मां या पिता बनने के बाद जिंदगी में कई चीजें बदल जाती हैं। रोजमर्रा के फैसलों से लेकर करियर, परिवार और निजी जिंदगी तक, माता-पिता को कई बातों को नए नजरिए से देखना पड़ता है। बच्चे की जरूरतें कई बार उनकी प्राथमिकताओं को भी बदल देती हैं। ऐसे में सबसे जरूरी होता है कि माता-पिता दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने बच्चे और परिवार की जरूरतों को समझें।
एक्टर अनुष्का शर्मा ने भी मां बनने के बाद अपनी सोच में आए बदलावों के बारे में बात की है। उनका मानना है कि पैरेंट बनने के बाद उन्हें अपने फैसलों पर पहले से ज्यादा भरोसा हुआ और वह अपनी प्राथमिकताओं को लेकर अधिक कॉन्फिडेंट बनीं। परिवार और बच्चों के साथ समय बिताने के महत्व को समझते हुए उन्होंने काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन को भी अहम माना।
अनुष्का की बातों से पैरेंटिंग को लेकर कुछ ऐसी सीख मिलती हैं, जिन्हें माता-पिता अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अपना सकते हैं।

1. बच्चे की जरूरत को सबसे पहले समझें
पैरेंटिंग का कोई एक फॉर्मूला नहीं होता। हर बच्चा अलग होता है और उसकी जरूरतें भी अलग हो सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि माता-पिता सबसे पहले अपने बच्चे को समझने की कोशिश करें।
कभी बच्चे को ज्यादा समय और ध्यान की जरूरत हो सकती है, तो कभी उसे अपनी पसंद की चीजें खुद करने की आजादी चाहिए होती है। बच्चे के व्यवहार, उम्र और जरूरत के अनुसार फैसले लेने से माता-पिता और बच्चे के बीच बेहतर समझ विकसित हो सकती है।
दूसरे माता-पिता क्या कर रहे हैं, इसे देखकर अपने बच्चे के लिए उसी तरीके को अपनाना हमेशा सही नहीं होता। अपने बच्चे की जरूरत को समझकर लिया गया फैसला ज्यादा बेहतर हो सकता है।
2. करियर और बच्चों के बीच बैलेंस बनाएं
आज के समय में माता-पिता के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना है। खासकर कामकाजी माता-पिता के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे अपने करियर के साथ बच्चे को भी पर्याप्त समय दे सकें।
हालांकि, हर परिवार का बैलेंस अलग हो सकता है। किसी के लिए काम के घंटे कम करना सही फैसला हो सकता है, तो कोई अपने काम के शेड्यूल में बदलाव करके बच्चे के लिए समय निकाल सकता है।
इसलिए दूसरे लोगों की पैरेंटिंग या करियर के फैसलों से अपनी तुलना करने के बजाय यह देखना ज्यादा जरूरी है कि आपके परिवार के लिए क्या बेहतर काम कर रहा है।
3. अपने फैसलों पर भरोसा रखें
बच्चे की जिम्मेदारी आने के बाद माता-पिता को कई नए फैसले लेने पड़ते हैं। शुरुआत में यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि बच्चे के लिए क्या सही है। ऐसे समय में परिवार और दोस्तों की सलाह मददगार हो सकती है, लेकिन अंतिम फैसला बच्चे की जरूरत और अपनी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।
समय के साथ माता-पिता अपने अनुभव से बहुत कुछ सीखते हैं। हर छोटी-बड़ी स्थिति उन्हें यह समझने में मदद करती है कि उनके बच्चे के लिए कौन सा तरीका बेहतर है।
इसलिए हर फैसले के बाद खुद को गलत ठहराने या दूसरों की राय से प्रभावित होने के बजाय अपने अनुभव पर भी भरोसा करना जरूरी है। सोच-समझकर लिया गया फैसला आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है।
4. बच्चे के साथ खुद भी बदलते रहें
पैरेंटिंग में बदलाव लगातार होता रहता है। बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं, उनकी जरूरतें, पसंद और व्यवहार भी बदल सकते हैं। ऐसे में जो तरीका कुछ साल पहले काम कर रहा था, जरूरी नहीं कि वह आज भी उतना ही प्रभावी हो।
माता-पिता को बच्चे की उम्र और परिस्थितियों के अनुसार अपने तरीके में बदलाव करने के लिए तैयार रहना चाहिए। कभी बच्चे को ज्यादा निगरानी की जरूरत होती है, तो समय के साथ उसे अधिक स्वतंत्रता देना जरूरी हो सकता है।
बच्चे के साथ खुद भी सीखते और बदलते रहना अच्छी पैरेंटिंग का अहम हिस्सा है।
दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने बच्चे को समझें
अनुष्का शर्मा की बातों से यह समझा जा सकता है कि पैरेंटिंग में हर परिवार का तरीका अलग हो सकता है। जरूरी नहीं कि जो तरीका किसी दूसरे परिवार के लिए सही है, वह आपके बच्चे के लिए भी उतना ही बेहतर साबित हो।
माता-पिता के लिए सबसे जरूरी है कि वे बच्चे की जरूरतों को समझें, अपने फैसलों पर भरोसा रखें और जरूरत पड़ने पर अपनी सोच में बदलाव करें। बच्चे की परवरिश के साथ-साथ माता-पिता भी हर दिन कुछ नया सीखते हैं। यही समझ पैरेंटिंग को बेहतर और सहज बनाने में मदद कर सकती है।


