Petrol Diesel Monsoon Connection: पेट्रोल-डीजल की मांग और मॉनसून के बीच सीधा संबंध नजर नहीं आता, लेकिन भारत जैसे कृषि प्रधान देश में बारिश का असर फ्यूल की खपत पर साफ दिखाई देता है। मॉनसून की शुरुआत में आमतौर पर पेट्रोल और डीजल की बिक्री में कमी आती है। इसकी बड़ी वजह खेतों में सिंचाई के लिए डीजल पंपों की जरूरत कम होना और बारिश के कारण वाहनों की आवाजाही में बदलाव है। हालांकि, अगर बारिश समय पर न हो या असमान तरीके से हो, तो तस्वीर बदल जाती है और डीजल की मांग बढ़ सकती है।
पेट्रोल-डीजल का मॉनसून से क्या कनेक्शन है?
भारत में डीजल की खपत का एक बड़ा हिस्सा कृषि गतिविधियों, माल ढुलाई और सिंचाई से जुड़ा है। जब मॉनसून सामान्य रहता है और पर्याप्त बारिश समय पर हो जाती है, तो किसानों को खेतों में सिंचाई पंप चलाने की जरूरत कम पड़ती है। इससे डीजल की खपत पर दबाव आता है।
इसके अलावा, लगातार बारिश होने पर सड़क परिवहन और दूसरे आर्थिक कामकाज की रफ्तार भी कुछ हद तक प्रभावित हो सकती है। इसका असर पेट्रोल की बिक्री पर भी पड़ सकता है।
लेकिन अगर बारिश देर से आए, कम हो या अलग-अलग इलाकों में असमान रहे, तो किसान बारिश का इंतजार करने के बजाय डीजल से चलने वाले पंपों के जरिए खेतों की सिंचाई कर सकते हैं। ऐसे समय में डीजल की मांग बढ़ जाती है।
अगस्त में पेट्रोल की बिक्री 9.1% बढ़ी
अगस्त में इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) की पेट्रोल बिक्री में सालाना आधार पर 9.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। बिक्री बढ़कर करीब 34.8 लाख टन हो गई, जबकि पिछले साल अगस्त में यह लगभग 31.9 लाख टन थी।
यह लगातार मजबूत मांग का संकेत है। जुलाई में भी पेट्रोल की बिक्री सालाना आधार पर 9.7 फीसदी बढ़ी थी।
अगस्त 2024 के मुकाबले पेट्रोल की बिक्री करीब 14 फीसदी अधिक रही, जबकि अगस्त 2023 की तुलना में इसमें लगभग 30.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
महीने-दर-महीने आधार पर भी पेट्रोल की बिक्री करीब 1 फीसदी बढ़ी।
डीजल की मांग में डबल डिजिट ग्रोथ
डीजल की तस्वीर और ज्यादा मजबूत रही। अगस्त में तीनों सरकारी तेल कंपनियों की डीजल बिक्री सालाना आधार पर 10.2 फीसदी बढ़कर 62.7 लाख टन हो गई। एक साल पहले अगस्त में यह करीब 56.9 लाख टन थी।
डीजल की मांग में यह लगातार दूसरा महीना है जब सालाना आधार पर डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज हुई। जुलाई में भी डीजल की बिक्री 10.7 फीसदी बढ़ी थी।
भारत में डीजल को आर्थिक गतिविधियों का एक अहम संकेतक माना जाता है। ट्रक, बस, कृषि मशीनरी, सिंचाई पंप और कई औद्योगिक गतिविधियों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है।
अनियमित बारिश ने बढ़ाई सिंचाई की जरूरत
इस साल मॉनसून के दौरान कई क्षेत्रों में बारिश का पैटर्न सामान्य नहीं रहा। जहां पर्याप्त बारिश नहीं हुई, वहां किसानों को फसलों के लिए अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत पड़ी।
ऐसे में डीजल से चलने वाले कृषि पंपों का इस्तेमाल बढ़ सकता है। खासकर बुवाई के महत्वपूर्ण दौर में अगर बारिश का अंतराल लंबा हो जाए, तो किसान फसल बचाने के लिए वैकल्पिक सिंचाई का सहारा लेते हैं।
यही वजह है कि सामान्य परिस्थितियों में मॉनसून से डीजल की मांग घटने की उम्मीद के बावजूद इस अवधि में इसकी बिक्री मजबूत रही।
फिर जुलाई के मुकाबले अगस्त में डीजल की बिक्री क्यों घटी?
सालाना आंकड़े मजबूत होने के बावजूद महीने-दर-महीने आधार पर डीजल की बिक्री में गिरावट आई। अगस्त में बिक्री करीब 62.7 लाख टन रही, जबकि जुलाई में यह लगभग 71.3 लाख टन थी। यानी मासिक आधार पर करीब 12 फीसदी की कमी आई।
इसका मतलब यह नहीं है कि डीजल की मांग कमजोर हो गई। सालाना आधार पर 10.2 फीसदी की वृद्धि बताती है कि पिछले साल की तुलना में खपत काफी मजबूत रही। जुलाई और अगस्त के बीच का अंतर मौसमी मांग, कृषि गतिविधियों और परिवहन से जुड़े बदलावों की वजह से हो सकता है।
ATF की बिक्री भी बढ़ी
फ्यूल मार्केट में सिर्फ पेट्रोल और डीजल की मांग ही नहीं बढ़ी। अगस्त में एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की बिक्री 5.6 फीसदी बढ़कर 6,77,100 टन हो गई।
अगस्त 2024 में ATF की खपत करीब 6,39,700 टन थी। वहीं अगस्त 2023 के 5,75,400 टन के मुकाबले इस बार की खपत करीब 17.7 फीसदी ज्यादा रही।
जुलाई के मुकाबले भी ATF की बिक्री करीब 1.3 फीसदी बढ़ी।
यह आंकड़ा हवाई यात्रा से जुड़ी ईंधन मांग में मजबूती की ओर इशारा करता है।
LPG की बिक्री में गिरावट जारी
दूसरी तरफ LPG की बिक्री में गिरावट का सिलसिला बना हुआ है। अगस्त में LPG की बिक्री करीब 16.1 फीसदी घटकर 24.2 लाख टन रह गई। जुलाई में भी LPG की मांग में 17.4 फीसदी की सालाना गिरावट दर्ज हुई थी।
अगस्त 2024 के 27.7 लाख टन के मुकाबले इस बार LPG की खपत करीब 12.6 फीसदी कम रही।
अगस्त 2023 की तुलना में भी बिक्री करीब 0.3 फीसदी कम रही।
हालांकि महीने-दर-महीने आधार पर LPG की बिक्री में करीब 2.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
LPG से PNG की ओर बढ़ रहा है कुछ यूजर्स का रुझान
इंडस्ट्री अधिकारियों के मुताबिक LPG की मांग में कमी का एक कारण कुछ औद्योगिक और कमर्शियल ग्राहकों का पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG की ओर जाना भी है।
पश्चिम एशिया में संकट के बाद सप्लाई से जुड़ी परिस्थितियों ने LPG की खपत को प्रभावित किया था। होटल और रेस्तरां जैसे कुछ क्षेत्रों में भी खपत पर असर पड़ा।
बाद में जून में कुछ पाबंदियां हटने के बाद LPG बिक्री में सुधार दिखाई दिया था, लेकिन सालाना आधार पर मांग अभी भी कमजोर रही।
इससे पता चलता है कि भारत का फ्यूल मार्केट केवल कच्चे तेल की कीमतों या मौसम से प्रभावित नहीं होता। अलग-अलग सेक्टर में ईंधन बदलने की प्रवृत्ति भी कुल मांग को प्रभावित करती है।
पेट्रोल-डीजल की मांग को मॉनसून कैसे प्रभावित करता है?
इसे आसान भाषा में चार बिंदुओं से समझ सकते हैं:
1. अच्छी बारिश: खेतों में प्राकृतिक नमी बढ़ती है और सिंचाई पंपों की जरूरत घटती है। इससे डीजल की मांग कम हो सकती है।
2. बारिश में देरी: किसान खेतों की सिंचाई के लिए डीजल पंप चलाते हैं। इससे डीजल की खपत बढ़ सकती है।
3. असमान बारिश: कुछ क्षेत्रों में पानी पर्याप्त होने के बावजूद दूसरे इलाकों में सिंचाई की जरूरत बनी रहती है। इससे फ्यूल डिमांड का पैटर्न बदलता है।
4. परिवहन गतिविधियां: मॉनसून के दौरान सड़क परिवहन, माल ढुलाई और लोगों की आवाजाही में बदलाव पेट्रोल-डीजल की खपत को प्रभावित कर सकता है।
आगे फ्यूल डिमांड के लिए क्या मायने रखता है?
पेट्रोल और डीजल की मांग को समझने के लिए सिर्फ बिक्री का एक महीने का आंकड़ा देखना पर्याप्त नहीं है। कृषि सीजन, मॉनसून की स्थिति, सड़क परिवहन, औद्योगिक गतिविधियां और आर्थिक ग्रोथ—इन सभी का असर फ्यूल खपत पर पड़ता है।
अगस्त के आंकड़ों में पेट्रोल और डीजल की सालाना वृद्धि यह बताती है कि फ्यूल की कुल मांग मजबूत बनी हुई है। खासकर डीजल की डबल डिजिट ग्रोथ कृषि और परिवहन गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण संकेत देती है।
हालांकि, आने वाले महीनों में मॉनसून की स्थिति सामान्य होने पर कृषि सिंचाई से जुड़ी डीजल मांग में बदलाव आ सकता है। वहीं त्योहारों के मौसम में लोगों की आवाजाही और माल ढुलाई बढ़ने पर पेट्रोल-डीजल की खपत को अतिरिक्त सपोर्ट मिल सकता है।
निष्कर्ष
पेट्रोल-डीजल और मॉनसून का रिश्ता भारत की अर्थव्यवस्था की जमीनी तस्वीर को समझने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। सामान्य बारिश होने पर सिंचाई के लिए डीजल पंपों की जरूरत घट सकती है, जबकि बारिश में देरी या अनियमितता किसानों को डीजल आधारित सिंचाई पर निर्भर कर सकती है।
अगस्त के आंकड़ों में यही तस्वीर दिखाई दी—पेट्रोल की बिक्री 9.1 फीसदी और डीजल की बिक्री 10.2 फीसदी बढ़ी। दूसरी ओर ATF की मांग भी बढ़ी, जबकि LPG की बिक्री में गिरावट जारी रही। यानी भारत का फ्यूल मार्केट एक साथ कई आर्थिक और मौसमी संकेतकों से प्रभावित हो रहा है।


