Market This Week: भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता कारोबारी सप्ताह उतार-चढ़ाव भरा रहा। सेंसेक्स और निफ्टी लगातार तीसरे सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। पिछले पांच महीनों में यह पहली बार है जब घरेलू बाजार में इतनी लंबी साप्ताहिक गिरावट देखने को मिली है। हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी तथा सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिनों में आई IT शेयरों की रिकवरी ने बाजार की गिरावट को सीमित रखने में मदद की।
वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी ने बाजार को बड़ा नुकसान होने से बचाया।
सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट?
बीते सप्ताह BSE सेंसेक्स 276.32 अंक यानी 0.35% गिरकर 77,264.51 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, Nifty 50 में 76.35 अंक यानी 0.21% की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,175.65 के स्तर पर बंद हुआ।
बड़ी कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। Nifty Midcap 100 Index करीब 0.5% की बढ़त के साथ बंद हुआ। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, ग्लेनमार्क फार्मा, LIC हाउसिंग फाइनेंस और लॉरस लैब्स जैसे शेयरों में तेजी ने इस इंडेक्स को सहारा दिया।
इसी तरह Nifty Smallcap 100 Index में भी करीब 0.5% की बढ़त देखने को मिली। कैप्री ग्लोबल कैपिटल, IDBI बैंक, IFCI और एथर एनर्जी के शेयरों में दो अंकों की तेजी ने स्मॉलकैप इंडेक्स को मजबूत किया।
किन सेक्टर्स में आई तेजी?
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो बाजार में तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। कुछ सेक्टर्स ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि कई इंडेक्स दबाव में रहे।
निफ्टी मेटल, IT, फार्मा और हेल्थकेयर इंडेक्स में 2% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। वहीं निफ्टी कैपिटल मार्केट्स इंडेक्स भी करीब 1.5% चढ़ा।
इसके उलट FMCG, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑयल एंड गैस इंडेक्स करीब 1% नीचे बंद हुए। निफ्टी ऑटो और डिफेंस इंडेक्स में भी लगभग 1% की गिरावट देखने को मिली।
BSE की कंपनियों का मार्केट कैप कितना घटा?
शेयर बाजार में गिरावट का असर BSE पर लिस्टेड कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी पड़ा। सप्ताह के दौरान BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपये से कुछ अधिक घट गया।
बड़ी कंपनियों में गिरावट के कारण बाजार की कुल वैल्यू पर दबाव पड़ा। मार्केट कैप में सबसे ज्यादा कमी रिलायंस इंडस्ट्रीज की वजह से आई। इसके बाद भारती एयरटेल, HDFC बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा का स्थान रहा।
हालांकि, कुछ कंपनियों ने इस नुकसान की भरपाई करने में मदद की। कोटक महिंद्रा बैंक, TCS और इंफोसिस इस सप्ताह सबसे ज्यादा वेल्थ क्रिएट करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल रहीं।
FIIs की बिकवाली जारी
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। Foreign Institutional Investors (FIIs) लगातार दूसरे सप्ताह नेट सेलर रहे। इस सप्ताह उन्होंने भारतीय इक्विटी बाजार में करीब 20,260 करोड़ रुपये की बिकवाली की।
इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने बाजार को लगातार सपोर्ट दिया। DIIs ने सप्ताह के दौरान भारतीय इक्विटी में करीब 19,309.93 करोड़ रुपये का निवेश किया।
इस तरह विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के सामने घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने बाजार में गिरावट को कुछ हद तक सीमित रखा।
रुपये ने दो हफ्तों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा
शेयर बाजार के अलावा करेंसी मार्केट में भी सप्ताह के दौरान हलचल देखने को मिली। छुट्टियों के कारण कारोबारी सप्ताह छोटा रहा, लेकिन इस दौरान भारतीय रुपये ने लगातार दो सप्ताह से चली आ रही गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 32 पैसे मजबूत होकर 95.38 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। इससे पहले 21 अगस्त को रुपया 95.70 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
पूरे सप्ताह घरेलू करेंसी ने 95.32 से 95.75 रुपये प्रति डॉलर के दायरे में कारोबार किया। ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव और करेंसी मार्केट में जारी हलचल के बावजूद सप्ताह के अंत में रुपये को मजबूती मिली।
आगे बाजार के लिए क्या मायने रखता है?
आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में कई घरेलू और वैश्विक फैक्टर अहम भूमिका निभाएंगे। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकती हैं।
इसके साथ ही घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी और मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में बनी मजबूती बाजार को सपोर्ट दे सकती है। IT और अन्य चुनिंदा सेक्टर्स में रिकवरी भी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है।
कुल मिलाकर, लगातार तीसरे सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी के लाल निशान में बंद होने के बावजूद बाजार में पूरी तरह निराशाजनक तस्वीर नहीं है। बड़े शेयरों पर दबाव के बीच मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी तथा घरेलू निवेशकों का मजबूत समर्थन बाजार की अगली दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।


