घुटनों में दर्द और जकड़न की समस्या अब सिर्फ उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं है। चोट, बढ़ता वजन, लंबे समय तक बैठे रहना, गलत पोश्चर और घुटनों पर ज्यादा दबाव भी इसकी वजह बन सकते हैं। हल्की परेशानी में कुछ आसान आदतें घुटनों को आराम देने और उनकी मूवमेंट बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।
घुटने हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण जोड़ों में से एक हैं। चलने, खड़े होने, सीढ़ियां चढ़ने, बैठने और उठने जैसे रोजमर्रा के लगभग हर काम में घुटनों की भूमिका होती है। यही वजह है कि इनमें दर्द, जकड़न या सूजन होने पर सामान्य काम भी मुश्किल लगने लगते हैं।
घुटने का दर्द हमेशा बढ़ती उम्र का संकेत नहीं होता। चोट लगना, ज्यादा वजन, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना, अचानक ज्यादा एक्सरसाइज करना या घुटने पर लगातार दबाव पड़ना भी परेशानी की वजह बन सकता है।
अगर दर्द हल्का है और किसी गंभीर चोट के बाद शुरू नहीं हुआ है, तो रोजमर्रा की कुछ आदतों से घुटनों की देखभाल की जा सकती है। हालांकि, लगातार दर्द, ज्यादा सूजन या चलने में परेशानी होने पर घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

1. अदरक वाली चाय ले सकते हैं
अदरक में जिंजरोल जैसे प्राकृतिक कंपाउंड पाए जाते हैं, जिनमें सूजन से जुड़े कुछ प्रक्रियाओं पर असर डालने वाले गुण होते हैं। इसलिए अदरक वाली चाय कुछ लोगों को सामान्य तौर पर आरामदायक लग सकती है।
इसके लिए एक इंच अदरक को छोटे टुकड़ों में काटकर एक कप पानी में करीब 5 मिनट उबालें। इसके बाद इसे छानकर पी सकते हैं। स्वाद के लिए थोड़ा नींबू या शहद मिलाया जा सकता है।
हालांकि, अदरक की चाय को घुटने के दर्द का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। अगर दर्द लगातार बना हुआ है तो इसके कारण की जांच जरूरी है।
2. अचानक चोट लगने पर RICE तरीका अपनाएं
अगर घुटने में दर्द पैर मुड़ने, गिरने या किसी हल्की चोट के बाद अचानक शुरू हुआ है, तो शुरुआती देखभाल में RICE तरीका मददगार हो सकता है।
RICE का मतलब है:
- Rest यानी आराम: जिस गतिविधि से दर्द बढ़ रहा हो, उसे कुछ समय के लिए रोकें।
- Ice यानी बर्फ: बर्फ को सीधे त्वचा पर न लगाएं। कपड़े में लपेटकर करीब 15-20 मिनट तक लगाया जा सकता है।
- Compression यानी हल्का दबाव: जरूरत पड़ने पर क्रेप बैंडेज का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसे बहुत कसकर न बांधें।
- Elevation यानी पैर ऊंचा रखना: आराम करते समय पैर को तकिए की मदद से थोड़ा ऊंचा रखा जा सकता है।
अगर चोट के बाद तेज दर्द, बहुत ज्यादा सूजन या पैर पर वजन रखने में परेशानी हो, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
3. सही जूते पहनें, जरूरत हो तो नी-कैप का इस्तेमाल करें
घुटनों की सेहत में जूतों का भी महत्व है। ऐसे जूते या चप्पल पहनें जिनमें पैर को पर्याप्त सपोर्ट मिले और चलते समय असहजता महसूस न हो।
कुछ लोगों को नी-कैप या घुटने के सपोर्ट से चलने-फिरने में सहारा मिल सकता है। लेकिन हर व्यक्ति को इसकी जरूरत नहीं होती। अगर नी-कैप इस्तेमाल कर रहे हैं तो सही साइज का ही चुनें और लंबे समय तक बहुत कसकर न पहनें।
अगर दर्द बार-बार हो रहा है, तो केवल नी-कैप से समस्या दबाने के बजाय दर्द के कारण का पता लगाना ज्यादा जरूरी है।
4. गर्म पानी से जकड़न में मिल सकता है आराम
गुनगुने पानी में पैर रखने से कुछ लोगों को मांसपेशियों की थकान और हल्की जकड़न में आराम महसूस हो सकता है। कुछ लोग इसमें एप्सम सॉल्ट भी मिलाते हैं, हालांकि घुटने के दर्द पर एप्सम सॉल्ट के खास फायदे के पक्के वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।
अगर आप इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं तो गुनगुने पानी में थोड़ी मात्रा में एप्सम सॉल्ट डालकर 15-20 मिनट तक पैर रख सकते हैं। पानी बहुत ज्यादा गर्म न हो, खासकर तब जब त्वचा की संवेदनशीलता कम हो।
ध्यान रखें कि इससे आराम मिलना अलग बात है और घुटने की मूल समस्या का इलाज होना अलग।
5. स्ट्रेचिंग और हल्की एक्सरसाइज को रूटीन में शामिल करें
घुटनों में हल्की परेशानी होने पर पूरी तरह निष्क्रिय रहना हमेशा सही तरीका नहीं होता। डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के अनुसार हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग घुटने के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है।
हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच
कुर्सी पर बैठकर एक पैर को सामने की ओर सीधा करें। कमर को ज्यादा झुकाए बिना शरीर को थोड़ा आगे ले जाएं और कुछ समय इसी स्थिति में रहें। दर्द बढ़े तो तुरंत रुक जाएं।
काफ स्ट्रेच
दीवार पर हाथ रखकर एक पैर पीछे करें। पीछे वाले पैर की एड़ी जमीन पर रखें और शरीर को धीरे-धीरे आगे की ओर ले जाएं।
लेग एक्सटेंशन
कुर्सी पर बैठकर एक पैर को धीरे-धीरे सीधा करें। कुछ सेकंड रोकने के बाद वापस नीचे रखें। शुरुआत में कम दोहराव से करें।
अगर एक्सरसाइज करने पर दर्द या सूजन बढ़ती है तो उसे रोक दें और विशेषज्ञ की सलाह लें।
6. हल्के हाथों से मालिश कर सकते हैं
घुटने के आसपास हल्के हाथों से मालिश करने से कुछ लोगों को अस्थायी तौर पर आराम और रिलैक्सेशन महसूस हो सकता है। इसके लिए नारियल, तिल या सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
तेल को हल्का गुनगुना करके घुटने के आसपास की मांसपेशियों पर करीब 5-10 मिनट तक बहुत हल्के हाथों से मालिश करें। घुटने में ताजा चोट, ज्यादा सूजन, लालिमा या गर्माहट हो तो मालिश करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
मालिश को दर्द के मूल कारण का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
7. डाइट में ओमेगा-3 वाली चीजें शामिल करें
संतुलित डाइट शरीर की सामान्य सेहत के साथ-साथ मांसपेशियों और जोड़ों के लिए भी महत्वपूर्ण है। ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है और सूजन से जुड़े शरीर के कुछ प्रक्रियाओं में इसकी भूमिका होती है।
मछली खाने वाले लोग अपनी डाइट में मैकेरल यानी बांगड़ा, सार्डिन और हिलसा जैसी मछलियां शामिल कर सकते हैं। वहीं शाकाहारी लोग अलसी के बीज, अखरोट और चिया सीड्स जैसे विकल्प ले सकते हैं।
इसके साथ ही बहुत ज्यादा तला-भुना और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाना कम करना और संतुलित आहार लेना बेहतर विकल्प है।
वजन पर ध्यान देना भी है जरूरी
अगर वजन ज्यादा है तो घुटनों पर रोजाना अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। ऐसे में संतुलित डाइट और नियमित, कम प्रभाव वाली शारीरिक गतिविधि के जरिए स्वस्थ वजन बनाए रखना घुटनों की देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
एकदम से बहुत ज्यादा दौड़ने या भारी एक्सरसाइज शुरू करने के बजाय धीरे-धीरे गतिविधि बढ़ाना बेहतर है।
घुटने के दर्द में कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
हर तरह के घुटने के दर्द को घरेलू उपायों से ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। कुछ लक्षण ऐसी स्थिति की ओर इशारा कर सकते हैं जिसमें मेडिकल जांच जरूरी है।
डॉक्टर से सलाह लें अगर:
- घुटने का दर्द लगातार बना रहे या बढ़ता जाए।
- दर्द करीब दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक बना रहे।
- घुटने में ज्यादा सूजन, लालिमा या असामान्य गर्माहट हो।
- पैर पर वजन रखने या खड़े होने में परेशानी हो।
- घुटना अचानक जवाब देने लगे या चलते समय अस्थिर महसूस हो।
- चोट के बाद घुटना टेढ़ा या असामान्य दिखाई दे।
- घुटने को पूरी तरह मोड़ने या सीधा करने में परेशानी हो।
- चोट के बाद तेज दर्द या तेजी से बढ़ती सूजन दिखाई दे।
ध्यान रखें
घुटने में दर्द कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है। इसलिए अदरक की चाय, गर्म पानी, मालिश या नी-कैप जैसे उपायों को केवल सामान्य राहत देने वाले उपायों के रूप में देखें, किसी बीमारी के इलाज के विकल्प के तौर पर नहीं।
अगर दर्द बार-बार हो रहा है या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे हैं, तो ऑर्थोपेडिक डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से उचित सलाह लेना सबसे बेहतर कदम है।


