से जुड़े प्रमुख शेयरों जैसे Nvidia, Micron Technology और Marvell Technology में भी भारी गिरावट देखने को मिली।
इन कंपनियों के शेयरों में कमजोरी का असर वैश्विक टेक निवेश भावना पर पड़ सकता है। भारतीय आईटी और टेक्नोलॉजी शेयरों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिकी बाजारों में टेक्नोलॉजी शेयरों की बिकवाली जारी रहती है तो भारतीय आईटी सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि मजबूत ऑर्डर बुक और डिजिटल सेवाओं की मांग भारतीय कंपनियों को कुछ हद तक सहारा दे सकती है।
12 जून को आएंगे महंगाई के आंकड़े
आने वाले सप्ताह का सबसे महत्वपूर्ण घरेलू आर्थिक डेटा खुदरा महंगाई यानी CPI Inflation रहेगा। सरकार 12 जून को मई महीने के महंगाई आंकड़े जारी करेगी।
महंगाई के आंकड़े सीधे तौर पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की भविष्य की मौद्रिक नीति से जुड़े होते हैं। यदि महंगाई अपेक्षा से अधिक रहती है तो ब्याज दरों में कटौती की संभावना कमजोर पड़ सकती है।
दूसरी ओर यदि महंगाई नियंत्रण में रहती है तो बाजार इसे सकारात्मक संकेत के रूप में देख सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य कीमतों और ईंधन लागत में बदलाव आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा तय करेंगे। इसलिए निवेशक और विश्लेषक दोनों ही इस डेटा का इंतजार कर रहे हैं।
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी रहेंगी महत्वपूर्ण
पिछले कुछ महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक जोखिम भावना के आधार पर विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में खरीदारी या बिकवाली का फैसला करते हैं।
यदि वैश्विक जोखिम बढ़ता है तो विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से धन निकाल सकते हैं। वहीं स्थिर परिस्थितियों में भारतीय बाजार फिर से विदेशी निवेश आकर्षित कर सकता है।
कैसा रहा बीता सप्ताह?
पिछला सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रहा। बीएसई सेंसेक्स 532.40 अंक यानी 0.71 प्रतिशत गिरकर 74,243.34 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 सूचकांक 181.05 अंक यानी 0.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,366.70 पर बंद हुआ।
हालांकि सेक्टोरल स्तर पर तस्वीर मिश्रित रही।
निफ्टी मीडिया सूचकांक में 6.69 प्रतिशत की सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.49 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 1.26 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।
दूसरी तरफ एफएमसीजी, कमोडिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल्टी, मेटल, पीएसई और एनर्जी सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली।
निवेशकों को अगले सप्ताह क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों को अत्यधिक आक्रामक रुख अपनाने से बचना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, इसलिए गुणवत्ता वाले शेयरों पर फोकस बनाए रखना बेहतर रणनीति हो सकती है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए गिरावट के दौरान चरणबद्ध निवेश का अवसर बन सकता है। वहीं अल्पकालिक ट्रेडर्स को वैश्विक समाचारों, तेल कीमतों और महंगाई आंकड़ों पर विशेष नजर रखनी चाहिए।
कुल मिलाकर आने वाला सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए कई बड़े संकेत लेकर आएगा। पश्चिम एशिया का तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी टेक शेयरों का प्रदर्शन और घरेलू महंगाई डेटा मिलकर बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने और खबरों पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत होगी।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।)
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