पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि नई परिभाषा के तहत केवल 0.19% अरावली में ही खनन संभव है और 90% से अधिक क्षेत्र संरक्षित रहेगा। जानिए पूरा विवाद और सरकार का पक्ष।
🏞️ अरावली विवाद: क्या हुआ है पूरा मामला?
भारत की प्राचीन और महत्वपूर्ण पर्वत श्रृंखला अरावली रेंज (Aravalli Range) को लेकर फिर से विवाद छिड़ गया है। इस बार मामला खनन (mining) और नई परिभाषा (definition) को लेकर है, जिसे हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मंज़ूर किया। इस पर लोगों में चिंता और विरोध भी हुआ है कि इससे अरावली की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
📢 सरकार का बयान: केवल 0.19% में ही खनन

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि नई परिभाषा लागू होने के बाद भी अरावली के कुल क्षेत्र का केवल 0.19% हिस्सा में ही खनन की अनुमति दी जा सकती है — यानी यह एक छोटा ही प्रतिशत है और कुल इलाके का बहुत बड़ा हिस्सा संरक्षित रहेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई नया खनन लाइसेंस जारी नहीं किया गया है, और प्रक्रिया को और भी सख्त (stricter) बनाया गया है ताकि अवैध खनन न हो सके। Pratidin
🌱 90% क्षेत्र संरक्षित
भूपेंद्र यादव ने दोबारा कहा कि कुल अरावली क्षेत्र का लगभग 90% से अधिक हिस्सा पूरी तरह से संरक्षित (protected) रहेगा और वहां किसी प्रकार का खनन नहीं होगा। इससे पर्यावरण संरक्षण की प्रतिबद्धता साफ़ दिखती है।
यह नई परिभाषा अरावली की पहाड़ियों और रेंज को वैज्ञानिक तौर पर परिभाषित करती है — जिसके तहत केवल कुछ छोटे हिस्सों को खनन के लिए योग्य माना गया है। Hindustan Times
🧠 नई परिभाषा (100 मीटर नियम) क्या है?
सरकार ने अरावली हिल्स को परिभाषित किया है ऐसे landforms के रूप में जिनकी ऊँचाई 100 मीटर की स्थानीय ऊँचाई (local relief) से अधिक हो। इस नई परिभाषा को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया है।
इसका मतलब है कि
✔ केवल ऐसे हिस्सों में ही खनन के लिए पात्रता बनती है
✔ 100 मीटर की माप ऊँचाई से नीचे तक के फैलाव को ध्यान में रखकर की जाती है
✔ उच्चतम बिंदु अकेले मायने नहीं रखता
✔ इसमें इलाके का आधार तक शामिल होता है
यह वैज्ञानिक ढंग से संरक्षित क्षेत्रों का निर्धारण करता है। Hindustan Times
🛑 सरकार ने भ्रम फैलने पर चेताया
भूपेंद्र यादव ने यह भी कहा कि कुछ मीडिया और यूट्यूब चैनलों पर गलत जानकारी फैल रही है — जैसे कि 100 मीटर से कम वाले हिस्सों में पूरी तरह से माइनिंग खुल जाएगी — यह भ्रम है। उन्होंने लोगों से सच्चाई जानने और अफ़वाहों से बचने को कहा है। Navbharat Times
⚖️ सुप्रीम कोर्ट और नियम
सुप्रीम कोर्ट ने इस नई परिभाषा और मानदंड को स्वीकार करते हुए कहा है कि
✔ अधिकतर इलाके संरक्षित रहेंगे
✔ नए खनन पट्टे (leases) जारी नहीं किए जाएंगे
✔ केवल निर्धारित और वैज्ञानिक तरीके से कुछ हिस्सों में ही अनुमति होगी
✔ सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ेगी The Economic Times
🧩 विवाद और विरोध
हालांकि सरकार सुरक्षा का भरोसा दे रही है, नागरिक समूहों और पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है कि इस परिभाषा से छोटे-मध्यम पहाड़ियाँ संरक्षण के दायरे से बाहर हो सकती हैं, जिन्हें भी पर्यावरण की सुरक्षा की आवश्यकता है। यह मुद्दा भू-राजनीतिक और पारिस्थितिक (ecological) रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। The Times of India
📌 निष्कर्ष
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने स्पष्ट किया है कि अरावली क्षेत्र में खनन केवल 0.19% जगह पर ही संभव होगा और बाकी 90% से ज्यादा क्षेत्र संरक्षित रहेगा। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का दावा किया कि पर्यावरण की रक्षा और अरावली की हरियाली बने रहने के लिए कठोर नियम बनाए गए हैं और अवैध खनन पर नियंत्रण रखा जाएगा।


