Medical Inflation: भारत में उम्र बढ़ने के साथ इलाज का खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है। 2021 से 2026 के बीच के हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम के आंकड़ों के मुताबिक, 25 साल से कम उम्र के लोगों का औसत क्लेम करीब ₹65 हजार रहा, जबकि 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र में यह बढ़कर ₹1.77 लाख पहुंच गया। यानी बुजुर्गों में औसत अस्पताल खर्च युवाओं के मुकाबले करीब 2.7 गुना ज्यादा रहा। वहीं, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की लागत में भी लगातार तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है।
60 साल के बाद इलाज का खर्च सबसे ज्यादा
भारत में बढ़ती उम्र के साथ गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ता है और इसका सीधा असर अस्पताल के खर्च पर पड़ता है। पॉलिसीबाजार के 2021 से 2026 के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, 25 साल से कम उम्र के लोगों का औसत हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम ₹65,124 रहा।
वहीं, 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में औसत क्लेम बढ़कर ₹1.77 लाख हो गया। इस तरह उम्र बढ़ने के साथ औसत अस्पताल खर्च करीब 2.7 गुना तक बढ़ गया।
हालांकि, कुल हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम की संख्या में बुजुर्ग सबसे आगे नहीं हैं। 26 से 45 वर्ष की उम्र वाले लोगों की हिस्सेदारी कुल क्लेम में 56% से ज्यादा रही। इस आयु वर्ग में मातृत्व, दुर्घटना, नियोजित सर्जरी और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती होने के मामले ज्यादा रहे।
उम्र के साथ बदल जाता है बीमारी का पैटर्न
कम उम्र और बुजुर्गों में अस्पताल में भर्ती होने के कारण भी अलग-अलग होते हैं।
25 साल से कम उम्र: इस आयु वर्ग में संक्रमण, चोट और मातृत्व से जुड़े मामलों के कारण अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत ज्यादा देखने को मिली।
60 वर्ष से अधिक: इस वर्ग में हृदय रोग, कैंसर, किडनी की गंभीर बीमारी और दूसरी क्रोनिक बीमारियों का बोझ ज्यादा रहता है। इन बीमारियों में महंगी सर्जरी, लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने और लगातार इलाज की जरूरत पड़ सकती है।
क्रोनिक बीमारियों का खर्च चार गुना से ज्यादा
गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियां हेल्थ इंश्योरेंस पर सबसे बड़ा वित्तीय बोझ डाल रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, क्रोनिक बीमारियों का औसत क्लेम ₹2.66 लाख रहा।
इसके मुकाबले गैर-क्रोनिक बीमारियों का औसत क्लेम करीब ₹64,927 था। यानी क्रोनिक बीमारियों का औसत इलाज खर्च चार गुना से भी ज्यादा रहा।
कुल क्लेम की संख्या में क्रोनिक बीमारियों की हिस्सेदारी करीब 27% थी, लेकिन कुल क्लेम राशि में इनकी हिस्सेदारी बढ़कर 42% हो गई। इससे पता चलता है कि कम संख्या में होने के बावजूद गंभीर और पुरानी बीमारियां बीमा भुगतान पर बड़ा असर डालती हैं।
कैंसर का औसत क्लेम ₹5.55 लाख
कैंसर और ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज भी लगातार महंगा हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, कुल क्लेम राशि में कैंसर और ट्यूमर से जुड़े मामलों की हिस्सेदारी करीब 12% रही।
इन मामलों में औसत हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम करीब ₹5.55 लाख रहा। यानी कैंसर का इलाज सामान्य अस्पताल भर्ती की तुलना में परिवार के बजट पर कहीं ज्यादा बड़ा असर डाल सकता है।
वहीं, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक से जुड़े मामलों की कुल क्लेम राशि में करीब 10% हिस्सेदारी रही। इन बीमारियों में औसत क्लेम लगभग ₹2.08 लाख रहा।
कैंसर के इलाज में 10-14% सालाना महंगाई
कैंसर के इलाज की लागत में पिछले कुछ वर्षों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2021 में कैंसर के इलाज का औसत क्लेम करीब ₹3.1 लाख था, जो 2026 में बढ़कर लगभग ₹5.6 लाख हो गया।
इस अवधि में कैंसर के इलाज की लागत में करीब 10-14% सालाना मेडिकल महंगाई देखने को मिली। वहीं, दिल और हड्डियों से जुड़ी बीमारियों के इलाज की लागत में भी सालाना करीब 6-10% की वृद्धि दर्ज की गई।
इसका मतलब है कि सिर्फ आज के इलाज के खर्च को देखकर हेल्थ इंश्योरेंस कवर तय करना पर्याप्त नहीं है। आने वाले वर्षों में मेडिकल महंगाई के कारण यही इलाज काफी महंगा हो सकता है।
मुंबई में सबसे महंगा इलाज
अस्पताल में भर्ती होने का खर्च देश के अलग-अलग शहरों में भी काफी अलग है। टियर-1 शहरों में औसत हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम करीब ₹1.73 लाख रहा, जबकि टियर-3 शहरों में यह करीब ₹1.20 लाख था। यानी टियर-1 शहरों में औसत क्लेम करीब 44% ज्यादा रहा।
प्रमुख शहरों में औसत क्लेम इस तरह रहा:
- मुंबई: ₹1.92 लाख
- बेंगलुरु: ₹1.72 लाख
- दिल्ली: ₹1.65 लाख
- गुरुग्राम: ₹1.60 लाख
- फरीदाबाद: ₹1.49 लाख
इन आंकड़ों में मुंबई सबसे महंगा शहर रहा। महानगरों में अस्पताल, डॉक्टर, सर्जरी और अन्य मेडिकल सेवाओं की ऊंची लागत का असर इंश्योरेंस क्लेम पर भी दिखाई देता है।
महिलाओं के इलाज का खर्च भी बढ़ा
हेल्थ इंश्योरेंस के आंकड़ों में महिलाओं से जुड़े इलाज का बढ़ता आर्थिक बोझ भी सामने आया है। यह खर्च सिर्फ मातृत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि गंभीर बीमारियों के इलाज में भी बड़ी रकम खर्च हो रही है।
पांच साल की अवधि में ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम करीब ₹99 करोड़ रहे। इस बीमारी में औसत क्लेम करीब ₹7.5 लाख रहा।
यह आंकड़ा बताता है कि परिवार के लिए पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस कवर चुनते समय गंभीर बीमारियों और भविष्य की मेडिकल महंगाई को ध्यान में रखना जरूरी है।
उम्र बढ़ने से पहले हेल्थ इंश्योरेंस लेना क्यों जरूरी?
हेल्थ इंश्योरेंस की जरूरत सिर्फ बुजुर्गों को नहीं होती। आंकड़े दिखाते हैं कि 26-45 साल की उम्र में भी अस्पताल में भर्ती होने और क्लेम की संख्या काफी अधिक है।
कम उम्र में पॉलिसी लेने से व्यक्ति को लंबे समय के लिए पर्याप्त कवर तैयार करने का मौका मिलता है। साथ ही, भविष्य में बढ़ती मेडिकल महंगाई को देखते हुए समय रहते पर्याप्त सम एश्योर्ड चुनना महत्वपूर्ण हो जाता है।
नोट: हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने से पहले पॉलिसी की कवरेज, वेटिंग पीरियड, कमरे के किराये की सीमा, को-पेमेंट, बीमारी से जुड़े अपवाद और नेटवर्क अस्पतालों की शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।


