Nepal Stock Market: नेपाल के रसुवा क्षेत्र में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड का असर अब वहां के शेयर बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आए तेज उफान से हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स, बैंक शाखाओं, सीमा शुल्क केंद्रों और कई व्यावसायिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस आपदा के बाद कंपनियों को होने वाले संभावित वित्तीय नुकसान और बढ़ने वाले इंश्योरेंस क्लेम को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
इसका सीधा असर नेपाल स्टॉक एक्सचेंज यानी NEPSE पर देखने को मिला। कारोबार के दौरान बेंचमार्क इंडेक्स करीब 35.92 अंक टूटकर 2,550 के आसपास पहुंच गया। सबसे ज्यादा दबाव हाइड्रोपावर और नॉन-लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिला।
हाइड्रोपावर शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली
रसुवा क्षेत्र में बाढ़ से बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की खबरों के बाद हाइड्रोपावर कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई। कारोबार के दौरान हाइड्रोपावर सब-इंडेक्स 104 अंक यानी करीब 2.84 फीसदी गिर गया।
निवेशकों को डर है कि अगर बिजली परियोजनाओं को लंबे समय तक नुकसान रहता है, तो कंपनियों के बिजली उत्पादन, राजस्व और नकदी प्रवाह पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा निर्माणाधीन परियोजनाओं में देरी की स्थिति में कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है।
13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स प्रभावित
नेपाल इंश्योरेंस अथॉरिटी के मुताबिक बाढ़ से करीब 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। इन परियोजनाओं में चालू और निर्माणाधीन दोनों तरह के प्रोजेक्ट शामिल हैं।
प्रभावित परियोजनाओं की कुल क्षमता करीब 748 MW बताई जा रही है। इसमें लगभग 354 MW क्षमता वाले चालू प्रोजेक्ट्स और 394 MW क्षमता वाले निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।
इस नुकसान का असर केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। परियोजनाओं को दोबारा चालू करने, उपकरणों की मरम्मत और बुनियादी ढांचे को बहाल करने में समय और बड़ी रकम लग सकती है।
कौन-कौन सी कंपनियां प्रभावित हुईं?
बाढ़ से प्रभावित परियोजनाओं में कई ऐसी कंपनियां भी शामिल हैं जिनके शेयर नेपाल के शेयर बाजार में लिस्टेड हैं। इनमें अपर त्रिशूली-1, रसुवागढ़ी, रसुवा भोटेकोशी, अपर मैलुंग ‘ए’, संजेन खोला, लंगटांग खोला और चिलिमे हाइड्रोपावर जैसी परियोजनाओं के नाम सामने आए हैं।
इन कंपनियों के लिए आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि बाढ़ से वास्तविक नुकसान कितना हुआ है और परियोजनाओं को दोबारा सामान्य स्थिति में लाने में कितना समय लगता है।
इंश्योरेंस शेयरों पर भी दबाव
हाइड्रोपावर कंपनियों के बाद बीमा क्षेत्र के शेयरों में भी तेज गिरावट देखने को मिली। बाढ़ से संपत्तियों और बिजली परियोजनाओं को हुए नुकसान के कारण इंश्योरेंस कंपनियों के सामने बड़े क्लेम आने की आशंका है।
इसी चिंता के चलते नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सब-इंडेक्स करीब 404 अंक यानी 3.90 फीसदी तक गिर गया।
निवेशकों की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि नेपाल की नॉन-लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां पहले से ही मुनाफे के दबाव का सामना कर रही थीं। वित्त वर्ष 2082-83 में प्रभु को छोड़कर लगभग सभी कंपनियों के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसे में प्राकृतिक आपदा से जुड़े बड़े क्लेम आने पर कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
री-इंश्योरेंस से मिल सकती है कंपनियों को राहत
हालांकि इंश्योरेंस कंपनियों पर पड़ने वाला पूरा नुकसान उनके ऊपर नहीं आएगा। री-इंश्योरेंस व्यवस्था के कारण जोखिम का एक बड़ा हिस्सा दूसरी बीमा कंपनियों के पास ट्रांसफर किया जाता है।
नेपाल इंश्योरेंस अथॉरिटी के अनुसार, निर्माणाधीन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में आमतौर पर इंजीनियरिंग इंश्योरेंस होता है। इसके तहत करीब 80 फीसदी जोखिम री-इंश्योरर्स को ट्रांसफर किए जाने की व्यवस्था होती है।
वहीं, चालू परियोजनाओं के लिए आमतौर पर प्रॉपर्टी इंश्योरेंस लिया जाता है। इसमें मूल बीमा कंपनी करीब 50 फीसदी तक जोखिम अपने पास रख सकती है और बाकी जोखिम री-इंश्योरेंस कंपनियों को ट्रांसफर किया जाता है।
घरेलू प्रॉपर्टी री-इंश्योरेंस के तहत ट्रांसफर की गई राशि का 30 फीसदी हिस्सा नेपाल की घरेलू री-इंश्योरेंस कंपनियों के पास रखना अनिवार्य होता है। इसलिए प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान का असर बीमा क्षेत्र की अलग-अलग कंपनियों पर अलग-अलग पड़ सकता है।
अभी असली नुकसान का आंकड़ा सामने आना बाकी
शेयर बाजार में आई मौजूदा गिरावट को फिलहाल वास्तविक नुकसान के अंतिम आंकड़ों के बजाय निवेशकों की आशंका और अनिश्चितता से जोड़कर देखा जा सकता है। जब तक प्रभावित परियोजनाओं का विस्तृत सर्वे नहीं होता और इंश्योरेंस क्लेम की वास्तविक राशि सामने नहीं आती, तब तक हाइड्रोपावर और बीमा कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
आने वाले दिनों में निवेशक मुख्य रूप से तीन चीजों पर नजर रखेंगे—प्रोजेक्ट्स को हुए वास्तविक नुकसान, बिजली उत्पादन बहाल होने में लगने वाला समय और इंश्योरेंस क्लेम का आकार।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
नेपाल के शेयर बाजार में प्राकृतिक आपदा का असर फिलहाल खास तौर पर हाइड्रोपावर और नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर पर दिखाई दे रहा है। हालांकि, किसी कंपनी के शेयर पर दीर्घकालिक असर का आकलन केवल एक दिन की गिरावट के आधार पर करना सही नहीं होगा।
अगर प्रभावित परियोजनाओं की मरम्मत तेजी से होती है और बीमा कवर के कारण कंपनियों का बड़ा वित्तीय नुकसान सीमित रहता है, तो मौजूदा दबाव धीरे-धीरे कम हो सकता है। इसके विपरीत, अगर परियोजनाओं को लंबे समय तक बंद रखना पड़ता है या क्लेम उम्मीद से काफी अधिक रहते हैं, तो कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर इसका असर लंबा खिंच सकता है।
नोट: शेयर बाजार में निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, बीमा कवरेज, परियोजना की स्थिति और आधिकारिक नुकसान के आंकड़ों का स्वतंत्र रूप से विश्लेषण करें। यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है, निवेश की सलाह नहीं।


