Union Budget 2027: केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2027-28 के यूनियन बजट की तैयारियां शुरू कर दी हैं। डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (बजट डिविजन) ने सभी मंत्रालयों और विभागों के लिए बजट सर्कुलर 2027-28 जारी कर दिया है। इसके साथ ही अगले वित्त वर्ष के बजट की शुरुआती प्रक्रिया शुरू हो गई है।
भारत में केंद्रीय बजट आमतौर पर हर साल 1 फरवरी को पेश किया जाता है। ऐसे में 1 फरवरी 2027 को पेश होने वाला बजट वित्त वर्ष 2027-28 के लिए केंद्र सरकार का बजट होगा। इस बजट में सरकार की आय, खर्च, योजनाओं के लिए आवंटन और आर्थिक प्राथमिकताओं की तस्वीर सामने आएगी।
6 अक्टूबर तक मंत्रालयों को बतानी होगी पैसों की जरूरत
बजट सर्कुलर जारी होने के बाद सभी मंत्रालयों और विभागों को अपनी वित्तीय जरूरतों का अनुमान तैयार करना होगा। उन्हें Union Budget Information System (UBIS) के जरिए अपनी बजट संबंधी मांग और जरूरत की जानकारी देनी होगी।
इसके लिए 6 अक्टूबर 2026 की समयसीमा तय की गई है। मंत्रालयों से वित्त वर्ष 2026-27 के रिवाइज्ड एस्टिमेट (RE) और वित्त वर्ष 2027-28 के बजट एस्टिमेट (BE) भी मांगे गए हैं।
सरल शब्दों में समझें तो मंत्रालयों को यह बताना होगा कि मौजूदा वित्त वर्ष में उन्हें वास्तव में कितने खर्च की जरूरत पड़ेगी और अगले वित्त वर्ष में अपने कामकाज व योजनाओं के लिए कितने बजट की आवश्यकता होगी।
12 अक्टूबर से शुरू होंगी प्री-बजट मीटिंग्स
बजट प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण प्री-बजट मीटिंग्स होंगी। इन बैठकों की शुरुआत 12 अक्टूबर 2026 से होने की उम्मीद है। इन बैठकों की अध्यक्षता एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी करेंगे।
इन बैठकों में अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों की ओर से रखी गई बजट मांगों पर चर्चा होगी। इसके बाद वित्त मंत्रालय उपलब्ध संसाधनों और सरकार की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए अगले वित्त वर्ष के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में बजट आवंटन तय करेगा।
सरकार ने विनिवेश से जुटाए ₹55,757 करोड़
बजट की तैयारियों के बीच सरकार के लिए राजस्व और गैर-कर आय जुटाना भी महत्वपूर्ण होगा। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर ₹55,757 करोड़ जुटाए हैं।
सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में विनिवेश के जरिए ₹80,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। इस लिहाज से अब तक सरकार अपने लक्ष्य का करीब 78 फीसदी हिस्सा हासिल कर चुकी है।
वित्त वर्ष 2026-27 के खत्म होने में अभी करीब सात महीने बाकी हैं। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि बाकी लक्ष्य को भी इस अवधि में पूरा किया जा सकता है।
आर्थिक चुनौतियों के बीच आएगा Budget 2027
अगले वित्त वर्ष का बजट ऐसे समय में पेश होगा, जब भारतीय अर्थव्यवस्था को घरेलू और वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, महंगाई, रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे मुद्दे सरकार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। खासकर क्रूड ऑयल की कीमत बढ़ने पर भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है तो इसका असर लोगों की खरीदारी क्षमता के साथ-साथ आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सरकार के सामने एक तरफ विकास को बढ़ावा देने और दूसरी तरफ महंगाई व राजकोषीय स्थिति को संभालने की चुनौती रहेगी।
रुपये की कमजोरी भी सरकार के लिए चुनौती
डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी भी बजट से पहले महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दा बनी हुई है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का असर भारतीय मुद्रा पर पड़ सकता है।
रुपये में कमजोरी का असर आयातित सामान और खासकर कच्चे तेल की लागत पर पड़ता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए रुपये और क्रूड की कीमतों का संयोजन महंगाई के लिए अहम हो जाता है।
यूपी विधानसभा चुनावों का भी दिख सकता है असर
1 फरवरी 2027 को बजट पेश होने के समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी नजदीक होंगे। उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और यहां होने वाले चुनावों का राजनीतिक महत्व काफी ज्यादा है।
ऐसे में बजट में आम लोगों, रोजगार, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यों से जुड़े मुद्दों पर सरकार का फोकस देखने को मिल सकता है। हालांकि बजट में किसी खास घोषणा को चुनाव से जोड़ना अभी सिर्फ अनुमान होगा।
सरकार का एक अहम लक्ष्य आर्थिक विकास को गति देना और देश में निवेश का माहौल बेहतर करना भी हो सकता है। इसके लिए विदेशी निवेश बढ़ाने, कारोबार आसान बनाने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने से जुड़े उपायों पर भी नजर रहेगी।
अब आगे क्या होगा?
बजट सर्कुलर जारी होने के बाद आने वाले महीनों में बजट तैयार करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी। मंत्रालय पहले अपनी जरूरतों का अनुमान प्रस्तुत करेंगे, जिसके बाद प्री-बजट बैठकों में इन मांगों पर चर्चा होगी।
इसके बाद वित्त मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों की मांग, सरकार के राजस्व अनुमान, आर्थिक परिस्थितियों और नीतिगत प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए बजट आवंटन को अंतिम रूप देगा।
Union Budget 2027 में आम जनता, कारोबारी वर्ग, निवेशकों और अलग-अलग सेक्टर के लिए सरकार की प्राथमिकताएं क्या रहेंगी, इसका स्पष्ट संकेत बजट पेश होने के समय ही मिलेगा। फिलहाल बजट सर्कुलर जारी होने के साथ ही इसकी औपचारिक तैयारी शुरू हो चुकी है।


