BSE History: आज मुंबई की दलाल स्ट्रीट का नाम सामने आते ही शेयर बाजार, करोड़ों-अरबों रुपये के कारोबार और अत्याधुनिक ट्रेडिंग सिस्टम की तस्वीर सामने आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज का सफर कभी एक पेड़ के नीचे से शुरू हुआ था? करीब 171 साल पहले 22 स्टॉकब्रोकर्स ने मुंबई में जिस अनौपचारिक शेयर कारोबार की शुरुआत की थी, वही आगे चलकर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE बना।
आज BSE भारतीय पूंजी बाजार की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में शामिल है। हालांकि, यहां तक पहुंचने का इसका सफर आसान नहीं रहा। पेड़ के नीचे होने वाली बैठकों से लेकर दलाल स्ट्रीट, कागजी शेयरों से इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग और पारंपरिक एक्सचेंज से आधुनिक फिनटेक प्लेटफॉर्म बनने तक BSE ने कई बड़े बदलाव देखे हैं।
पेड़ के नीचे 22 ब्रोकर्स ने रखी थी नींव
BSE के इतिहास की शुरुआत 1850 के दशक में मुंबई से होती है। उस समय शेयर बाजार के लिए न तो कोई बड़ी इमारत थी और न ही आज जैसी इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग व्यवस्था।
मुंबई के टाउन हॉल के आसपास एक पेड़ के नीचे कुछ स्टॉकब्रोकर्स नियमित रूप से इकट्ठा होते थे और शेयरों की खरीद-बिक्री करते थे। धीरे-धीरे इस समूह का आकार बढ़ने लगा और करीब 22 स्टॉकब्रोकर्स इस गतिविधि का हिस्सा बन गए।
यही छोटा-सा समूह आगे चलकर भारत के संगठित शेयर बाजार की नींव बना। उस दौर में कारोबार पूरी तरह आमने-सामने और मैनुअल तरीके से होता था। कीमतों की जानकारी, सौदों की बातचीत और लेनदेन की प्रक्रिया आज की तरह कुछ सेकंड में पूरी नहीं होती थी।
जगह बदलते-बदलते पहुंचा दलाल स्ट्रीट
जैसे-जैसे शेयर कारोबार बढ़ता गया, शुरुआती जगह छोटी पड़ने लगी। ब्रोकर्स ने कई स्थान बदले और आखिरकार 1874 में शेयर बाजार दलाल स्ट्रीट पहुंचा।
दलाल स्ट्रीट का नाम भी इसी शेयर बाजार और वहां सक्रिय रहने वाले दलालों से जुड़ा माना जाता है। समय के साथ यह इलाका भारतीय वित्तीय बाजार की पहचान बन गया।
इसके ठीक अगले साल, 1875 में Native Share & Stock Brokers Association का गठन हुआ। यह संगठन आगे चलकर BSE के संस्थागत विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बना।
1957 में मिली आधिकारिक मान्यता
शेयर बाजार के विकास के साथ इसे औपचारिक नियमन और सरकारी मान्यता की जरूरत महसूस हुई।
31 अगस्त 1957 को भारत सरकार ने इसे Securities Contracts (Regulation) Act, 1956 के तहत आधिकारिक स्टॉक एक्सचेंज के रूप में मान्यता दी। इसके साथ भारतीय शेयर बाजार के संस्थागत ढांचे में BSE की भूमिका और मजबूत हो गई।
बाद के वर्षों में BSE की पहचान मुंबई की उस ऐतिहासिक इमारत से भी जुड़ी, जिसे आज फिरोज जीजीभॉय टावर्स के नाम से जाना जाता है। दलाल स्ट्रीट स्थित यह इमारत भारतीय शेयर बाजार की सबसे पहचानी जाने वाली तस्वीरों में शामिल है।
कागज से कंप्यूटर और फिर हाई-स्पीड ट्रेडिंग तक
BSE का शुरुआती कारोबार पूरी तरह पारंपरिक तरीके से चलता था। निवेशकों और ब्रोकर्स के बीच आमने-सामने सौदे होते थे और शेयर सर्टिफिकेट कागजों के रूप में मौजूद रहते थे।
लेकिन तकनीक ने धीरे-धीरे इस व्यवस्था को बदल दिया। इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग के आने के बाद शेयर खरीदने-बेचने की प्रक्रिया पहले से कहीं तेज हो गई।
यही वह दौर था जब BSE को अपनी तकनीकी क्षमता और बाजार की बदलती जरूरतों के साथ कदम मिलाना पड़ा। एक्सचेंज ने ट्रेडिंग सिस्टम, डेटा, कनेक्टिविटी और डिजिटल सेवाओं पर लगातार काम किया।
2012 के बाद तेज हुआ बदलाव
BSE के इतिहास में 2012 के बाद का दौर खास महत्व रखता है। नए प्रबंधन के आने के बाद एक्सचेंज को आधुनिक और तकनीक आधारित संस्था के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया।
उद्देश्य सिर्फ पुराने स्टॉक एक्सचेंज को चलाना नहीं था, बल्कि इसे एक आधुनिक वित्तीय और तकनीकी प्लेटफॉर्म में बदलना था।
इस दौरान ट्रेडिंग टेक्नोलॉजी, बाजार की पारदर्शिता, डिजिटल सेवाओं और नए वित्तीय उत्पादों पर जोर बढ़ा। इससे BSE ने खुद को बदलते भारतीय पूंजी बाजार के अनुरूप ढालने की कोशिश की।
माइक्रोसेकंड में प्रतिक्रिया देने वाला एक्सचेंज
तकनीकी बदलावों का असर ट्रेडिंग की रफ्तार पर भी पड़ा। BSE ने अपनी ट्रेडिंग तकनीक को इस स्तर तक विकसित किया कि इसका प्रतिक्रिया समय माइक्रोसेकंड के स्तर तक पहुंच गया।
यानी जिस एक्सचेंज में कभी ब्रोकर्स पेड़ के नीचे बैठकर आमने-सामने सौदे करते थे, वही संस्था आधुनिक दौर में बेहद कम समय में इलेक्ट्रॉनिक ऑर्डर प्रोसेस करने वाली तकनीकी व्यवस्था का हिस्सा बन गई।
यह बदलाव BSE की 171 साल से ज्यादा लंबी यात्रा में सबसे बड़े परिवर्तन में से एक माना जा सकता है।
2017 में BSE का IPO आया
BSE के आधुनिकीकरण की यात्रा में 2017 भी एक ऐतिहासिक साल रहा। एक्सचेंज ने अपना Initial Public Offering यानी IPO पेश किया।
जनवरी 2017 में आए इस IPO को निवेशकों की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। इसे करीब 51 गुना सब्सक्रिप्शन मिला और लाखों निवेशकों ने इसमें हिस्सा लिया।
इसके साथ BSE खुद भी शेयर बाजार में एक सूचीबद्ध कंपनी बन गया। यह एक तरह से उस संस्था के सफर का दिलचस्प पड़ाव था, जिसने दशकों तक दूसरी कंपनियों को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होते देखा था।
BSE सिर्फ शेयरों तक सीमित नहीं रहा
समय के साथ BSE ने अपनी सेवाओं का विस्तार इक्विटी ट्रेडिंग से आगे किया। एक्सचेंज ने छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए BSE SME प्लेटफॉर्म शुरू किया।
इस प्लेटफॉर्म ने छोटी और मध्यम कंपनियों को पूंजी बाजार तक पहुंच बनाने में मदद की। इससे उन कारोबारों के लिए भी फंड जुटाने का रास्ता खुला, जिनके लिए मुख्य बोर्ड पर लिस्टिंग करना अपेक्षाकृत कठिन हो सकता था।
इसी तरह BSE StAR MF के जरिए म्यूचुअल फंड लेनदेन और डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में भी BSE की भूमिका बढ़ी।
GIFT City में India INX की शुरुआत
BSE के विस्तार की कहानी सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं रही। 9 जनवरी 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात की GIFT City में India International Exchange (India INX) का उद्घाटन किया।
India INX, BSE की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है और इसका उद्देश्य भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर की एक्सचेंज सेवाओं को बढ़ावा देना है।
इस तरह BSE ने पारंपरिक घरेलू शेयर बाजार से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
आज BSE कितना बड़ा है?
आज BSE पर हजारों कंपनियां सूचीबद्ध हैं और यह भारतीय पूंजी बाजार के प्रमुख संस्थानों में शामिल है। इसके प्लेटफॉर्म पर इक्विटी के अलावा SME, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी डेरिवेटिव्स और अन्य वित्तीय उत्पादों से जुड़ी सेवाएं भी उपलब्ध हैं।
BSE का प्रमुख सूचकांक SENSEX भारतीय शेयर बाजार की दिशा बताने वाले सबसे चर्चित बेंचमार्क इंडेक्स में से एक है। दुनिया भर के निवेशक भारतीय बाजार की स्थिति समझने के लिए SENSEX पर नजर रखते हैं।
बरगद के पेड़ से हाई-टेक एक्सचेंज तक
BSE की कहानी सिर्फ एक स्टॉक एक्सचेंज के विकास की कहानी नहीं है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था और पूंजी बाजार में आए बदलावों की भी कहानी है।
एक समय 22 ब्रोकर्स पेड़ के नीचे बैठकर शेयरों के सौदे किया करते थे। फिर एक संगठन बना, बाजार दलाल स्ट्रीट पहुंचा, सरकार से आधिकारिक मान्यता मिली, कागजी शेयरों की जगह इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम आया और अंततः ट्रेडिंग माइक्रोसेकंड की रफ्तार तक पहुंच गई।
बरगद के पेड़ के नीचे शुरू हुआ BSE का सफर आज आधुनिक वित्तीय तकनीक और डिजिटल बाजार के दौर तक पहुंच चुका है। यही बदलाव इसे सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण स्टॉक एक्सचेंजों में एक खास स्थान देता है।


