AI से काम तो तेजी से हो रहा है, लेकिन बिना जांचे तैयार किया गया कंटेंट अब सहकर्मियों के लिए नया सिरदर्द बन रहा है। ‘वर्कस्लॉप’ नाम के इस ट्रेंड में काम ऊपर से शानदार दिखता है, लेकिन उसकी गलतियां सुधारने की जिम्मेदारी किसी दूसरे कर्मचारी पर आ जाती है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल तेजी से ऑफिस के कामकाज का हिस्सा बन रहा है। ईमेल लिखने से लेकर रिपोर्ट तैयार करने, डेटा का विश्लेषण करने और प्रेजेंटेशन बनाने तक, कर्मचारी AI की मदद से घंटों का काम कुछ ही मिनटों में पूरा कर रहे हैं। लेकिन AI से मिलने वाली इस तेजी का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है, जिसने ऑफिस में कर्मचारियों की परेशानी बढ़ा दी है।
कल्पना कीजिए कि सोमवार की व्यस्त सुबह आपके इनबॉक्स में किसी सहकर्मी का प्रोजेक्ट मेल आता है। पहली नजर में मेल बेहद शानदार दिखाई देता है। भाषा प्रोफेशनल है, जानकारी व्यवस्थित है और रिपोर्ट बिल्कुल तैयार नजर आती है। लेकिन जैसे-जैसे आप उसे पढ़ते हैं, उसकी कमियां सामने आने लगती हैं।
कहीं आंकड़े गलत हैं, कहीं जानकारी अधूरी है और कई जगह जरूरी संदर्भ गायब हैं। कुछ दावे ऐसे हैं, जिन्हें दोबारा जांचना जरूरी है। तब पता चलता है कि दस्तावेज AI की मदद से तैयार किया गया है, लेकिन उसे भेजने से पहले पर्याप्त तरीके से जांचा नहीं गया।
यहीं से शुरू होती है असली परेशानी। जिस कर्मचारी ने AI की मदद से अपना समय बचाया, उसके काम की कमियों को सुधारने में किसी दूसरे कर्मचारी का समय खर्च हो जाता है। इसी तरह के अधूरे लेकिन ऊपर से चमकदार AI-निर्मित काम को अब ‘वर्कस्लॉप’ (Workslop) कहा जा रहा है।
AI ने काम आसान किया या जिम्मेदारी किसी और पर डाल दी?
‘वर्कस्लॉप’ का इस्तेमाल ऐसे AI-जनरेटेड काम के लिए किया जाता है, जो देखने में पेशेवर और पूरा दिखाई देता है, लेकिन वास्तव में उसे उपयोगी बनाने के लिए दूसरे व्यक्ति को काफी मानसिक मेहनत करनी पड़ती है।
मसलन, किसी कर्मचारी ने AI से एक रिपोर्ट तैयार कर ली। उसने कुछ ही मिनटों में ऐसा दस्तावेज तैयार कर लिया, जिसे सामान्य स्थिति में बनाने में काफी समय लगता। लेकिन रिपोर्ट में तथ्य गलत हैं, आंकड़ों का संदर्भ नहीं है और कुछ हिस्से जरूरत के मुताबिक नहीं हैं।
अब रिपोर्ट प्राप्त करने वाले कर्मचारी को उसे दोबारा पढ़ना, तथ्य जांचना, गलत जानकारी हटाना और कई हिस्सों को फिर से तैयार करना पड़ता है। यानी AI का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति का समय तो बच गया, लेकिन वास्तविक काम का बोझ टीम के किसी दूसरे सदस्य पर चला गया।
सर्वे में भी सामने आई बड़ी समस्या
वर्कस्लॉप की समस्या केवल एक-दो कर्मचारियों के अनुभव तक सीमित नहीं है। हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू से जुड़े शोध में अलग-अलग क्षेत्रों के 1,150 अमेरिकी कर्मचारियों के अनुभवों को देखा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, 41 प्रतिशत कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें ऐसा AI-निर्मित काम मिला, जिसने उनके अपने काम को प्रभावित किया। वहीं आधे से अधिक कर्मचारियों ने माना कि उन्होंने भी कभी न कभी AI की मदद से तैयार किया गया काम अपने सहकर्मियों को भेजा है।
करीब 10 प्रतिशत कर्मचारियों ने यह भी स्वीकार किया कि उनके द्वारा सहकर्मियों को भेजे गए AI-निर्मित काम का कम से कम आधा हिस्सा अनुपयोगी, कम मेहनत वाला या खराब गुणवत्ता का था।
ये आंकड़े बताते हैं कि समस्या सिर्फ AI की क्षमता से जुड़ी नहीं है। असली सवाल यह है कि कर्मचारी AI से तैयार सामग्री को किस तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
चमकदार काम सबसे ज्यादा क्यों परेशान करता है?
AI से तैयार सामग्री की सबसे बड़ी समस्या हमेशा यह नहीं होती कि वह खराब दिखाई देती है। कई बार परेशानी इसलिए ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि वह बहुत अच्छी दिखाई देती है।
बेहतर भाषा, साफ फॉर्मेटिंग और व्यवस्थित तरीके से लिखी गई सामग्री पहली नजर में भरोसेमंद लग सकती है। ऐसे में उसे पढ़ने वाला व्यक्ति यह मान सकता है कि काम पूरी तरह तैयार है।
लेकिन अगर उसके भीतर तथ्यात्मक गलतियां, अधूरी जानकारी या गलत निष्कर्ष छिपे हों, तो उन्हें खोजने में काफी समय लग सकता है।
यही वर्कस्लॉप का सबसे बड़ा नुकसान है। AI ने काम को खत्म नहीं किया, बल्कि उसकी जांच और सुधार का काम किसी दूसरे व्यक्ति के हिस्से में डाल दिया।
ऑफिस में भरोसे पर भी पड़ सकता है असर
वर्कस्लॉप का प्रभाव केवल उत्पादकता तक सीमित नहीं रहता। अगर किसी कर्मचारी को बार-बार अपने सहकर्मियों द्वारा भेजे गए अधूरे AI काम को सुधारना पड़े, तो धीरे-धीरे उसके मन में नाराजगी पैदा हो सकती है।
उसे लग सकता है कि सहकर्मी जिम्मेदारी से काम करने के बजाय AI पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो रहा है। इससे टीम के बीच भरोसा प्रभावित हो सकता है।
दूसरी तरफ, AI का इस्तेमाल करने वाला कर्मचारी शायद यह मान रहा हो कि उसने तेजी से काम पूरा करके टीम की मदद की है। यही गलतफहमी आगे चलकर टीम के माहौल में तनाव पैदा कर सकती है।
AI की एक गलती से टीम में बढ़ गया असंतोष
हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू से जुड़े शोध में ऐसे उदाहरणों का भी जिक्र किया गया है, जहां AI के इस्तेमाल से टीम के भीतर गंभीर नाराजगी पैदा हुई।
एक मामले में AI की सहायता से तैयार किए गए सॉफ्टवेयर में बड़ी संख्या में गंभीर तकनीकी खामियां रह गईं। इन गलतियों को संभालने और ठीक करने का दबाव टीम के दूसरे सदस्यों पर आया। इससे एक इंजीनियर इतना निराश हुआ कि उसने केवल दो दिन का नोटिस देकर नौकरी छोड़ दी।
एक दूसरे मामले में एक शोधकर्ता ने शिकायत की कि उसके प्रबंधक ने उसकी शोध सामग्री को उसकी अनुमति के बिना ChatGPT में इस्तेमाल किया। इसके बाद तैयार की गई सामग्री में गलतियां थीं और भाषा अनावश्यक तकनीकी शब्दों से भरी हुई थी।
इस तरह के उदाहरण यह दिखाते हैं कि AI का गलत इस्तेमाल सिर्फ काम की गुणवत्ता को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि टीम के बीच भरोसे और पेशेवर संबंधों पर भी असर डाल सकता है।
‘वर्कस्लॉप’ क्यों बन सकता है ऑफिस की बड़ी समस्या?
AI का उद्देश्य कर्मचारियों का काम आसान करना और उनकी उत्पादकता बढ़ाना है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि AI से तैयार सामग्री को अंतिम रूप देने से पहले इंसान उसकी जांच करे।
AI से पहला ड्राफ्ट तैयार करना गलत नहीं है। समस्या तब पैदा होती है जब कर्मचारी उस ड्राफ्ट को बिना तथ्य जांचे, बिना जरूरी बदलाव किए और बिना संदर्भ समझे किसी दूसरे व्यक्ति को भेज देता है।
ऐसी स्थिति में काम वास्तव में खत्म नहीं होता। उसकी जिम्मेदारी सिर्फ एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के पास चली जाती है।
यही वर्कस्लॉप का असली खतरा है। एक कर्मचारी कुछ मिनट बचाता है, जबकि दूसरा कर्मचारी उसी सामग्री को ठीक करने में उससे कहीं ज्यादा समय लगा देता है।
AI का इस्तेमाल करें, लेकिन जिम्मेदारी के साथ
AI ऑफिस के काम को तेज और बेहतर बनाने का प्रभावी माध्यम हो सकता है। लेकिन AI से तैयार सामग्री को अंतिम मान लेना जोखिम भरा हो सकता है।
रिपोर्ट, ईमेल, रिसर्च, डेटा या किसी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को आगे भेजने से पहले तथ्यों की जांच, संदर्भ की पुष्टि और जरूरी संपादन करना बेहद जरूरी है।
आखिरकार AI एक सहायक है, जिम्मेदारी लेने वाला कर्मचारी नहीं। अगर AI से तैयार काम की अंतिम जांच इंसान नहीं करेगा, तो समय बचाने की कोशिश उल्टा टीम के किसी दूसरे सदस्य के लिए अतिरिक्त काम पैदा कर सकती है।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट उपलब्ध रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर यूजर्स द्वारा शेयर किए गए कंटेंट के आधार पर तैयार की गई है। NewsJagran.in इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनमें किए गए सभी दावों का समर्थन करता है।


