Iran Hijab Controversy: ईरान में महिलाओं का बिना हिजाब सार्वजनिक जगहों पर नजर आना लगातार बढ़ रहा है। रूढ़िवादी नेता सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन शासन के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि कठोर कदम कहीं नए विरोध प्रदर्शनों को जन्म न दे दें।
Iran Hijab Controversy: ईरान में अनिवार्य हिजाब का मुद्दा एक बार फिर सरकार और महिलाओं के बीच टकराव का केंद्र बनता नजर आ रहा है। राजधानी तेहरान समेत देश के कई बड़े शहरों में बड़ी संख्या में महिलाएं बिना सिर ढके सार्वजनिक स्थानों पर दिखाई दे रही हैं। सरकार के लिए यह स्थिति इसलिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि एक तरफ रूढ़िवादी नेता इस्लामिक ड्रेस कोड को सख्ती से लागू करने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों को आशंका है कि बड़े पैमाने पर कार्रवाई से जनता में फिर असंतोष भड़क सकता है।
सड़कों पर बदलता दिख रहा है माहौल
ईरान में सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के लिए हिजाब पहनना लंबे समय से कानूनी और सामाजिक नियमों का हिस्सा रहा है। हालांकि पिछले कुछ समय से देश के शहरी इलाकों में इस नियम की अनदेखी करती महिलाएं ज्यादा दिखाई देने लगी हैं।
तेहरान जैसे शहरों में युवा महिलाएं बिना हिजाब के खरीदारी करते हुए, कैफे और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर जाती हुई नजर आ रही हैं। इस बदलाव ने सरकार के सामने एक मुश्किल स्थिति पैदा कर दी है। प्रशासन के लिए हर महिला के खिलाफ सीधे कार्रवाई करना व्यावहारिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर जोखिम भरा माना जा रहा है।
कैफे और रेस्टोरेंट पर बढ़ी कार्रवाई
महिलाओं के ड्रेस कोड का पालन सुनिश्चित कराने के लिए प्रशासन ने कई मामलों में सीधे महिलाओं की बजाय व्यवसायों पर कार्रवाई का रास्ता अपनाया है। नियमों का पालन नहीं कराने के आरोप में कैफे, रेस्टोरेंट और अन्य प्रतिष्ठानों को बंद किए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
सरकार का यह तरीका एक तरह से दबाव बनाए रखने की कोशिश है, लेकिन इससे भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सार्वजनिक स्थानों पर बिना हिजाब नजर आने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ने से यह सवाल उठ रहा है कि केवल प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई करके क्या ड्रेस कोड को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकता है।
रूढ़िवादी नेताओं का सरकार पर दबाव
ईरान के रूढ़िवादी राजनीतिक और धार्मिक वर्ग के लिए हिजाब केवल पहनावे का मुद्दा नहीं है। इसे इस्लामिक गणराज्य की सामाजिक और धार्मिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण प्रतीकों में माना जाता है। यही वजह है कि नियमों की खुलेआम अनदेखी को लेकर कट्टरपंथी और रूढ़िवादी नेता सरकार पर लगातार सख्त कदम उठाने का दबाव बनाते हैं।
उनका तर्क है कि यदि सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब के नियमों को नजरअंदाज किया जाता रहा तो इससे देश के पारंपरिक और धार्मिक मूल्यों को नुकसान पहुंचेगा। दूसरी ओर सरकार के सामने सवाल यह है कि नियम लागू करने के लिए कितनी सख्ती की जाए और उसकी राजनीतिक कीमत कितनी होगी।
2022 का आंदोलन आज भी बना हुआ है बड़ी चिंता
ईरान में हिजाब को लेकर किसी भी बड़े सरकारी अभियान के साथ 2022 के ‘महिला, जीवन, स्वतंत्रता’ आंदोलन की यादें जुड़ जाती हैं। सितंबर 2022 में 22 वर्षीय महसा अमीनी की हिरासत में मौत के बाद पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे।
महसा अमीनी को हिजाब नियमों के उल्लंघन के आरोप में मोरल पुलिस ने हिरासत में लिया था। उनकी मौत के बाद महिलाओं और युवाओं की बड़ी संख्या सड़कों पर उतरी। कई महिलाओं ने सार्वजनिक रूप से हिजाब हटाया और विरोध के प्रतीक के तौर पर अपने सिर के स्कार्फ जलाए।
सरकार ने बाद में इन प्रदर्शनों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें नियंत्रित कर लिया, लेकिन उस आंदोलन ने ईरानी समाज और सरकार के बीच संबंधों पर गहरा असर छोड़ा।
सरकार के सामने आसान नहीं है सीधी कार्रवाई
आज की स्थिति में ईरानी प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि नियमों को लागू भी करना है और बड़े पैमाने पर टकराव से भी बचना है। किसी एक कैफे या दुकान पर कार्रवाई करना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन बड़ी संख्या में महिलाओं के खिलाफ सीधे कार्रवाई करने से मामला तेजी से राजनीतिक विरोध का रूप ले सकता है।
सोशल मीडिया ने इस जोखिम को और बढ़ा दिया है। किसी महिला के साथ हुई कार्रवाई का वीडियो कुछ ही समय में देशभर में फैल सकता है और वह घटना सरकार विरोधी अभियान का प्रतीक बन सकती है।
राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान भी उठा चुके हैं सवाल
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने भी कई मौकों पर इस बात पर सवाल उठाया है कि क्या लोगों के व्यवहार और विचारों को केवल दबाव और बल प्रयोग के जरिए बदला जा सकता है। उनका रुख इस मुद्दे पर ईरान के कुछ रूढ़िवादी नेताओं से अलग दिखाई देता है।
यही मतभेद सरकार के भीतर भी एक चुनौती पैदा करते हैं। एक ओर धार्मिक और रूढ़िवादी वर्ग सख्त कार्रवाई चाहता है, जबकि दूसरी ओर शासन के कुछ हिस्से यह मानते हैं कि अत्यधिक दबाव सामाजिक तनाव को और बढ़ा सकता है।
हिजाब से आगे बढ़ चुका है मुद्दा
ईरान में हिजाब का विवाद अब केवल ड्रेस कोड के पालन का सवाल नहीं रह गया है। महिलाओं के लिए यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपने शरीर तथा पहनावे पर अधिकार से भी जुड़ चुका है। वहीं सरकार और रूढ़िवादी वर्ग इसे धार्मिक मूल्यों तथा सामाजिक व्यवस्था से जोड़कर देखते हैं।
इसी वजह से आने वाले समय में सरकार के लिए संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। यदि प्रशासन बहुत सख्ती करता है तो नए विरोध की आशंका बढ़ सकती है और यदि वह नरमी बरतता है तो रूढ़िवादी वर्ग का दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल ईरान की सड़कों पर बदलता यह नजारा इसी गहरी सामाजिक और राजनीतिक खींचतान की ओर इशारा कर रहा है।


