Onion Price Rise: देश के कई शहरों में प्याज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने बाजार में सप्लाई बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। सरकार ने नासिक से प्रमुख खपत वाले शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए रेलवे रैक के जरिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ चलानी शुरू कर दी है। इसका मकसद बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों में आई मौसमी तेजी को नियंत्रित करना है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि चुनिंदा शहरों में उपभोक्ताओं को प्याज ₹35 प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराया जाएगा।
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने सोमवार को प्याज की कीमतों और सरकार की तैयारियों को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नासिक में रखे गए बफर स्टॉक को रेलवे के जरिए बड़े खपत केंद्रों तक भेजा जा रहा है। रेलवे रैक से भेजा जा रहा प्याज बुधवार तक चिन्हित केंद्रों तक पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद थोक और खुदरा दोनों बाजारों में इसकी सप्लाई शुरू की जाएगी।
59% तक बढ़ी प्याज की खुदरा कीमत
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 24 अगस्त को प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत सालाना आधार पर करीब 59% बढ़ गई। प्याज की औसत खुदरा कीमत बढ़कर ₹43.53 प्रति किलो हो गई है। पिछले साल इसी अवधि में देशभर में प्याज की औसत कीमत करीब ₹27.37 प्रति किलो थी।
सिर्फ खुदरा बाजार ही नहीं, बल्कि थोक कीमतों में भी काफी तेजी देखने को मिली है। आंकड़ों के मुताबिक, प्याज की औसत थोक कीमत करीब 68% बढ़कर ₹35.58 प्रति किलो हो गई। एक साल पहले इसी अवधि में औसत थोक कीमत करीब ₹21.23 प्रति किलो थी।
इस बढ़ोतरी का असर देश के बड़े शहरों में भी दिखाई दे रहा है। सोमवार को चेन्नई में प्याज की खुदरा कीमत करीब ₹60 प्रति किलो रही, जबकि पिछले साल इसी समय यह लगभग ₹33 प्रति किलो थी। दिल्ली में प्याज करीब ₹55 प्रति किलो बिक रहा था, जो पिछले साल ₹35 प्रति किलो के आसपास था। वहीं कोलकाता में कीमत करीब ₹53 प्रति किलो रही।
इन आंकड़ों से साफ है कि प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी सिर्फ किसी एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि कई प्रमुख उपभोक्ता बाजारों में इसका असर देखने को मिल रहा है।
इन 5 शहरों में सबसे पहले पहुंचेगा सस्ता प्याज
सरकार ने शुरुआत में प्याज की सप्लाई पांच प्रमुख खपत केंद्रों में करने का फैसला किया है। इनमें चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी शामिल हैं।
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के मुताबिक, शुरुआत में इन बड़े खपत केंद्रों को प्राथमिकता दी जा रही है। बाजार की स्थिति और मांग को देखते हुए आगे चलकर अन्य शहरों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है।
सरकार का उद्देश्य केवल प्याज को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना नहीं है, बल्कि उन बाजारों में अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध कराना है जहां कीमतों में ज्यादा तेजी देखी जा रही है। इससे स्थानीय बाजार में सप्लाई बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
₹35 किलो के भाव पर मिलेगा प्याज
सरकार के इस कदम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बफर स्टॉक से निकाले गए प्याज को खुदरा बाजार में ₹35 प्रति किलो की दर से बेचने की योजना है।
इसके लिए NCCF और NAFED जैसी सरकारी एजेंसियों की मदद ली जाएगी। इन एजेंसियों के माध्यम से चुनिंदा शहरों में प्याज को खुदरा उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाएगा।
ऐसे समय में जब कई शहरों में प्याज ₹50-60 प्रति किलो या उससे अधिक कीमत पर बिक रहा है, ₹35 प्रति किलो की दर से सरकारी सप्लाई मिलने से उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। हालांकि, इसका असर स्थानीय बाजार की कीमतों पर कितना और कितनी जल्दी दिखाई देगा, यह आने वाले दिनों में सप्लाई की मात्रा और बाजार की मांग पर निर्भर करेगा।
सरकार की नजर कीमतों पर, जमाखोरी पर भी चिंता
सरकार ने प्याज की कीमतों में तेजी के पीछे बाजार की गतिविधियों पर भी चिंता जताई है। निधि खरे ने कहा कि नासिक में मंडी की कीमतें दिल्ली से अधिक होना सामान्य स्थिति नहीं है।
उनके अनुसार, कीमतों के इस अंतर से बाजार में गुटबाजी और सट्टेबाजी की आशंका पैदा होती है। सरकार इसलिए कीमतों की लगातार निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर आगे भी कदम उठाए जा सकते हैं।
प्याज जैसी रोजमर्रा की जरूरी सब्जी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है। खासकर त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर कीमतों में और तेजी आने की आशंका रहती है। ऐसे में सरकारी बफर स्टॉक को बाजार में उतारना कीमतों को नियंत्रित रखने की एक अहम रणनीति मानी जाती है।
सरकार के पास कितना है प्याज का बफर स्टॉक?
केंद्र सरकार प्याज का बफर स्टॉक रणनीतिक भंडार के तौर पर रखती है। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसी स्थिति में बाजार को अतिरिक्त सप्लाई उपलब्ध कराना है, जब किसी कारण से प्याज की उपलब्धता कम हो जाए और कीमतों में अचानक उछाल आने लगे।
सरकार यह स्टॉक मुख्य रूप से मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत खरीदती है। इसके लिए NAFED और NCCF जैसी एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
जब बाजार में प्याज की सप्लाई कम होती है या कीमतों में तेज बढ़ोतरी दिखाई देती है, तब इस बफर स्टॉक को नियंत्रित तरीके से अलग-अलग मंडियों और खपत वाले शहरों में भेजा जाता है। इसका मकसद बाजार में अतिरिक्त प्याज उपलब्ध कराना और कीमतों को स्थिर करने में मदद करना होता है।
निधि खरे के अनुसार, चालू वर्ष के लिए सरकार के पास करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक मौजूद है। सरकार का मानना है कि यह स्टॉक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले महीनों में देश में प्याज की उपलब्धता संतोषजनक बनी रहने की उम्मीद है। यानी मौजूदा कीमतों में तेजी के बावजूद सरकार को सप्लाई को लेकर फिलहाल बड़ी कमी की आशंका नहीं है।
अगस्त-सितंबर में क्यों बढ़ते हैं प्याज के दाम?
प्याज की कीमतों में अगस्त और सितंबर के आसपास मौसमी तेजी देखना कोई नई बात नहीं है। इस दौरान कई कारक एक साथ कीमतों को प्रभावित करते हैं।
त्योहारी मांग बढ़ने के अलावा मौसम से जुड़ी समस्याएं, बारिश के कारण परिवहन में दिक्कत, सप्लाई चेन में बदलाव और अलग-अलग बाजारों में मांग का पैटर्न कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
यदि किसी प्रमुख उत्पादन क्षेत्र से मंडियों तक प्याज पहुंचने में देरी होती है, तो स्थानीय बाजार में उपलब्ध स्टॉक कम हो सकता है। इससे कीमतों पर तुरंत असर पड़ता है। वहीं दूसरी तरफ त्योहारों और घरेलू खपत बढ़ने से मांग में भी तेजी आ सकती है।
सरकार ऐसे समय में बफर स्टॉक का इस्तेमाल करके बाजार में अतिरिक्त सप्लाई बढ़ाने की कोशिश करती है। किस शहर में कितना स्टॉक भेजना है और किस समय बाजार में उतारना है, इसका फैसला कीमतों और स्थानीय बाजार की स्थिति की निगरानी के आधार पर किया जाता है।
क्या है ‘कांदा एक्सप्रेस’?
सरकार ने बड़े पैमाने पर प्याज को कम समय में प्रमुख खपत केंद्रों तक पहुंचाने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ पहल शुरू की थी। इसका उद्देश्य सड़क परिवहन पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय रेलवे की बड़ी माल ढुलाई क्षमता का इस्तेमाल करना है।
यह पहल 2024-25 में शुरू हुई थी। उस दौरान करीब 12,000 टन प्याज के बफर स्टॉक को 14 रेलवे रैक के जरिए पांच शहरों तक पहुंचाया गया था।
इसके बाद इस व्यवस्था का विस्तार किया गया। 2025-26 में करीब 86 रेलवे रैक के जरिए देश के 16 बड़े शहरों में लगभग 88,000 टन प्याज पहुंचाया गया।
इससे पता चलता है कि सरकार अब प्याज की सप्लाई को लेकर रेलवे नेटवर्क का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रही है। बड़ी मात्रा में प्याज को एक साथ लंबी दूरी तक पहुंचाने में रेलवे रैक उपयोगी साबित हो सकते हैं और इससे लॉजिस्टिक व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलती है।
उपभोक्ताओं को कब मिल सकती है राहत?
नासिक से भेजे जा रहे प्याज के रेलवे रैक बुधवार तक चिन्हित केंद्रों पर पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद थोक और खुदरा बाजार में सप्लाई बढ़ाई जाएगी।
सरकार की ओर से ₹35 प्रति किलो की दर पर खुदरा बिक्री शुरू होने के बाद उन शहरों में उपभोक्ताओं को सीधी राहत मिलने की उम्मीद है जहां फिलहाल प्याज काफी महंगा बिक रहा है।
हालांकि, बाजार भाव तुरंत पूरी तरह ₹35 प्रति किलो पर आ जाएंगे, ऐसा जरूरी नहीं है। सरकारी बिक्री और अतिरिक्त सप्लाई का उद्देश्य बाजार में उपलब्धता बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना है। आगे कीमतों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि मंडियों में नई आवक कितनी रहती है, मांग कैसी रहती है और सरकार कितनी मात्रा में बफर स्टॉक बाजार में उतारती है।
निष्कर्ष
प्याज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए नासिक से प्रमुख शहरों तक बफर स्टॉक भेजना शुरू कर दिया है। सरकार का लक्ष्य बाजार में सप्लाई बढ़ाकर मौसमी तेजी पर अंकुश लगाना है। चुनिंदा शहरों में NCCF और NAFED के जरिए ₹35 प्रति किलो की दर से प्याज बेचने की योजना भी बनाई गई है।
सरकार के पास 1.21 लाख टन का बफर स्टॉक मौजूद होने और आने वाले महीनों में प्याज की उपलब्धता संतोषजनक रहने के अनुमान से उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि रेलवे के जरिए पहुंचने वाला अतिरिक्त स्टॉक स्थानीय बाजारों में कीमतों को कितनी जल्दी नीचे लाता है।


