भारत में अंतर्देशीय जल परिवहन (Inland Water Transport) को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। जल्द ही वाराणसी और पटना में आधुनिक शिप रिपेयरिंग फैसिलिटी (Ship Repair Facility) शुरू होने जा रही है। इसके लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) ने देश की दिग्गज इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) की सहायक कंपनी एलएंडटी जियो स्ट्रक्चर को बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दिया है।
इस परियोजना को राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (National Waterway-1) यानी गंगा नदी पर जल परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वी भारत में जलमार्ग आधारित लॉजिस्टिक्स और व्यापार को नई रफ्तार मिल सकती है।
गंगा जलमार्ग पर बढ़ेगी जहाजों की आवाजाही
अभी तक गंगा नदी पर मालवाहक और यात्री जहाजों की आवाजाही सीमित स्तर पर होती है। इसकी एक बड़ी वजह जहाजों की मरम्मत और तकनीकी सहायता के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर का अभाव रहा है।
वाराणसी और पटना में आधुनिक शिप रिपेयर फैसिलिटी बनने के बाद जहाजों की सर्विसिंग, मरम्मत और रखरखाव स्थानीय स्तर पर संभव हो सकेगा। इससे जहाज ऑपरेटरों की लागत और समय दोनों में कमी आएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी जलमार्ग पर रिपेयर और मेंटेनेंस की मजबूत व्यवस्था होती है, तभी वहां नियमित और बड़े पैमाने पर व्यावसायिक संचालन संभव हो पाता है। यही वजह है कि इस प्रोजेक्ट को गंगा जलमार्ग के लिए “गेम चेंजर” माना जा रहा है।
IWAI ने L&T की कंपनी को दिया कॉन्ट्रैक्ट
लार्सन एंड टुब्रो की सहायक कंपनी एलएंडटी जियो स्ट्रक्चर ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसे भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) से वाराणसी और पटना में शिप रिपेयर फैसिलिटी विकसित करने का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी इन दोनों शहरों में इंजीनियरिंग, खरीद (Procurement) और निर्माण (Construction) का काम करेगी।
यह परियोजना केवल सामान्य मरम्मत केंद्र नहीं होगी, बल्कि इसमें अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी के मुताबिक, इन फैसिलिटी में उन्नत Ship Lift और Transfer Systems लगाए जाएंगे, जिससे बड़े अंतर्देशीय जहाजों को आसानी से उठाकर उनकी मरम्मत की जा सकेगी।
800 टन Boat Hoist होगा सबसे बड़ा आकर्षण
इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात 800-टन क्षमता वाला Boat Hoist सिस्टम है। यह आधुनिक मशीन बड़े जलयानों को पानी से बाहर निकालकर मरम्मत के लिए प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने का काम करेगी। इसके जरिए जहाजों की तकनीकी जांच, इंजन रिपेयर, संरचनात्मक मरम्मत और पेंटिंग जैसे काम तेजी से किए जा सकेंगे।
भारत में अंतर्देशीय जलमार्ग क्षेत्र अभी विकास के शुरुआती चरण में है। ऐसे में इस स्तर की आधुनिक रिपेयरिंग सुविधा आने से गंगा नदी पर ऑपरेट करने वाली कंपनियों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
National Waterway-1 के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
National Waterway-1 भारत का सबसे महत्वपूर्ण अंतर्देशीय जलमार्ग माना जाता है। यह प्रयागराज (इलाहाबाद) से हल्दिया तक लगभग 1,390 किलोमीटर लंबा जलमार्ग है, जो गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली पर आधारित है।
सरकार पिछले कुछ वर्षों से इस जलमार्ग को विकसित करने पर बड़ा निवेश कर रही है। इसका उद्देश्य सड़क और रेल पर दबाव कम करना तथा सस्ते और पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देना है। जलमार्ग के जरिए माल ढुलाई की लागत सड़क परिवहन की तुलना में काफी कम मानी जाती है। इसके अलावा इससे कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है। वाराणसी और पटना में शिप रिपेयरिंग फैसिलिटी बनने के बाद मालवाहक जहाजों की संख्या बढ़ सकती है, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होगा, पूर्वी भारत में औद्योगिक गतिविधियों को समर्थन मिलेगा, निर्यात और कृषि व्यापार को फायदा हो सकता है
यूपी और बिहार की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बड़ा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल जल परिवहन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर डाल सकती है।
वाराणसी और पटना दोनों शहर गंगा नदी के किनारे बड़े व्यापारिक केंद्र हैं। शिप रिपेयर फैसिलिटी बनने से स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेंगे, तकनीकी और इंजीनियरिंग सेवाओं की मांग बढ़ेगी, छोटे उद्योगों और सप्लाई चेन को फायदा मिलेगा, बंदरगाह आधारित आर्थिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं. इसके अलावा, भविष्य में इन शहरों को मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।
भारत क्यों बढ़ा रहा है जलमार्गों पर फोकस?
केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से अंतर्देशीय जल परिवहन को प्राथमिकता दे रही है। इसकी एक बड़ी वजह लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना है। भारत में कुल माल परिवहन का बड़ा हिस्सा अभी सड़क मार्ग से होता है, जिससे लागत और ईंधन खपत दोनों बढ़ती हैं। इसके मुकाबले जलमार्ग परिवहन अधिक सस्ता और टिकाऊ माना जाता है।
सरकार का लक्ष्य है कि:
- गंगा समेत प्रमुख नदियों पर कार्गो मूवमेंट बढ़ाया जाए
- मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तैयार किया जाए
- बंदरगाहों और नदी परिवहन को जोड़ा जाए
- निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाई जाए
L&T को मिला यह कॉन्ट्रैक्ट इसी बड़े विजन का हिस्सा माना जा रहा है।
शेयर बाजार में कैसा रहा L&T का प्रदर्शन?
बीएसई पर मंगलवार को लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का शेयर 4,033.35 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। हालांकि, इस साल अब तक कंपनी के शेयरों में करीब 2.50% की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, पिछले एक साल की बात करें तो कंपनी ने निवेशकों को 10% से ज्यादा का रिटर्न दिया है। इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, ऊर्जा और भारी इंजीनियरिंग सेक्टर में मजबूत ऑर्डर बुक की वजह से बाजार में कंपनी को लेकर सकारात्मक नजरिया बना हुआ है।
विश्लेषकों का मानना है कि भारत में बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश का फायदा आने वाले वर्षों में L&T जैसी कंपनियों को मिल सकता है।
गंगा जलमार्ग की बदल सकती है तस्वीर
वाराणसी और पटना में आधुनिक शिप रिपेयर फैसिलिटी की शुरुआत को केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे भारत के अंतर्देशीय जल परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।
अगर गंगा नदी पर जहाजों की आवाजाही बढ़ती है और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होता है, तो इससे उत्तर भारत के व्यापारिक और औद्योगिक विकास को नई गति मिल सकती है। आने वाले वर्षों में National Waterway-1 भारत के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक कॉरिडोर में शामिल हो सकता है।
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार से जुड़ी जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से दी गई है। निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।)
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