रूस का बड़ा ऐलान, भारतीय कारोबारी और प्रोफेशनल्स को मिलेगा फायदा
एक तरफ अमेरिका ने ग्रीन कार्ड और वीजा स्टेटस बदलने के नियमों को पहले से ज्यादा सख्त बना दिया है, वहीं दूसरी तरफ रूस ने भारतीय नागरिकों के लिए बड़ा ऐलान कर दिया है। भारत में रूसी दूतावास ने सोमवार को घोषणा की कि अब भारतीय नागरिक एक साल के मल्टीपल-एंट्री बिजनेस वीजा के लिए आवेदन कर सकेंगे।
यह कदम ऐसे समय आया है जब दुनिया भर में इमिग्रेशन और वीजा नियमों को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है। अमेरिका की नई ग्रीन कार्ड नीति के बाद कई विदेशी प्रोफेशनल्स और कारोबारियों के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। ऐसे माहौल में रूस का यह फैसला भारतीय बिजनेस समुदाय, स्टार्टअप फाउंडर्स, एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कंपनियों और टेक प्रोफेशनल्स के लिए एक नए अवसर के तौर पर देखा जा रहा है।
रूसी दूतावास ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि भारत समेत विदेशी नागरिक और ऐसे लोग जिनका कोई देश नहीं है (स्टेटलेस पर्सन्स), वे अब अपने परिवार के सदस्यों के साथ रूस के लिए एक साल के मल्टीपल-एंट्री बिजनेस वीजा के लिए आवेदन कर सकते हैं। रूस ने ऐसे लोगों को “पर्सन्स ऑफ इंटरेस्ट” की श्रेणी में रखा है।
📣 Dear friends,
We are pleased to announce that foreign citizens and stateless persons, who were acknowledged as persons of interest, as well as their family members may apply for a one year multiple-entry business visas to #Russia. pic.twitter.com/IPYLlKHVMO
— Russia in India 🇷🇺 (@RusEmbIndia) May 25, 2026 क्या है मल्टीपल-एंट्री बिजनेस वीजा?
मल्टीपल-एंट्री बिजनेस वीजा का मतलब है कि वीजा धारक एक निश्चित अवधि के भीतर कई बार रूस आ-जा सकता है। यानी हर बार नया वीजा लेने की जरूरत नहीं होगी। रूस के माइग्रेशन कानून के मुताबिक यह वीजा मुख्य रूप से बिजनेस ट्रैवल के लिए बनाया गया है। इसका उद्देश्य लंबे समय तक रूस में बसने की अनुमति देना नहीं है।
वीजा से जुड़े अहम नियम
- यह वीजा 1 साल के लिए वैध हो सकता है।
- वीजा धारक किसी भी 180 दिनों की अवधि में अधिकतम 90 दिन रूस में रह सकता है।
- यह रेजिडेंस परमिट नहीं माना जाएगा।
- बिजनेस मीटिंग, ट्रेड, निवेश और कॉर्पोरेट गतिविधियों के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।
- जरूरत के आधार पर 5 साल तक का मल्टीपल-एंट्री बिजनेस वीजा भी जारी किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत और रूस के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूती मिल सकती है। खासकर ऐसे समय में जब दोनों देश ऊर्जा, रक्षा, फार्मा, टेक्नोलॉजी और पेमेंट सिस्टम जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं।
अमेरिका की सख्ती के बीच रूस का नरम रुख
रूस का यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल ही में अमेरिका ने ग्रीन कार्ड प्रक्रिया से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। पहले अमेरिका में कई लोग टेम्परेरी वीजा पर रहते हुए वहीं से ग्रीन कार्ड स्टेटस में बदलाव के लिए आवेदन कर सकते थे। लेकिन नए नियमों के बाद अब कई मामलों में लोगों को अपने देश लौटकर अमेरिकी दूतावास के जरिए दोबारा आवेदन करना पड़ सकता है।
इमिग्रेशन विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है। ऐसे में रूस का नया बिजनेस वीजा मॉडल अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और कारोबारियों को आकर्षित करने की कोशिश माना जा रहा है।
किन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा?
रूस के इस फैसले से कई भारतीय सेक्टर्स को फायदा मिल सकता है।
1. एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट कंपनियां
भारत और रूस के बीच तेल, उर्वरक, फार्मा और मशीनरी का व्यापार तेजी से बढ़ा है। बिजनेस वीजा आसान होने से कंपनियों की आवाजाही बढ़ेगी।
2. आईटी और टेक प्रोफेशनल्स
रूस टेक्नोलॉजी सेक्टर में विदेशी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। भारतीय आईटी कंपनियों के लिए यह नया अवसर हो सकता है।
3. स्टार्टअप और निवेशक
भारतीय स्टार्टअप्स रूस के बाजार और टेक इकोसिस्टम में अवसर तलाश सकते हैं।
4. एजुकेशन और रिसर्च सेक्टर
हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र रूस गए हैं। बिजनेस और अकादमिक सहयोग दोनों बढ़ सकते हैं।
किन दस्तावेजों की होगी जरूरत?
रूस के बिजनेस वीजा के लिए आवेदन करते समय कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे।
1. लेटर ऑफ इनविटेशन
यह सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। यह निम्न संस्थाओं की ओर से जारी हो सकता है रूसी फेडरल माइग्रेशन सर्विस, रूसी विदेश मंत्रालय (MFA), अधिकृत क्षेत्रीय कार्यालय, आधिकारिक वीजा सपोर्ट रेफरेंस नंबर. इनविटेशन में ये जानकारियां होना जरूरी है जारी करने वाली एजेंसी की मुहर, कानूनी पता, रजिस्ट्रेशन नंबर, यात्रा का उद्देश्य, रुकने की अवधि, आमंत्रित व्यक्ति का नाम कॉपी स्वीकार नहीं की जाएगी। ओरिजिनल दस्तावेज जरूरी होगा।
2. वैध पासपोर्ट
- पासपोर्ट में कम से कम दो खाली पेज होने चाहिए।
- वीजा समाप्ति के बाद कम से कम 6 महीने की वैधता बची होनी चाहिए।
- प्रक्रिया पूरी होने तक पासपोर्ट दूतावास के पास रह सकता है।
3. पूरा भरा हुआ आवेदन फॉर्म
आवेदकों को रूस के आधिकारिक वीजा पोर्टल से आवेदन फॉर्म भरना होगा।
आवेदन से जुड़े जरूरी नियम
- फॉर्म में कोई कॉलम खाली नहीं छोड़ा जा सकता।
- लागू न होने वाले कॉलम में “N/A” लिखना होगा।
- तारीख यूरोपीय फॉर्मेट (दिन-महीना-साल) में भरनी होगी।
- पासपोर्ट साइज फोटो लगाना जरूरी होगा।
- मूल हस्ताक्षर जरूरी होंगे।
अधूरा या बिना हस्ताक्षर वाला फॉर्म वापस किया जा सकता है।
भारत-रूस संबंधों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने एशियाई देशों के साथ व्यापार और रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया है। भारत पहले ही रूस से कच्चे तेल का बड़ा खरीदार बन चुका है।
इसके अलावा दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, न्यूक्लियर एनर्जी, बैंकिंग और पेमेंट सिस्टम, फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक आसान बिजनेस वीजा नियम दोनों देशों के बीच कारोबारी गतिविधियों को और बढ़ा सकते हैं।
क्या रूस अब विदेशी निवेशकों को आकर्षित करना चाहता है?
कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस अब एशियाई बाजारों और गैर-पश्चिमी देशों के निवेशकों को ज्यादा प्राथमिकता दे रहा है। भारत, चीन, यूएई और अफ्रीकी देशों के साथ रूस के आर्थिक रिश्ते तेजी से मजबूत हुए हैं। ऐसे में भारत के लिए वीजा नियम आसान करना उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
निष्कर्ष
अमेरिका जहां इमिग्रेशन नियमों को सख्त बना रहा है, वहीं रूस ने भारतीय नागरिकों के लिए बिजनेस यात्रा को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। एक साल का मल्टीपल-एंट्री बिजनेस वीजा भारत-रूस व्यापारिक रिश्तों को नई गति दे सकता है। हालांकि यह वीजा स्थायी निवास की अनुमति नहीं देता, लेकिन बार-बार बिजनेस ट्रैवल करने वाले भारतीय कारोबारियों, निवेशकों और प्रोफेशनल्स के लिए यह बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
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