Nifty Trade Setup: 24,000-23,950 का सपोर्ट जोन बेहद अहम, टूटने पर 23,800 और 23,600 तक फिसल सकता है इंडेक्स
भारतीय शेयर बाजार में नियर टर्म में उतार-चढ़ाव और कंसोलिडेशन का दौर जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं। 1 सितंबर को निफ्टी में हल्की कमजोरी देखने को मिली, हालांकि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में आई रिकवरी के चलते इंडेक्स 24,000 के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा। मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच टेक्निकल इंडिकेटर्स भी फिलहाल बाजार में सतर्क रुख की ओर इशारा कर रहे हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले कारोबारी सत्रों में 24,000-23,950 का सपोर्ट जोन निफ्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। अगर निफ्टी इस जोन के नीचे जाता है और वहां टिकता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स पहले 23,800 और उसके बाद 23,600 के स्तर तक फिसल सकता है।
इसके उलट, अगर निफ्टी 24,000-23,950 के सपोर्ट जोन के ऊपर बना रहता है, तो रिकवरी की संभावना मजबूत हो सकती है। ऐसी स्थिति में इंडेक्स 24,200-24,400 के जोन की तरफ बढ़ सकता है।
वीकली ऑप्शन डेटा भी संकेत दे रहा है कि शॉर्ट टर्म में निफ्टी के लिए 23,500 से 24,500 की बड़ी ट्रेडिंग रेंज महत्वपूर्ण रह सकती है। यानी बाजार में फिलहाल एकतरफा तेज मूव की बजाय सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
Nifty 50 के अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल
1 सितंबर की क्लोजिंग के आधार पर Nifty 50 करीब 24,056 के स्तर पर रहा। ट्रेडर्स के लिए पिवट प्वाइंट के आधार पर ये लेवल महत्वपूर्ण रहेंगे:
सपोर्ट लेवल:
- 23,978
- 23,933
- 23,860
रेजिस्टेंस लेवल:
- 24,123
- 24,168
- 24,241
इन लेवल्स के आसपास इंडेक्स की चाल पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। सपोर्ट के नीचे कमजोरी बढ़ सकती है, जबकि रेजिस्टेंस के ऊपर टिकने पर बाजार में खरीदारी का रुझान मजबूत हो सकता है।
Nifty में बना High-Wave Candlestick Pattern
डेली टाइमफ्रेम पर निफ्टी ने High-Wave Candlestick Pattern बनाया है। यह पैटर्न बाजार में बुल्स और बेयर्स के बीच असमंजस और बढ़ी हुई अनिश्चितता को दर्शाता है।
इंडेक्स अभी भी कई प्रमुख मूविंग एवरेज के नीचे कारोबार कर रहा है। मीडियम और लॉन्ग टर्म मूविंग एवरेज में ज्यादा बदलाव नहीं दिख रहा, जबकि शॉर्ट टर्म मूविंग एवरेज में गिरावट का रुझान बना हुआ है।
इसके अलावा, 10-Day EMA, 50-Day और 100-Day EMA से नीचे आ गया है। यह शॉर्ट टर्म में कमजोरी का संकेत माना जा सकता है।
मोमेंटम इंडिकेटर्स की बात करें तो RSI 42.86 पर आ गया है। वहीं MACD जीरो लाइन से नीचे बना हुआ है और इसका डाउनट्रेंड जारी है। रेड हिस्टोग्राम बार में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
इन संकेतों को मिलाकर देखें तो निफ्टी के लिए फिलहाल सावधानी बरतने की जरूरत है। बाजार में निकट अवधि में कमजोरी और कंसोलिडेशन का दौर जारी रह सकता है।
Bank Nifty के लिए अहम ट्रेडिंग लेवल
Bank Nifty करीब 57,410 के स्तर पर रहा। पिवट प्वाइंट और Fibonacci Retracement के आधार पर इंडेक्स के लिए ये लेवल महत्वपूर्ण हैं।
Pivot Point के आधार पर रेजिस्टेंस
- 57,677
- 57,823
- 58,058
Pivot Point के आधार पर सपोर्ट
- 57,207
- 57,062
- 56,827
Fibonacci के आधार पर रेजिस्टेंस
- 58,137
- 58,706
Fibonacci के आधार पर सपोर्ट
- 57,135
- 56,870
Bank Nifty में कमजोरी, लेकिन लॉन्ग टर्म स्ट्रक्चर अभी पॉजिटिव
Bank Nifty ने डेली चार्ट पर दोनों तरफ विक्स वाली एक Bearish Candlestick बनाई है। इंडेक्स ने पिछले कारोबारी सत्र की पूरी बढ़त गंवा दी और करीब 1.06 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ।
इंडेक्स अब अपने शॉर्ट टर्म मूविंग एवरेज से नीचे आ गया है, जो निकट अवधि में सावधानी का संकेत देता है। हालांकि, Bank Nifty का ओवरऑल स्ट्रक्चर अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है, क्योंकि यह अभी भी मीडियम और लॉन्ग टर्म मूविंग एवरेज के ऊपर कारोबार कर रहा है।
RSI और MACD भी पिछले कई कारोबारी सत्रों से सीमित दायरे में बने हुए हैं। इससे पता चलता है कि फिलहाल इंडेक्स में किसी मजबूत दिशात्मक मोमेंटम की कमी है।
कुल मिलाकर Bank Nifty में निकट अवधि में कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है। जब तक इंडेक्स प्रमुख रेजिस्टेंस के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट या अहम सपोर्ट के नीचे ब्रेकडाउन नहीं देता, तब तक इसके एक दायरे में कारोबार करने की संभावना ज्यादा है।
India VIX से क्या संकेत मिल रहे हैं?
बाजार में उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाने वाला India VIX 1 सितंबर को 9.25 से 12.12 के दायरे में घूमने के बाद बिना किसी बड़े बदलाव के 11.19 पर बंद हुआ।
VIX अपने शॉर्ट टर्म मूविंग एवरेज से नीचे और निचले स्तरों पर बना हुआ है। इससे फिलहाल बाजार में अत्यधिक चिंता नहीं दिखती।
इसका मतलब यह है कि निकट अवधि में वोलैटिलिटी सीमित रह सकती है। हालांकि, ग्लोबल मार्केट, भू-राजनीतिक घटनाओं या किसी बड़े घरेलू ट्रिगर की वजह से अचानक तेज हलचल आने पर वोलैटिलिटी बढ़ सकती है।
Put-Call Ratio में गिरावट
बाजार के सेंटीमेंट को समझने के लिए इस्तेमाल होने वाला Nifty Put-Call Ratio (PCR) भी नजर रखने लायक है। 1 सितंबर को Nifty PCR गिरकर 0.89 पर आ गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 0.91 था।
आमतौर पर 0.7 से ऊपर और खासकर 1 के आसपास या उससे ऊपर PCR को अपेक्षाकृत तेजी वाले सेंटीमेंट से जोड़ा जाता है। वहीं 0.7 से नीचे जाने वाला PCR बाजार में कमजोर या मंदी वाले सेंटीमेंट का संकेत दे सकता है।
फिलहाल 0.89 का स्तर बताता है कि बाजार का सेंटीमेंट पूरी तरह bearish नहीं है, लेकिन इसमें पहले की तुलना में थोड़ी नरमी जरूर आई है।
F&O Ban में कौन-कौन से स्टॉक?
F&O सेगमेंट में उन शेयरों को प्रतिबंधित सूची में शामिल किया जाता है, जिनमें ओपन पोजीशन मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट (MWPL) के 95 फीसदी से ऊपर पहुंच जाती है।
F&O Ban में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं
F&O Ban में पहले से शामिल स्टॉक:
- LIC Housing Finance
- SAIL
F&O Ban से बाहर हुए स्टॉक: कोई नहीं
आज की रणनीति क्या हो सकती है?
निफ्टी के लिए फिलहाल 24,000-23,950 का सपोर्ट जोन सबसे महत्वपूर्ण नजर आ रहा है। इसके ऊपर टिके रहने पर बाजार में 24,200 और फिर 24,400 की तरफ रिकवरी की संभावना बनी रहेगी।
वहीं, अगर 23,950 के नीचे निर्णायक कमजोरी आती है, तो 23,800 के बाद 23,600 अगला अहम सपोर्ट बन सकता है।
Bank Nifty में भी 57,200 के आसपास का क्षेत्र महत्वपूर्ण है। इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर 57,062 और 56,827 की तरफ दबाव देखा जा सकता है। दूसरी तरफ 57,677-58,058 के जोन के ऊपर मजबूती आने पर तेजी का मोमेंटम बेहतर हो सकता है।
कुल मिलाकर टेक्निकल संकेतों को देखते हुए नियर टर्म में बाजार में सतर्कता और कंसोलिडेशन की संभावना ज्यादा है। ऐसे में ट्रेडर्स को अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स पर नजर रखते हुए ही पोजीशन लेने की रणनीति अपनानी चाहिए।
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