Gold Loan Business: भारत में गोल्ड लोन का कारोबार तेजी से बदल रहा है। कभी मुख्य रूप से दक्षिण भारत की कुछ बड़ी एनबीएफसी कंपनियों तक सीमित माना जाने वाला यह बाजार अब बड़े कारोबारी और वित्तीय समूहों को आकर्षित कर रहा है। टाटा कैपिटल, गोदरेज कैपिटल और आदित्य बिरला कैपिटल जैसे नामों की एंट्री से साफ संकेत मिल रहा है कि गोल्ड लोन अब सिर्फ एक पारंपरिक कर्ज कारोबार नहीं, बल्कि लंबी अवधि का रणनीतिक बिजनेस बन रहा है।
हाल के हफ्तों में इन तीनों समूहों ने गोल्ड लोन को लेकर अलग-अलग रणनीति अपनाई है। टाटा कैपिटल और गोदरेज कैपिटल ने मौजूदा कारोबार को अधिग्रहण के जरिए अपने साथ जोड़ा है, जबकि आदित्य बिरला कैपिटल बड़े ब्रांच नेटवर्क के साथ इस कारोबार को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी में है।
टाटा कैपिटल ने Yogloans में खरीदी बड़ी हिस्सेदारी
टाटा कैपिटल ने केरल की Yogloans में 88.6% हिस्सेदारी खरीदी है। इस डील के जरिए कंपनी को पहले से तैयार गोल्ड लोन प्लेटफॉर्म और मजबूत ग्राहक आधार मिला है।
Yogloans के पास 160 से ज्यादा शाखाएं, करीब 32,000 ग्राहक और 700 करोड़ रुपये से अधिक का लोन पोर्टफोलियो बताया गया है। यानी टाटा कैपिटल को इस सेगमेंट में उतरने के लिए शुरुआत से पूरा नेटवर्क तैयार करने की जरूरत नहीं होगी।
यह रणनीति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गोल्ड लोन कारोबार में केवल पूंजी लगाना पर्याप्त नहीं होता। सोने की वैल्यूएशन, सुरक्षित स्टोरेज, ग्राहक प्रबंधन और नीलामी की प्रक्रिया के लिए स्थानीय स्तर पर मजबूत सिस्टम की जरूरत होती है।
गोदरेज कैपिटल ने भी चुना अधिग्रहण का रास्ता
गोदरेज कैपिटल ने Kanakadurga Finance के गोल्ड लोन कारोबार का अधिग्रहण किया है। इस सौदे के तहत कंपनी को करीब 280 करोड़ रुपये का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो, लगभग 12,000 ग्राहक और 54 शाखाओं का नेटवर्क मिला है।
गोदरेज कैपिटल की महत्वाकांक्षा केवल मौजूदा कारोबार तक सीमित नहीं है। कंपनी ने 2031 तक अपने गोल्ड लोन पोर्टफोलियो को करीब 5,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
इससे संकेत मिलता है कि कंपनी गोल्ड लोन को अपने व्यापक लेंडिंग बिजनेस में एक महत्वपूर्ण ग्रोथ इंजन के रूप में देख रही है।
आदित्य बिरला कैपिटल की अलग रणनीति
आदित्य बिरला कैपिटल ने टाटा और गोदरेज से अलग रास्ता चुना है। कंपनी किसी मौजूदा गोल्ड लोन कंपनी के अधिग्रहण के बजाय अपना नेटवर्क तैयार करने की योजना पर काम कर रही है।
कंपनी देशभर में करीब 1,000 शाखाओं का नेटवर्क बनाकर गोल्ड लोन वर्टिकल खड़ा करने की तैयारी में है।
इतने बड़े ब्रांच नेटवर्क का मतलब है कि कंपनी गोल्ड लोन को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखना चाहती। छोटे शहरों और उन बाजारों में भी पहुंच बनाने की कोशिश होगी, जहां घरों में रखे सोने के बदले औपचारिक कर्ज की मांग बढ़ रही है।
आखिर बड़े कारोबारी ग्रुप गोल्ड लोन पर क्यों लगा रहे दांव?
1. सिक्योर्ड लोन की बढ़ती अहमियत
पर्सनल लोन और दूसरे अनसिक्योर्ड क्रेडिट में जोखिम बढ़ने के साथ वित्तीय कंपनियां सिक्योर्ड लोन की ओर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
गोल्ड लोन में कर्ज के बदले सोना गिरवी रखा जाता है। इससे लेंडर के लिए क्रेडिट रिस्क अपेक्षाकृत कम हो सकता है। ग्राहक के डिफॉल्ट की स्थिति में तय प्रक्रिया के तहत गिरवी रखे सोने की नीलामी से बकाया रकम की वसूली की जा सकती है।
यही वजह है कि बड़े वित्तीय समूहों को गोल्ड लोन एक आकर्षक सिक्योर्ड क्रेडिट सेगमेंट नजर आ रहा है।
2. भारत में सोने का विशाल भंडार
भारतीय परिवारों के पास बड़ी मात्रा में सोना मौजूद है। लेकिन घरेलू स्तर पर रखा गया पूरा सोना औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में इस्तेमाल नहीं होता।
ऐसे में गोल्ड लोन कंपनियों के लिए यह एक बड़ा संभावित बाजार है। मई 2026 तक गोल्ड ज्वैलरी के बदले दिए गए लोन का बाजार करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई है। FY26 में इस सेगमेंट ने करीब 50% की ग्रोथ भी दर्ज की।
बाजार के विस्तार ने बड़े वित्तीय समूहों का ध्यान इस ओर खींचा है।
3. बाजार अब सिर्फ कुछ NBFC तक सीमित नहीं
लंबे समय तक गोल्ड लोन का नाम लेते ही मुथूट फाइनेंस और मणप्पुरम फाइनेंस जैसी कंपनियां सबसे पहले याद आती थीं। खासकर दक्षिण भारत में इन कंपनियों का मजबूत नेटवर्क रहा है।
अब बैंक और विविधीकृत वित्तीय समूह भी इस बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ ग्राहकों को भी ज्यादा विकल्प मिलने की संभावना है।
4. महंगा सोना मतलब ज्यादा लोन की क्षमता
सोने की कीमतों में तेजी का सीधा असर गोल्ड लोन की पात्रता पर पड़ सकता है। समान मात्रा में सोना गिरवी रखने पर ग्राहक को पहले की तुलना में अधिक कर्ज मिल सकता है, हालांकि वास्तविक लोन राशि लेंडर की वैल्यूएशन और लागू नियमों पर निर्भर करती है।
लेकिन बड़े कारोबारी समूहों की रणनीति केवल सोने की मौजूदा ऊंची कीमतों पर आधारित नहीं दिखती। वे ब्रांच नेटवर्क, टेक्नोलॉजी और ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए लंबे समय के लिए बाजार में जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
5. अब सिर्फ छोटे ग्राहक ही नहीं ले रहे गोल्ड लोन
गोल्ड लोन को पहले अक्सर आपातकालीन जरूरत, छोटे कारोबार या ग्रामीण इलाकों में पैसों की तत्काल जरूरत से जोड़कर देखा जाता था।
अब तस्वीर बदल रही है। बड़े टिकट साइज के गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहक भी बढ़ रहे हैं। यहां तक कि 5 लाख रुपये से अधिक के शॉर्ट-टर्म क्रेडिट के लिए भी कुछ ग्राहक गोल्ड लोन को दूसरे विकल्पों के मुकाबले सुविधाजनक मान रहे हैं।
इस बदलाव से इस कारोबार का संभावित ग्राहक आधार और बड़ा हो रहा है।
गोल्ड लोन में सिर्फ पैसा लगाना काफी नहीं
गोल्ड लोन कारोबार देखने में आसान लग सकता है, लेकिन इसके संचालन में कई महत्वपूर्ण चुनौतियां होती हैं। ज्वैलरी की सही वैल्यूएशन, शुद्धता की जांच, सुरक्षित स्टोरेज, बीमा, ग्राहक रिकॉर्ड और डिफॉल्ट की स्थिति में नीलामी—इन सभी प्रक्रियाओं के लिए मजबूत व्यवस्था चाहिए।
यही कारण है कि टाटा कैपिटल और गोदरेज कैपिटल ने मौजूदा प्लेटफॉर्म का अधिग्रहण करके इस बाजार में तेजी से प्रवेश करने का रास्ता चुना है। इससे उन्हें तैयार ब्रांच नेटवर्क, ग्राहक और ऑपरेशनल सिस्टम मिल जाता है।
दूसरी तरफ आदित्य बिरला कैपिटल का 1,000 ब्रांच वाला प्लान बताता है कि कंपनी खुद अपना डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क तैयार करके लंबी अवधि में बड़ा बाजार हासिल करना चाहती है।
RBI के नियम भी अहम
गोल्ड लोन कारोबार में रेगुलेशन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। रिजर्व बैंक समय-समय पर गोल्ड की वैल्यूएशन, लोन-टू-वैल्यू और ग्राहक सुरक्षा से जुड़े नियमों में बदलाव करता रहा है।
नियमों में पारदर्शिता और प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित किए जाने से संगठित वित्तीय कंपनियों के लिए बाजार में विस्तार की गुंजाइश बढ़ती है। हालांकि, गोल्ड लोन कारोबार में तेजी के साथ कंपनियों को रिस्क मैनेजमेंट और ग्राहकों के हितों का भी ध्यान रखना होगा।
आगे बढ़ेगा गोल्ड लोन का बाजार?
टाटा, गोदरेज और आदित्य बिरला जैसे बड़े समूहों की एंट्री से एक बात साफ है कि गोल्ड लोन को अब पारंपरिक और सीमित कारोबार के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।
भारत में सोने की बड़ी होल्डिंग, सिक्योर्ड क्रेडिट की मांग, बढ़ता औपचारिक वित्तीयकरण और छोटे-बड़े शहरों में लोन की जरूरत इस बाजार के लिए बड़ा अवसर पैदा कर रहे हैं।
हालांकि, आगे की सफलता केवल ब्रांचों की संख्या या लोन पोर्टफोलियो बढ़ाने पर निर्भर नहीं करेगी। गोल्ड की वैल्यूएशन, ऑपरेशनल कंट्रोल, सुरक्षा, रेगुलेटरी अनुपालन और ग्राहक भरोसा इस बिजनेस की असली कुंजी होंगे।
ऐसे में आने वाले वर्षों में गोल्ड लोन बाजार में मुथूट और मणप्पुरम जैसे पारंपरिक खिलाड़ियों के साथ टाटा, गोदरेज और बिरला जैसे बड़े कॉरपोरेट समूहों के बीच मुकाबला देखने को मिल सकता है।


