Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में 2 सितंबर 2026 को कारोबार की शुरुआत ही भारी बिकवाली के साथ हुई। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने की खबरों के बीच घरेलू बाजार में निवेशकों का भरोसा कमजोर नजर आया। शुरुआती कारोबार में Sensex 800 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 फिसलकर 23,800 के नीचे पहुंच गया।
बाजार में बिकवाली का दबाव सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेज गिरावट देखने को मिली। वहीं, निफ्टी के सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
बाजार में इस तेज गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। कारोबार शुरू होते ही BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹5.60 लाख करोड़ घट गया।
शुरुआती कारोबार में Sensex 800 अंक से ज्यादा टूटा

सुबह 9:21 बजे तक Sensex 706.50 अंक यानी 0.92% की गिरावट के साथ 76,237.78 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 में 235.40 अंक यानी 0.98% की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,820.40 पर आ गया।
इंट्रा-डे कारोबार में गिरावट और तेज हुई। Sensex एक समय 808.56 अंक टूटकर 76,135.72 के स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह Nifty 50 भी 269 अंक गिरकर 23,786.80 पर आ गया।
इस तरह Nifty ने 23,800 के अहम स्तर को भी शुरुआती कारोबार में तोड़ दिया, जिससे बाजार में कमजोरी और बढ़ती दिखाई दी।
निवेशकों की दौलत में ₹5.60 लाख करोड़ की कमी
शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर देखने को मिला। 1 सितंबर 2026 को BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹4,89,41,989.64 करोड़ था।
2 सितंबर को बाजार खुलने के बाद यह घटकर ₹4,83,81,902.24 करोड़ रह गया।
यानी कुछ ही समय में निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब ₹5,60,087.40 करोड़, यानी लगभग ₹5.60 लाख करोड़ की कमी आ गई।
बाजार में इतनी तेज गिरावट यह बताती है कि शुरुआती कारोबार में बिकवाली कितनी आक्रामक रही।
Sensex के 30 शेयरों में सिर्फ Sun Pharma हरे निशान में

Sensex के 30 शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान सिर्फ Sun Pharma ही हरे निशान में नजर आया। हालांकि, इसमें भी तेजी सीमित रही।
दूसरी तरफ IndiGo, Infosys और M&M में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। बड़ी कंपनियों के शेयरों में व्यापक बिकवाली ने प्रमुख इंडेक्स पर भी दबाव बढ़ाया।
इससे साफ है कि बाजार में फिलहाल निवेशकों का रुझान जोखिम से बचने की तरफ है और कई प्रमुख सेक्टरों में मुनाफावसूली या बिकवाली देखने को मिल रही है।
Midcap और Smallcap इंडेक्स भी दबाव में
बाजार की कमजोरी सिर्फ Sensex और Nifty तक सीमित नहीं रही। ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
शुरुआती कारोबार में Nifty Midcap 100 और Nifty Smallcap इंडेक्स करीब 1-1% तक नीचे कारोबार कर रहे थे। वहीं निफ्टी के सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में नजर आए।
ब्रॉडर मार्केट में इस तरह की गिरावट से संकेत मिलता है कि बाजार में बिकवाली का दबाव व्यापक है और सिर्फ कुछ चुनिंदा बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि छोटे और मझोले शेयर भी इसकी चपेट में हैं।
BSE पर 1766 शेयरों में गिरावट
2 सितंबर को BSE पर कुल 2,836 शेयरों में कारोबार हो रहा था। इनमें से:
- 895 शेयर बढ़त में कारोबार कर रहे थे।
- 1,766 शेयर गिरावट में थे।
- 175 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
- 63 शेयर अपने एक साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचे।
- 65 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए।
- 71 शेयर अपर सर्किट पर पहुंचे।
- 97 शेयर लोअर सर्किट पर पहुंच गए।
इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाजार में गिरावट कितनी व्यापक थी। हालांकि, कुछ शेयरों में खरीदारी बनी हुई थी और कई शेयर अपने 52-वीक हाई पर भी पहुंचे।
बाजार में गिरावट की बड़ी वजहें क्या हैं?
शेयर बाजार की इस तेज कमजोरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू संकेतकों का असर माना जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी से उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के आकर्षण पर असर पड़ सकता है।
वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाकर सुरक्षित विकल्पों की तरफ रुख कर सकते हैं।
भारतीय बाजार में पहले से मौजूद ऊंचे वैल्यूएशन और विदेशी बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों के बीच इन खबरों ने बिकवाली को और तेज कर दिया।
आगे निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
बाजार में इतनी तेज गिरावट के बाद निवेशकों की नजर अब Nifty के 23,800 के स्तर पर रहेगी। यदि इंडेक्स इस स्तर के नीचे टिकता है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। दूसरी तरफ, इस स्तर के आसपास खरीदारी लौटती है तो बाजार में रिकवरी की कोशिश भी देखने को मिल सकती है।
हालांकि, मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम घरेलू बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। यहां दी गई जानकारी केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है और इसे निवेश की सलाह न माना जाए। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


