असम के तिनसुकिया जिले के लेदो इलाके में उस समय हड़कंप मच गया जब जमीन खोदते समय द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के दो जिंदा बम मिले। समय रहते Indian Army की कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, लेदो (Burma Camp, Lekhapani) क्षेत्र में एक नागरिक द्वारा गड्ढा खोदते समय:
- एक General Purpose Bomb (WWII era)
- एक Incendiary Bomb
मिले, जो पूरी तरह सक्रिय स्थिति में थे और आसपास के लोगों के लिए बड़ा खतरा बन सकते थे।
Indian Army की त्वरित कार्रवाई
31 मार्च 2026 को Indian Army की Red Shield Division ने तुरंत कदम उठाए:
- Bomb Disposal Team को मौके पर भेजा गया
- आसपास के लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर हटाया गया
- पूरे क्षेत्र को घेरकर सुरक्षा घेरा बनाया गया
- सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया गया
कैसे किया गया बम निष्क्रिय?
विशेषज्ञ टीम ने बेहद सावधानी के साथ:
- बमों को सुरक्षित तरीके से कब्जे में लिया
- उन्हें आबादी से दूर एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया
- Controlled operation के जरिए उन्हें निष्क्रिय किया गया
इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का नुकसान या हादसा नहीं हुआ।
क्यों था यह इतना खतरनाक?
- WWII के बम कई बार दशकों बाद भी सक्रिय रहते हैं
- मामूली छेड़छाड़ से भी बड़ा विस्फोट हो सकता है
- आसपास के इलाके में जान-माल का भारी नुकसान हो सकता था
स्थानीय लोगों के लिए राहत
Indian Army की त्वरित और पेशेवर कार्रवाई से:
- संभावित बड़ा हादसा टल गया
- लोगों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा
- पूरे ऑपरेशन में किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ
क्यों अहम है यह घटना?
- पुराने युद्धकालीन हथियार आज भी खतरा बन सकते हैं
- समय पर प्रतिक्रिया से बड़ी आपदा टाली जा सकती है
- सेना की preparedness और professionalism का उदाहरण
निष्कर्ष
असम के लेदो में WWII के बम मिलने की घटना गंभीर थी, लेकिन Indian Army की तेज और सटीक कार्रवाई ने संभावित बड़े खतरे को टाल दिया।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि सेना नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए हर समय तैयार रहती है।
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