Toxic Review: यश की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘टॉक्सिक’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म में जबरदस्त एक्शन, गैंगस्टर ड्रामा, परिवार और रिश्तों की कहानी देखने को मिलती है। अगर आप भी फिल्म देखने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो पहले यह रिव्यू पढ़ लें।
फिल्म: टॉक्सिक
निर्देशक: गीतू मोहनदास
कलाकार: यश, कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत
रेटिंग: 4/5
यश के फैंस के लिए खास है ‘टॉक्सिक’
यश की फिल्म का इंतजार फैंस लंबे समय से कर रहे थे और अब ‘टॉक्सिक’ के साथ यह इंतजार खत्म हो गया है। फिल्म की शुरुआत से ही साफ हो जाता है कि यह सिर्फ एक सामान्य गैंगस्टर फिल्म नहीं है। इसमें एक्शन और स्टाइल के साथ परिवार, रिश्ते, भरोसा और भावनाओं को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है।
निर्देशक गीतू मोहनदास ने फिल्म के लिए एक अलग तरह की दुनिया तैयार की है। यही वजह है कि ‘टॉक्सिक’ कई जगह पारंपरिक गैंगस्टर फिल्मों से अलग महसूस होती है। बड़े पर्दे पर फिल्म के विजुअल्स और एक्शन सीक्वेंस इसका प्रभाव और बढ़ाते हैं।
ताकत और परिवार के बीच बुनी गई कहानी
‘टॉक्सिक’ की कहानी दर्शकों को ऐसी दुनिया में ले जाती है, जहां ताकत के साथ परिवार की भी अपनी अहमियत है। यहां हर किरदार के पीछे कोई न कोई कहानी है और रिश्तों के साथ अलग तरह के संघर्ष जुड़े हुए हैं।
फिल्म को सिर्फ बंदूक, अपराध और मारधाड़ तक सीमित नहीं रखा गया है। कहानी में रिश्तों और भावनाओं के लिए भी पर्याप्त जगह है। अपराध की दुनिया के बीच प्यार, भरोसा और वफादारी जैसे पहलू फिल्म को एक भावनात्मक परत देते हैं।
यश हैं फिल्म की सबसे बड़ी ताकत
फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी यश हैं। वह राया और उसके बेटे टिकट के दो अलग-अलग किरदारों में नजर आते हैं। दोनों किरदारों का अंदाज एक-दूसरे से अलग है और यश इस अंतर को पर्दे पर प्रभावी तरीके से पेश करते हैं।
उनकी एंट्री, लुक, संवाद अदायगी और एक्शन सीक्वेंस फिल्म के सबसे बड़े आकर्षणों में शामिल हैं। पर्दे पर यश की मौजूदगी आते ही फिल्म की ऊर्जा बढ़ जाती है। खास बात यह है कि उन्होंने सिर्फ एक्शन पर निर्भर रहने के बजाय अपने किरदार के भावनात्मक पक्ष को भी जगह दी है।
यश का स्वैग उनके फैंस को खास तौर पर पसंद आ सकता है। उनके कई सीक्वेंस ऐसे हैं, जिन पर थिएटर में तालियां और सीटियां बजने की पूरी संभावना है।
नयनतारा और बाकी कलाकारों का काम कैसा है?
फिल्म में नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत अहम भूमिकाओं में नजर आती हैं। इन सभी किरदारों को कहानी में अपनी जगह दी गई है।
नयनतारा का किरदार खास तौर पर फिल्म के पारिवारिक पक्ष को मजबूत करता है। वहीं दूसरे किरदार कहानी में चल रहे ताकत के संघर्ष और घटनाओं को आगे बढ़ाते हैं। अच्छी बात यह है कि महिला किरदार केवल नायक के आसपास घूमते हुए नजर नहीं आते, बल्कि कहानी पर उनका भी असर दिखाई देता है।
शानदार विजुअल्स और बड़े स्तर का एक्शन
‘टॉक्सिक’ का विजुअल ट्रीटमेंट इसकी प्रमुख खूबियों में से एक है। फिल्म के सेट, कॉस्ट्यूम, लाइटिंग और कैमरा वर्क मिलकर एक अलग माहौल तैयार करते हैं।
एक्शन सीक्वेंस भी बड़े स्तर पर फिल्माए गए हैं। यश की बॉडी लैंग्वेज और स्क्रीन प्रेजेंस इन दृश्यों को और प्रभावशाली बनाती है। अगर आपको बड़े पर्दे पर हाई-ऑक्टेन एक्शन और स्टाइलिश सीक्वेंस देखना पसंद है, तो फिल्म का यह हिस्सा आपको निराश नहीं करेगा।
परिवार और भावनाओं का भी रखा गया ध्यान
‘टॉक्सिक’ को केवल एक एक्शन फिल्म मानना सही नहीं होगा। कहानी में परिवार और रिश्तों की भूमिका काफी अहम है। अपराध की दुनिया में रहते हुए किरदारों के सामने भरोसे, प्यार और वफादारी से जुड़े सवाल भी आते हैं।
यश के किरदार का भावनात्मक पक्ष फिल्म को सिर्फ एक्शन शो बनने से रोकता है। यही पहलू कहानी को कुछ जगहों पर ज्यादा दिलचस्प बनाता है और दर्शकों को किरदारों से जोड़ने की कोशिश करता है।
3 घंटे 14 मिनट का रनटाइम बनता है कमजोरी
फिल्म की सबसे बड़ी कमियों में इसका लंबा रनटाइम शामिल है। 3 घंटे 14 मिनट की अवधि कुछ दर्शकों के लिए भारी पड़ सकती है।
कई हिस्सों में कहानी की गति थोड़ी धीमी महसूस होती है। कुछ दृश्यों को छोटा किया जा सकता था, जिससे फिल्म की रफ्तार और बेहतर रहती। कई जगह निर्देशक फिल्म की दुनिया और माहौल को स्थापित करने में ज्यादा समय लेते हैं, जिसका असर पेसिंग पर पड़ता है।
अगर एडिटिंग थोड़ी ज्यादा कसी हुई होती और कुछ लंबे हिस्सों को हटाया जाता, तो फिल्म का प्रभाव और मजबूत हो सकता था।
गीतू मोहनदास की अलग कोशिश
गीतू मोहनदास ने ‘टॉक्सिक’ को एक सामान्य गैंगस्टर फिल्म की तरह पेश करने के बजाय अपनी अलग दुनिया बनाने की कोशिश की है। फिल्म हर हिस्से में एक जैसी प्रभावी नहीं है, लेकिन इसमें कुछ अलग करने की कोशिश स्पष्ट दिखाई देती है।
फिल्म का स्टाइल, विजुअल्स और किरदारों को पेश करने का तरीका इसे दूसरी गैंगस्टर फिल्मों से अलग पहचान देता है। हालांकि यही अलग अंदाज कुछ दर्शकों को पसंद आ सकता है और कुछ को कहानी की गति थोड़ी धीमी लग सकती है।
Toxic Review: देखें या नहीं?
कुल मिलाकर ‘टॉक्सिक’ एक बड़े पर्दे की एंटरटेनमेंट फिल्म है, जिसमें यश का दमदार स्वैग, शानदार एक्शन, गैंगस्टर ड्रामा और परिवार की कहानी साथ-साथ चलती है।
फिल्म का रनटाइम लंबा है और कुछ हिस्सों में पेसिंग कमजोर पड़ती है, लेकिन यश की स्क्रीन प्रेजेंस, विजुअल ट्रीटमेंट और एक्शन सीक्वेंस इसकी कमियों को काफी हद तक संभाल लेते हैं।
अगर आप यश के फैन हैं, एक्शन फिल्मों के शौकीन हैं और बड़े पर्दे पर स्टाइलिश गैंगस्टर ड्रामा देखना पसंद करते हैं, तो ‘टॉक्सिक’ आपके लिए एक अच्छी सिनेमाई ट्रीट साबित हो सकती है।
हमारी रेटिंग: 4/5


