Gift Nifty Indicator: कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ने के बीच भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं। निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन GIFT Nifty करीब 85 अंक नीचे कारोबार कर रहा है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वायदा बाजार में बढ़ती शॉर्ट पोजिशन ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है।
मंगलवार सुबह करीब 7:45 बजे GIFT Nifty 85 अंक या 0.35 फीसदी की गिरावट के साथ 24,900 के आसपास कारोबार कर रहा था। यह संकेत देता है कि घरेलू बाजार की शुरुआत दबाव के साथ हो सकती है। इससे पहले सोमवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स 281.09 अंक यानी 0.36 फीसदी टूटकर 77,728.16 पर और निफ्टी 78.35 अंक यानी 0.32 फीसदी गिरकर 24,287.65 पर बंद हुआ।
क्रूड ऑयल में तेजी से बढ़ी बाजार की चिंता
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने ग्लोबल मार्केट की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 85 डॉलर के करीब कारोबार कर रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारतीय बाजार के लिए खास तौर पर अहम है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। लंबे समय तक क्रूड महंगा रहने की स्थिति में महंगाई, चालू खाते और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि निवेशक क्रूड की हर बड़ी चाल पर नजर बनाए हुए हैं।
इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 4.7 फीसदी के ऊपर जाना भी इक्विटी बाजार के लिए चुनौती बन रहा है। ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियों का आकर्षण बढ़ सकता है, जिसका असर उभरते बाजारों में विदेशी निवेश पर पड़ सकता है।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख
मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में कुल मिलाकर तेजी रही, लेकिन अलग-अलग बाजारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। निवेशक भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के संभावित असर का आकलन कर रहे हैं।
MSCI के एशिया-पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स में करीब 0.4 फीसदी की बढ़त रही। दक्षिण कोरियाई बाजार में 2.7 फीसदी की मजबूत तेजी देखने को मिली। जापान के Topix में मामूली बदलाव रहा, जबकि Nikkei 225 फ्यूचर्स में करीब 0.5 फीसदी की कमजोरी रही। ऑस्ट्रेलिया के S&P/ASX 200 में करीब 0.2 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स में भी बड़ा बदलाव नहीं दिखा। वहीं EURO STOXX 50 फ्यूचर्स में करीब 0.2 फीसदी और Hang Seng फ्यूचर्स में लगभग 0.3 फीसदी की गिरावट रही।
निफ्टी पर क्या हो सकती है रणनीति?
Enrich Money के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की लगातार खरीदारी भारतीय बाजार को कुछ हद तक सहारा दे रही है। DII की खरीदारी विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव को कम करने में मदद कर रही है।
हालांकि, ऊंचे कच्चे तेल के भाव और लगातार बने हुए भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण बाजार का सेंटीमेंट कमजोर रह सकता है। ऐसे में निफ्टी में तेजी के बजाय सावधानी के साथ कारोबार देखने को मिल सकता है।
निफ्टी के अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस
टेक्निकल स्तर पर 24,300-24,200 का जोन निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट माना जा रहा है। अगर निफ्टी 24,200 के नीचे टिकता है तो बिकवाली और बढ़ सकती है और इंडेक्स 24,000 के स्तर की ओर बढ़ सकता है।
दूसरी तरफ, तेजी की स्थिति में 24,500 का स्तर अहम रेजिस्टेंस रहेगा। निफ्टी अगर 24,500 के ऊपर मजबूती से टिकने में सफल रहता है तो बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हो सकता है और 24,600-24,700 के स्तर की ओर बढ़ने की संभावना बन सकती है।
इसलिए वीकली एक्सपायरी के दिन 24,200 और 24,500 के स्तर बाजार की दिशा के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेंगे।
FII की बिकवाली जारी, DII ने संभाला मोर्चा
विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली भारतीय बाजार के लिए लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। सोमवार को FII ने भारतीय इक्विटी बाजार में 2,535 करोड़ रुपये की नेट बिकवाली की।
हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को राहत दी। DII ने लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में खरीदारी जारी रखते हुए 5,100 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी। इससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली का बड़ा हिस्सा घरेलू खरीदारी से संभल गया।
फिलहाल बाजार के लिए तीन बड़े ट्रिगर सबसे महत्वपूर्ण हैं—कच्चे तेल की कीमत, ईरान-अमेरिका तनाव और FII की बिकवाली। इसके अलावा वीकली एक्सपायरी के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के साथ-साथ ग्लोबल संकेतों पर भी नजर रखनी होगी।
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