Jharkhand Protest Update: झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़ी कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया गया था। अदालत के इस आदेश से उन अभ्यर्थियों और नियुक्त कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है, जिन्होंने संबंधित परीक्षाओं में सफलता हासिल करने के बाद सरकारी नौकरी ज्वाइन कर ली थी। अब इन कर्मचारियों के सामने तत्काल नौकरी जाने का संकट नहीं रहेगा।
सरकार के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचे थे सफल अभ्यर्थी
दरअसल, झारखंड सरकार की ओर से आठ अलग-अलग नोटिफिकेशन जारी किए गए थे। इन नोटिफिकेशन के जरिए 44 परीक्षाओं को रद्द करने और 23 अन्य परीक्षाओं की जांच कराने का फैसला लिया गया था। इसके बाद अवधेश कुमार समेत कई सफल अभ्यर्थियों ने झारखंड हाई कोर्ट का रुख किया।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे JPSC और JSSC समेत संबंधित भर्ती प्रक्रियाओं में सफल घोषित किए गए थे और कई मामलों में नियुक्ति के बाद वे सरकारी सेवा में काम भी कर रहे थे। ऐसे में पूरी परीक्षा प्रक्रिया को रद्द करने से उनकी नौकरी और भविष्य पर सीधा असर पड़ रहा था।
नियुक्त कर्मचारियों की ओर से यह तर्क दिया गया कि यदि भर्ती प्रक्रिया में कहीं अनियमितता हुई भी है तो उसकी सजा उन अभ्यर्थियों को नहीं दी जानी चाहिए, जिन्होंने अपनी योग्यता के आधार पर परीक्षा पास की और नियुक्ति प्राप्त की है।
हेमंत सरकार ने परीक्षाएं रद्द करने का फैसला क्यों लिया?
JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर झारखंड में लंबे समय से छात्रों का विरोध प्रदर्शन चल रहा था। रांची में छात्रों ने कई दिनों तक आंदोलन किया और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाई।
इसके बाद राज्य सरकार ने 2014 से अब तक JPSC और आउटसोर्स एजेंसी TDPL के जरिए आयोजित कई परीक्षाओं की समीक्षा करते हुए 44 परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया। इसके अलावा 23 परीक्षाओं की जांच के आदेश भी दिए गए।
रद्द की गई परीक्षाओं में कई अहम सरकारी पदों की भर्ती शामिल थी। इनमें ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डॉक्टर, असिस्टेंट इंजीनियर, सिविल जज, एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट, फूड सेफ्टी ऑफिसर, CDPO, पॉलिटेक्निक लेक्चरर और सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर जैसे पद शामिल बताए गए हैं।
सरकार का तर्क था कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है। सरकार के अनुसार, कार्रवाई का उद्देश्य भर्ती व्यवस्था में जनता और अभ्यर्थियों का भरोसा कायम करना था।
26 दिनों तक चला छात्रों का आंदोलन
भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन काफी लंबा चला। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में करीब 26 दिनों तक छात्रों ने प्रदर्शन किया।
आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र बारिश और अन्य परेशानियों के बावजूद धरने पर बैठे रहे। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की थी।
मामले की जांच राज्य की CID कर रही है। जांच के दौरान कई लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। यही वजह है कि परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले को लेकर मामला राजनीतिक और कानूनी, दोनों स्तरों पर काफी महत्वपूर्ण बन गया।
हाई कोर्ट के स्टे के बाद अब क्या होगा?
हाई कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल सरकार द्वारा जारी उन आठ नोटिफिकेशन के आधार पर परीक्षाएं रद्द करने की कार्रवाई पर रोक लग गई है। इसका सबसे सीधा फायदा उन अभ्यर्थियों को मिलेगा, जो संबंधित परीक्षाओं में सफल होने के बाद नियुक्त हो चुके हैं।
इसका मतलब यह है कि जिन कर्मचारियों की नियुक्ति पहले ही हो चुकी थी, उनकी नौकरी पर फिलहाल तत्काल कोई खतरा नहीं है। हालांकि, इसे मामले का अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। हाई कोर्ट में आगे भी इस मामले की सुनवाई जारी रहेगी।
अब राज्य सरकार और संबंधित आयोगों को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। सरकार को यह साबित करना होगा कि संबंधित भर्ती प्रक्रियाओं में ऐसी गंभीर और व्यापक अनियमितताएं हुई थीं, जिनके कारण पूरी परीक्षा रद्द करना जरूरी था।
वहीं, सफल अभ्यर्थियों की ओर से यह दलील दी जा सकती है कि कथित गड़बड़ी के लिए पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने के बजाय वास्तविक दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
अभ्यर्थियों के लिए क्या है इसका मतलब?
हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद सफल अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है। खासकर वे उम्मीदवार जो नियुक्त होकर सरकारी विभागों में काम कर रहे हैं, उनके लिए यह आदेश महत्वपूर्ण है।
हालांकि, आगे की कानूनी सुनवाई में अदालत का अंतिम रुख महत्वपूर्ण होगा। इसलिए अभ्यर्थियों को इस मामले में आने वाले अगले आदेशों और सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रखनी होगी।
निष्कर्ष
JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर झारखंड में चल रहा विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हाई कोर्ट ने सरकार के परीक्षाएं रद्द करने के फैसले पर फिलहाल रोक लगाकर सफल अभ्यर्थियों और नियुक्त कर्मचारियों को राहत दी है। अब आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि सरकार द्वारा परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला कानूनी तौर पर कितना उचित था और कथित अनियमितताओं के लिए पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए या नहीं।
फिलहाल सबसे बड़ी राहत उन उम्मीदवारों को मिली है, जो परीक्षा पास कर नौकरी हासिल कर चुके थे और रद्दीकरण के फैसले के कारण अपने रोजगार को लेकर चिंतित थे।


