असम विधानसभा चुनाव 2026 इस बार सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए भी दिलचस्प बन गया है। चुनाव से ठीक एक दिन पहले, 8 अप्रैल से कई देशों के प्रतिनिधि असम पहुंचने वाले हैं। यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं है—बल्कि भारत की चुनावी व्यवस्था को करीब से समझने की एक कोशिश है।
कौन-कौन आ रहा है असम?
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस बार जो विदेशी डेलीगेशन आ रहा है, उसमें कई देशों के चुनाव प्रबंधन संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इनमें शामिल हैं:
- अंगोला
- भूटान
- मिस्र
- पुर्तगाल
- श्रीलंका
- मैक्सिको
- बेनिन
- क्रोएशिया
यह सभी प्रतिनिधि भारत के चुनावी सिस्टम को जमीनी स्तर पर देखने और समझने के लिए आ रहे हैं।
क्यों हो रहा है यह दौरा?
यह पूरा कार्यक्रम International Election Visitors’ Programme (IEVP) के तहत आयोजित किया जा रहा है। इसका मकसद सिर्फ विजिट कराना नहीं, बल्कि एक बड़ा संदेश देना है—
भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में अपनी चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मजबूती दिखाना चाहता है।
8 अप्रैल: तैयारी को करीब से देखेंगे मेहमान
पहले दिन यानी 8 अप्रैल को विदेशी प्रतिनिधियों का फोकस रहेगा—तैयारियों पर।
इस दिन वे:
- मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) से ब्रीफिंग लेंगे
- डिस्पैच सेंटर और कंट्रोल रूम का दौरा करेंगे
- यह समझेंगे कि चुनाव से पहले किस तरह की तैयारी होती है
यानी वोटिंग शुरू होने से पहले की पूरी मशीनरी कैसे काम करती है, यह उन्हें दिखाया जाएगा।
9 अप्रैल: ग्राउंड रियलिटी का अनुभव
असल अनुभव उन्हें 9 अप्रैल को मिलेगा, जब असम की 126 सीटों पर मतदान होगा।
इस दिन प्रतिनिधि:
- अलग-अलग जिलों के पोलिंग स्टेशन जाएंगे
- वोटिंग प्रक्रिया को लाइव देखेंगे
- सुरक्षा व्यवस्था का आकलन करेंगे
- चुनावी तकनीकों (EVM आदि) को समझेंगे
यह वो दिन होगा जब उन्हें भारत के चुनाव की “रियल तस्वीर” देखने को मिलेगी।
भारत के लिए क्यों है यह अहम?
पहली नजर में यह सिर्फ एक औपचारिक दौरा लग सकता है, लेकिन इसके पीछे बड़ी रणनीति है।
इससे भारत:
- अपनी चुनावी विश्वसनीयता दिखाता है
- अन्य देशों के साथ सहयोग बढ़ाता है
- चुनाव प्रबंधन के अनुभव साझा करता है
और सच कहें तो, यह भारत की “लोकतांत्रिक साख” को मजबूत करने का भी एक तरीका है।
असम चुनाव का पूरा शेड्यूल
- मतदान: 9 अप्रैल 2026
- मतगणना: 4 मई 2026
- कुल सीटें: 126
इस बार चुनाव पहले से ज्यादा अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि राजनीतिक मुकाबला भी कड़ा है और अब अंतरराष्ट्रीय नजरें भी इस पर टिकी हैं।
क्या बदलता है इससे?
आम वोटर के लिए शायद बहुत कुछ सीधे तौर पर नहीं बदलता, लेकिन इसका एक बड़ा असर जरूर होता है—
जब दुनिया आपके चुनाव को देख रही होती है, तो
- पारदर्शिता पर और ज्यादा जोर होता है
- प्रशासन ज्यादा सतर्क रहता है
- प्रक्रिया और भी व्यवस्थित होती है
आखिरी बात
असम के चुनाव हर बार अहम होते हैं, लेकिन इस बार एक नया पहलू जुड़ गया है—ग्लोबल ऑब्जर्वेशन।
विदेशी प्रतिनिधियों का यह दौरा सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि भारत का लोकतंत्र अब सिर्फ देश की सीमा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनिया के लिए एक मॉडल बनता जा रहा है।
अब नजरें 9 अप्रैल पर हैं—जब असम के लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे और लोकतंत्र का असली उत्सव देखने को मिलेगा।
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