Happiest Minds के शेयरों में 27 अगस्त को जोरदार गिरावट देखने को मिली। CNBC-Awaaz की रिपोर्ट के मुताबिक, ITC Infotech कंपनी के प्रमोटर की हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी में है। इस खबर के सामने आने के बाद निवेशकों की बिकवाली बढ़ी और शेयर दबाव में आ गया। Happiest Minds का शेयर 27 अगस्त को 6.26 फीसदी की गिरावट के साथ ₹419.80 पर बंद हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार, ITC Infotech करीब 22 फीसदी हिस्सेदारी सीधे तौर पर खरीद सकती है। इस डील के लिए प्रति शेयर ₹390-400 की कीमत पर बातचीत होने की खबर है। बाजार भाव की तुलना में संभावित डील प्राइस कम होने के कारण भी शेयर में दबाव देखने को मिला।
अगले हफ्ते बोर्ड दे सकता है डील को मंजूरी
CNBC-Awaaz की रिपोर्ट के मुताबिक, Happiest Minds और ITC Infotech से जुड़ी इस संभावित डील को अगले हफ्ते बोर्ड की मंजूरी मिल सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डील पूरी होने के बाद Happiest Minds को शेयर बाजार से डीलिस्ट किए जाने की संभावना हो सकती है।
हालांकि, इन खबरों के बीच निवेशकों के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि अंतिम डील की शर्तें और बोर्ड की मंजूरी आधिकारिक घोषणाओं के बाद ही स्पष्ट होंगी।
प्रमोटर की 44% हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी
रिपोर्ट के मुताबिक, Happiest Minds में प्रमोटर की कुल हिस्सेदारी करीब 44 फीसदी है। इसमें से लगभग 22 फीसदी हिस्सेदारी ITC Infotech सीधे खरीद सकती है। बाकी 22 फीसदी हिस्सेदारी के लिए ITC Infotech अपने शेयरों की पेशकश कर सकती है।
अगर ट्रांजैक्शन इस संरचना में आगे बढ़ता है, तो नियामकीय नियमों के तहत ITC Infotech को Happiest Minds के सार्वजनिक शेयरधारकों के लिए ओपन ऑफर भी लाना पड़ सकता है।
Ashok Soota की Happiest Minds में बड़ी हिस्सेदारी
स्टॉक एक्सचेंज पर उपलब्ध शेयरहोल्डिंग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, Happiest Minds के फाउंडर और एग्जिक्यूटिव चेयरमैन Ashok Soota की कंपनी में सीधे तौर पर 32 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है। इसके अलावा दूसरे प्रमोटर होल्डिंग्स के जरिए भी उनकी हिस्सेदारी 40 फीसदी से ज्यादा बताई गई है।
Ashok Soota Medical Research LLP के पास भी Happiest Minds में करीब 11.8 फीसदी हिस्सेदारी है। इसलिए प्रस्तावित डील में प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
ITC Infotech के लिए क्यों अहम है यह डील?
अगर ITC Infotech Happiest Minds में हिस्सेदारी खरीदती है, तो इससे कंपनी को डिजिटल इंजीनियरिंग और AI आधारित टेक्नोलॉजी सर्विसेज में अपनी मौजूदगी मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
Happiest Minds का कारोबार क्लाउड, डेटा, साइबर सिक्योरिटी, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और डिजिटल इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों से जुड़ा है। ऐसे में हिस्सेदारी खरीदने से ITC Infotech को तेजी से बढ़ते टेक्नोलॉजी सेगमेंट में अपना पोर्टफोलियो विस्तार करने का मौका मिल सकता है।
यह डील ITC Infotech की रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है, क्योंकि कंपनी पहले से ही टेक्नोलॉजी और क्लाउड सर्विसेज कारोबार को बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।
ITC Infotech खुद हो सकती है लिस्ट
CNBC-Awaaz की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ITC Infotech भविष्य में खुद को शेयर बाजार में लिस्ट करा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो Happiest Minds में संभावित हिस्सेदारी खरीद और ITC Infotech की संभावित लिस्टिंग दोनों घटनाएं निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
इससे पहले जुलाई में Moneycontrol ने भी रिपोर्ट किया था कि ITC Infotech Happiest Minds में हिस्सेदारी खरीदने की दौड़ में आगे चल रही है।
27 अगस्त को 6.26% गिरा Happiest Minds का शेयर
डील की खबर के बाद Happiest Minds के शेयर में तेज बिकवाली देखने को मिली। 27 अगस्त को शेयर 6.26 फीसदी गिरकर ₹419.80 पर बंद हुआ।
हालांकि, लंबी अवधि के प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिछले एक साल में Happiest Minds के शेयर में करीब 26 फीसदी की तेजी रही है। इसलिए मौजूदा गिरावट को केवल एक कारोबारी दिन के प्रदर्शन के आधार पर देखना उचित नहीं होगा। संभावित अधिग्रहण, डील की कीमत और आगे आने वाली आधिकारिक घोषणाएं शेयर की दिशा के लिए अहम रहेंगी।
2011 में हुई थी Happiest Minds की शुरुआत
Happiest Minds की स्थापना 2011 में Ashok Soota ने की थी। कंपनी का मुख्यालय बेंगलुरु में है और यह डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी, डेटा और AI से जुड़े टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है।
वहीं, ITC Infotech ने अक्टूबर 2024 में क्लाउड सर्विसेज कंपनी Blazeclan Technologies का अधिग्रहण करीब ₹485 करोड़ में किया था। ऐसे में Happiest Minds में संभावित हिस्सेदारी खरीद को ITC Infotech की टेक्नोलॉजी और डिजिटल सर्विसेज रणनीति को आगे बढ़ाने वाले बड़े कदम के तौर पर देखा जा सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
Happiest Minds के शेयर में गिरावट मुख्य रूप से संभावित डील की कीमत और कंपनी के भविष्य के स्वामित्व से जुड़ी खबरों के बाद आई है। फिलहाल निवेशकों को बोर्ड की मंजूरी, डील की आधिकारिक शर्तों, ओपन ऑफर और संभावित डीलिस्टिंग से जुड़ी जानकारी का इंतजार करना चाहिए।
जब तक कंपनी या संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक जानकारी नहीं आती, तब तक केवल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर निवेश का फैसला लेने से बचना बेहतर है।


