India-Brazil Trade: भारत और ब्राजील के बीच कारोबारी रिश्तों को नई रफ्तार देने की तैयारी चल रही है। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस रणनीति में भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियों के लिए ब्राजील के बाजार में बेहतर पहुंच को खास महत्व दिया जा रहा है। भारत ने दवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ब्राजील में अधिक भरोसेमंद और पारदर्शी रेगुलेटरी व्यवस्था की मांग रखी है।
नई दिल्ली: भारत और ब्राजील के बीच आर्थिक और कारोबारी संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। दोनों देश आपसी व्यापार को बढ़ाने के साथ-साथ नए क्षेत्रों में कारोबारी अवसर तलाश रहे हैं। इसी कड़ी में भारत ने ब्राजील के फार्मास्युटिकल बाजार में भारतीय दवाओं की पहुंच आसान बनाने पर जोर दिया है।
भारत का मानना है कि बेहतर रेगुलेटरी प्रक्रियाओं और आसान मार्केट एक्सेस से भारतीय कंपनियों के लिए ब्राजील में कारोबार करना आसान होगा। इससे किफायती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
भारत ने ब्राजील के सामने रखी ये मांग
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, ब्राजीलिया में आयोजित भारत-ब्राजील ट्रेड मॉनिटरिंग मैकेनिज्म की आठवीं बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
बैठक के दौरान भारत ने भारतीय दवा कंपनियों के लिए ब्राजील के बाजार तक पहुंच आसान बनाने की जरूरत पर जोर दिया। भारत ने अधिक भरोसेमंद और पारदर्शी रेगुलेटरी प्रक्रियाओं का समर्थन किया है।
फार्मास्युटिकल सेक्टर भारत के लिए महत्वपूर्ण निर्यात क्षेत्रों में से एक है। इसलिए ब्राजील जैसे बड़े बाजार में भारतीय दवाओं के लिए नियामकीय बाधाओं को कम करना कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा कर सकता है।
मर्कोसुर के साथ ट्रेड समझौते को बढ़ाने पर जोर
भारत और ब्राजील ने भारत तथा दक्षिण अमेरिकी व्यापार समूह मर्कोसुर के बीच मौजूदा ट्रेड समझौते को व्यापक बनाने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ने पर सहमति जताई है।
दोनों पक्षों ने इस समझौते के विस्तार के लिए बातचीत की शर्तों यानी Terms of Reference (ToR) को जल्द अंतिम रूप देने पर जोर दिया है। इससे भविष्य में भारत और दक्षिण अमेरिकी बाजारों के बीच व्यापार का दायरा बढ़ सकता है।
मर्कोसुर में ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पैराग्वे शामिल हैं। भारत और मर्कोसुर के बीच प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) 1 जून 2009 को लागू हुआ था।
2009 से लागू है भारत-मर्कोसुर समझौता
भारत सरकार के मुताबिक, मौजूदा भारत-मर्कोसुर प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट में विस्तार और आधुनिकीकरण की काफी संभावनाएं हैं।
व्यापार बढ़ने के साथ दोनों पक्ष अब इस समझौते को अधिक व्यापक बनाने पर विचार कर रहे हैं। अगर इसमें ज्यादा उत्पादों और क्षेत्रों को शामिल किया जाता है, तो भारतीय निर्यातकों को दक्षिण अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
फार्मा के अलावा इंजीनियरिंग सामान, केमिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स और अन्य औद्योगिक उत्पादों के लिए भी दक्षिण अमेरिकी बाजार महत्वपूर्ण हो सकता है।
2030 तक 30 अरब डॉलर का व्यापार
भारत और ब्राजील ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। यह मौजूदा व्यापार स्तर की तुलना में काफी बड़ी छलांग होगी।
उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में भारत और ब्राजील के बीच द्विपक्षीय व्यापार 15.07 अरब डॉलर रहा। ऐसे में 2030 तक 30 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल करने के लिए दोनों देशों को व्यापार में तेज वृद्धि दर्ज करनी होगी।
इसके लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाने, व्यापारिक बाधाओं को कम करने और नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए क्यों अहम है ब्राजील?
ब्राजील दक्षिण अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और यहां हेल्थकेयर तथा दवाओं का बड़ा बाजार है। भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियां पहले से ही दुनिया के कई देशों में जेनेरिक दवाओं और अन्य फार्मा उत्पादों का निर्यात करती हैं।
अगर ब्राजील में भारतीय दवाओं के लिए रेगुलेटरी प्रक्रियाएं अधिक स्पष्ट और सुगम होती हैं, तो भारतीय कंपनियों के लिए वहां अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर बन सकता है।
भारत के लिए इसका एक और फायदा यह हो सकता है कि निर्यात बाजारों में विविधता बढ़े। इससे किसी एक क्षेत्र या बाजार पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
भारत-ब्राजील रिश्तों में व्यापार की बढ़ती भूमिका
भारत और ब्राजील के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश बहुपक्षीय मंचों पर भी सहयोग करते हैं। हालांकि, अब आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए व्यापार तथा निवेश को प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया जा रहा है।
2030 का 30 अरब डॉलर का लक्ष्य इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसके लिए दोनों देशों के बीच नियमित बातचीत, ट्रेड एग्रीमेंट का विस्तार और भारतीय उत्पादों के लिए बेहतर मार्केट एक्सेस अहम भूमिका निभा सकते हैं।
अगर रेगुलेटरी और व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में ठोस प्रगति होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत-ब्राजील कारोबार में फार्मास्युटिकल सेक्टर के साथ-साथ अन्य उद्योगों की हिस्सेदारी भी बढ़ सकती है।


