नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध जैसे हालात के बीच भारत के लिए राहत की एक बड़ी खबर सामने आई है। अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी यानी ADNOC का एक और एलएनजी (Liquefied Natural Gas) टैंकर सुरक्षित तरीके से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुका है और अब उसकी अगली मंजिल भारत बताई जा रही है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में पिछले कई महीनों से भारी अस्थिरता बनी हुई है। खासतौर पर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल और गैस जहाजों पर जोखिम कई गुना बढ़ गया था। यही कारण है कि फरवरी 2026 के बाद पहली बार इस मार्ग से एलएनजी सप्लाई में फिर से हलचल देखने को मिली है।
ब्लूमबर्ग द्वारा जुटाए गए शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक ADNOC लॉजिस्टिक्स एंड सर्विसेज द्वारा संचालित विशाल LNG टैंकर ‘उम अल अश्तान’ (Umm Al Ashtan) ओमान के मस्कट शहर के उत्तर-पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में दोबारा सक्रिय दिखाई दिया। जहाज पूरी तरह LNG गैस से भरा हुआ है और उसकी डेस्टिनेशन भारत दर्ज की गई है।
ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर पार किया युद्ध क्षेत्र
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे दिलचस्प और महत्वपूर्ण बात यह रही कि जहाज ने सुरक्षा कारणों से अपना ट्रैकिंग सिस्टम यानी ट्रांसपोंडर बंद कर दिया था।
रिपोर्ट के अनुसार यह जहाज मई 2026 की शुरुआत में होर्मुज के पूर्वी हिस्से के पास दिखाई दिया था। उस समय यह खाली था। इसके बाद अचानक इसका ट्रैकिंग सिग्नल बंद हो गया और कई दिनों तक इसकी लोकेशन सार्वजनिक सिस्टम पर दिखाई नहीं दी।
सैटेलाइट तस्वीरों से बाद में पता चला कि जहाज फारस की खाड़ी में स्थित ADNOC के दास आइलैंड एक्सपोर्ट प्लांट पहुंचा, जहां उस पर LNG लोड की गई। सुरक्षा एजेंसियों और शिपिंग कंपनियों का मानना है कि मौजूदा युद्ध जैसे हालात में जहाजों की लोकेशन छिपाना हमलों और ड्रोन निगरानी से बचने की रणनीति बन चुका है।
दरअसल होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे संवेदनशील ऊर्जा कॉरिडोर माना जाता है। वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में किसी भी सैन्य तनाव का सीधा असर पूरी दुनिया की ऊर्जा कीमतों पर पड़ता है।
दुनिया की 20% गैस सप्लाई पर पड़ा था असर
फरवरी 2026 में ईरान में संघर्ष बढ़ने के बाद इस समुद्री मार्ग से LNG की आवाजाही लगभग रुक गई थी। इससे वैश्विक बाजार में गैस की भारी कमी का खतरा पैदा हो गया था।
विशेषज्ञों के मुताबिक दुनिया की करीब 20 प्रतिशत LNG सप्लाई सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर करती है। यही वजह है कि इस रास्ते पर पैदा हुआ तनाव एशिया, यूरोप और भारत तक के ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर रहा है।
भारत भी दुनिया के सबसे बड़े LNG आयातकों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। खासतौर पर बिजली उत्पादन, उर्वरक उद्योग, शहरों में पाइप गैस सप्लाई और औद्योगिक उपयोग के लिए LNG बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह शिपमेंट?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में भारत के लिए लगातार LNG सप्लाई बने रहना बेहद जरूरी है। अगर LNG आयात प्रभावित होता है तो इसका असर कई सेक्टरों पर दिखाई दे सकता है। गैस आधारित बिजली संयंत्रों की लागत बढ़ सकती है। शहरों में PNG और CNG की कीमतों पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा उर्वरक उत्पादन महंगा होने से खेती और खाद्य कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
यही वजह है कि भारत सरकार और ऊर्जा कंपनियां पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
ADNOC अब तक भेज चुका है 4 शिपमेंट
रिपोर्ट्स के अनुसार ADNOC अब तक इसी संवेदनशील समुद्री मार्ग से कुल चार LNG शिपमेंट भारत की ओर भेज चुका है। इनमें से ज्यादातर जहाजों ने सुरक्षा कारणों से अपना ट्रैकिंग सिस्टम बंद रखा। बताया जा रहा है कि हाल ही में भेजा गया एक अन्य LNG टैंकर पश्चिमी भारत के एक बंदरगाह तक पहुंच भी चुका है।
इससे संकेत मिल रहे हैं कि तमाम जोखिमों के बावजूद खाड़ी क्षेत्र से भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह बंद नहीं हुई है। हालांकि जहाजों की आवाजाही अब पहले की तुलना में ज्यादा सतर्क तरीके से हो रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा व्यापार मार्गों में शामिल है। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, इराक और कतर जैसे बड़े तेल एवं गैस उत्पादक देशों की सप्लाई इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचती है।
विशेषज्ञों के अनुसार अगर यह मार्ग लंबे समय तक बाधित होता है तो कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। इसका असर पेट्रोल, डीजल, बिजली और घरेलू गैस तक पर दिखाई देगा।
LNG का इस्तेमाल कहां-कहां होता है?
एलएनजी यानी Liquefied Natural Gas को ऊर्जा का अपेक्षाकृत स्वच्छ विकल्प माना जाता है। भारत में इसका इस्तेमाल कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। गैस आधारित पावर प्लांट बिजली उत्पादन में इसका उपयोग करते हैं। जब सौर और पवन ऊर्जा उपलब्ध नहीं होती तब LNG आधारित प्लांट तेजी से बैकअप पावर देने में मदद करते हैं।
इसके अलावा शहरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG), सीएनजी वाहन, होटल, मॉल, कमर्शियल बिल्डिंग्स और बड़े औद्योगिक संयंत्रों में भी LNG का व्यापक इस्तेमाल होता है।
सरकार आने वाले वर्षों में गैस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना चाहती है। इसी कारण LNG सप्लाई भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत के लिए राहत लेकिन खतरा अभी टला नहीं
हालांकि ADNOC का टैंकर सुरक्षित तरीके से होर्मुज पार कर चुका है, लेकिन पश्चिम एशिया का संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ता है या समुद्री मार्गों पर हमले तेज होते हैं, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में फिर से बड़ा संकट पैदा हो सकता है।
फिलहाल भारत के लिए राहत की बात यह है कि खाड़ी क्षेत्र से LNG सप्लाई धीरे-धीरे दोबारा शुरू होती दिखाई दे रही है। लेकिन आने वाले हफ्तों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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