GIFT Nifty Today: बुधवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं। सुबह GIFT निफ्टी मामूली गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं, एशियाई बाजारों में तेज गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड करीब 96 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है, जबकि अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड भी 4.8% के आसपास बनी हुई है।
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव, महंगे क्रूड और वैश्विक बॉन्ड मार्केट में बिकवाली के कारण बाजार में Risk-Off Sentiment देखने को मिल रहा है। ऐसे माहौल में बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत सुस्त रहने की संभावना है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को कुछ सहारा दे सकती है।
GIFT निफ्टी में मामूली गिरावट
बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे GIFT Nifty 24,027 के आसपास कारोबार कर रहा था। इसमें करीब 24 अंक यानी 0.10% की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिल रहा है कि भारतीय बाजार की शुरुआत सीमित कमजोरी के साथ हो सकती है।
इससे पहले मंगलवार को भी घरेलू बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ था। Sensex 12.99 अंक यानी 0.02% गिरकर 76,944.28 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 24.60 अंक यानी 0.10% की कमजोरी के साथ 24,055.80 पर रहा।
अब बाजार की नजर ग्लोबल संकेतों, क्रूड की चाल और विदेशी निवेशकों के रुख पर रहेगी।
एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली
बुधवार को एशियाई शेयर बाजारों में व्यापक गिरावट देखने को मिली। ग्लोबल बॉन्ड मार्केट में बिकवाली और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है।
जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों का MSCI इंडेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 0.8% नीचे था। दक्षिण कोरिया का Kospi करीब 3% तक गिर गया, जबकि जापान का Nikkei 225 करीब 2.2% टूट गया।
ग्लोबल मार्केट में इस तरह की कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिल सकता है, खासकर उन सेक्टरों पर जिनका प्रदर्शन विदेशी बाजारों और कच्चे तेल की कीमतों से ज्यादा प्रभावित होता है।
US Treasury Yield 4.8% के करीब
अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में भी दबाव बना हुआ है। US 10-Year Treasury Yield करीब 4.80% तक पहुंच गया है। बढ़ती यील्ड का असर इक्विटी मार्केट के वैल्यूएशन पर पड़ सकता है, क्योंकि बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों के लिए सुरक्षित एसेट्स ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं।
इसके अलावा, अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर भी बाजार की चिंता बढ़ी है। फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका बनी हुई है।
क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 1% की तेजी
कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को शुरुआती कारोबार में लगभग 1% की बढ़ोतरी हुई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई प्रभावित होने की आशंका ने कीमतों को सहारा दिया है।
Brent Crude Futures करीब 0.92% बढ़कर $95.52 प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं WTI Crude Futures करीब 0.89% की तेजी के साथ $91.02 प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
मंगलवार को भी दोनों प्रमुख क्रूड कॉन्ट्रैक्ट्स में 4 डॉलर से ज्यादा की तेजी आई थी। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर पड़ सकता है।
महंगा क्रूड भारत के इंपोर्ट बिल, रुपये, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकता है।
वॉल स्ट्रीट भी दबाव में
मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में भी गिरावट जारी रही। बढ़ती बॉन्ड यील्ड और क्रूड की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।
अमेरिकी बाजार के प्रमुख इंडेक्सों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा:
- Nasdaq Composite: 1.03% गिरकर 26,099.77
- Dow Jones: 0.79% गिरकर 52,766.93
- S&P 500: 0.71% गिरकर 7,631.47
अमेरिकी बाजारों की कमजोरी और एशियाई बाजारों में भारी गिरावट के कारण भारतीय बाजार के लिए भी शुरुआती संकेत सकारात्मक नहीं हैं।
एक्सपर्ट की नजर में बाजार की तस्वीर
एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का 4.8% के करीब पहुंचना इक्विटी बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल बना रहा है।
उनके अनुसार, आने वाले समय में ग्लोबल मैक्रोइकोनॉमिक और जियोपॉलिटिकल जोखिम बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
ऐसे में निवेशकों को बाजार में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
Nifty का टेक्निकल आउटलुक
तकनीकी नजरिए से Nifty का रुख फिलहाल सतर्क से कमजोर बना हुआ है। एक्सपर्ट के मुताबिक, 24,150-24,200 का क्षेत्र निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है।
वहीं दूसरी ओर 24,000 का स्तर अहम सपोर्ट बना हुआ है। अगर निफ्टी 24,000 के नीचे जाता है और इस स्तर के नीचे टिकता है, तो इंडेक्स में और कमजोरी देखने को मिल सकती है।
ऐसी स्थिति में 23,900-23,800 का जोन अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट बन सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
बुधवार को बाजार की दिशा तय करने में मुख्य रूप से चार चीजें महत्वपूर्ण रहेंगी—क्रूड ऑयल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, ग्लोबल मार्केट का रुख और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां।
जब तक वैश्विक स्तर पर जियोपॉलिटिकल तनाव कम नहीं होता और क्रूड की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय अपने जोखिम और निवेश रणनीति के अनुसार कदम उठाना चाहिए।
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