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    # UP के सरकारी इंजीनियर ने खड़ा किया था खरबों का JP साम्राज्य, फिर कर्ज ने किया बर्बाद; अब अदाणी के हाथों में कंपनी की कमान **JP Associates Story:** उत्तर प्रदेश के एक सरकारी इंजीनियर ने अपनी नौकरी छोड़कर कारोबार की दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते हजारों करोड़ रुपये का कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर दिया। यह कहानी है जयप्रकाश गौड़ और जयप्रकाश एसोसिएट्स (JP Associates) की। यमुना एक्सप्रेसवे, बड़े बांध, सीमेंट प्लांट, बिजली परियोजनाएं और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाला यह समूह कभी देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारियों में गिना जाता था। लेकिन जरूरत से ज्यादा कर्ज, आर्थिक मंदी और कारोबार में आई मुश्किलों ने इस साम्राज्य की नींव हिला दी। आखिरकार कंपनी दिवालिया प्रक्रिया में पहुंच गई और अब इसका अधिग्रहण अदाणी समूह ने कर लिया है। **बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।** कारोबार की दुनिया में कई ऐसी कहानियां हैं, जहां एक छोटे से सफर की शुरुआत करने वाला व्यक्ति बड़ा कारोबारी साम्राज्य खड़ा कर देता है। लेकिन कभी-कभी यही साम्राज्य समय के साथ कर्ज और आर्थिक चुनौतियों के कारण ढह भी जाता है। जयप्रकाश एसोसिएट्स की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक समय उत्तर भारत में जेपी समूह का नाम बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता था। कंपनी ने सड़क निर्माण से लेकर बिजली उत्पादन, सीमेंट, होटल और रियल एस्टेट तक कई क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बनाई। ग्रेटर नोएडा से आगरा को जोड़ने वाला यमुना एक्सप्रेसवे भी इसी समूह की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। जेपी समूह की पहचान केवल बड़े प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं थी। लाखों निवेशकों और कर्मचारियों का भी इस कंपनी से जुड़ाव था। लेकिन लगातार बढ़ते कर्ज और कारोबार में आई गिरावट ने कंपनी को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया, जहां से वापसी मुश्किल हो गई। अब अदाणी समूह ने दिवालिया समाधान प्रक्रिया के जरिए जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ कर लिया है। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे एक सरकारी इंजीनियर ने यह कारोबारी साम्राज्य खड़ा किया और फिर यह आर्थिक संकट में कैसे फंस गया। ## सरकारी इंजीनियर से कारोबारी बनने तक का सफर जयप्रकाश गौड़ का जन्म वर्ष 1931 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में हुआ था। उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया और इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर नौकरी शुरू की। सरकारी सेवा के दौरान उन्हें निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ी परियोजनाओं को समझने का मौका मिला। हालांकि, उनके मन में खुद का कारोबार शुरू करने की इच्छा थी। करीब सात साल तक सरकारी नौकरी करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और निर्माण कार्यों की ठेकेदारी शुरू कर दी। शुरुआत में उनके पास कारोबार के लिए बहुत ज्यादा पूंजी नहीं थी। उन्होंने अपनी करीब 10 हजार रुपये की बचत से छोटे-मोटे निर्माण और सड़क निर्माण के ठेके लेने शुरू किए। धीरे-धीरे अनुभव और काम के आधार पर उन्हें बड़ी परियोजनाएं मिलने लगीं। वर्ष 1979 में उन्होंने जयप्रकाश एसोसिएट्स की स्थापना की। शुरुआत में कंपनी का मुख्य कारोबार निर्माण और इंजीनियरिंग से जुड़ा था। समय के साथ कंपनी ने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी जगह बनाई और जेपी समूह का विस्तार होता चला गया। ## बांध से लेकर बिजली और सीमेंट तक फैला कारोबार जेपी समूह ने निर्माण क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करने के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की तरफ कदम बढ़ाया। टिहरी बांध और विष्णुप्रयाग जलविद्युत परियोजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से कंपनी की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई। इसके बाद समूह ने सीमेंट, बिजली उत्पादन, होटल और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भी कारोबार शुरू किया। कंपनी का उद्देश्य केवल निर्माण ठेके लेने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के विकास और संचालन तक पहुंच गया। इस विस्तार ने जयप्रकाश एसोसिएट्स को देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर समूहों में शामिल कर दिया। कंपनी के पास अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार था और निवेशकों के बीच भी इसकी अच्छी पहचान बन गई थी। ## यमुना एक्सप्रेसवे ने दिलाई देशभर में पहचान जेपी समूह के इतिहास में यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना को एक बड़ा पड़ाव माना जाता है। वर्ष 2003 में ग्रेटर नोएडा से आगरा के बीच एक्सप्रेसवे बनाने की परियोजना जेपी समूह को मिली। करीब 165 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण समूह की कंपनी जेपी इंफ्राटेक ने किया। इस परियोजना के तहत सड़क निर्माण के साथ-साथ एक्सप्रेसवे के आसपास रियल एस्टेट विकास के अधिकार भी मिले। इससे कंपनी को इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रॉपर्टी कारोबार दोनों में विस्तार का अवसर मिला। वर्ष 2012 में यमुना एक्सप्रेसवे को आम लोगों के लिए खोल दिया गया। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क बेहतर हुआ। इस परियोजना ने जेपी समूह को देशभर में पहचान दिलाई। इसी दौरान कंपनी ने ग्रेटर नोएडा में बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट का निर्माण भी किया। इस रेसिंग सर्किट पर वर्ष 2011 से 2013 तक फॉर्मूला-1 इंडियन ग्रां प्री का आयोजन हुआ। यह परियोजना भारत में मोटरस्पोर्ट्स के लिहाज से काफी चर्चित रही। ## 2008 की मंदी के बाद बिगड़ने लगे हालात तेजी से विस्तार कर रहे जेपी समूह के लिए वर्ष 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी बड़ा झटका साबित हुई। मंदी के बाद रियल एस्टेट बाजार में सुस्ती आने लगी। मकानों की बिक्री प्रभावित हुई और निर्माण परियोजनाओं से मिलने वाली रकम में देरी होने लगी। दूसरी तरफ बिजली और सीमेंट कारोबार में भी कंपनी को उम्मीद के मुताबिक कमाई नहीं हो रही थी। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश की जरूरत थी, जबकि कारोबार से पर्याप्त नकदी नहीं आ रही थी। बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट जैसी बड़ी परियोजनाओं पर हुआ निवेश भी कंपनी के वित्तीय दबाव को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल रहा। कंपनी ने अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए बड़ी रकम उधार ली थी, लेकिन आमदनी और नकदी का प्रवाह कर्ज चुकाने की रफ्तार के अनुरूप नहीं रहा। कर्ज का बोझ बढ़ने के साथ कंपनी को अपनी कई संपत्तियां और कारोबारी हिस्सेदारियां बेचनी पड़ीं। इसके बावजूद वित्तीय स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। धीरे-धीरे जेपी समूह का संकट गहराता चला गया। ## घर खरीदारों से लेकर बैंकों तक, हर कोई हुआ परेशान जेपी समूह का आर्थिक संकट केवल कंपनी और बैंकों तक सीमित नहीं रहा। इसका असर उन हजारों लोगों पर भी पड़ा, जिन्होंने कंपनी के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में अपने घर बुक किए थे। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में जेपी विशटाउन जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में बड़ी संख्या में घर खरीदारों का पैसा फंस गया। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत लगाकर घर खरीदे थे, लेकिन उन्हें तय समय पर फ्लैट नहीं मिल पाए। इस स्थिति ने जेपी समूह की मुश्किलें और बढ़ा दीं। एक तरफ बैंक और वित्तीय संस्थान अपना कर्ज वापस मांग रहे थे, वहीं दूसरी तरफ घर खरीदार अपने घरों का इंतजार कर रहे थे। ## 2017 में शुरू हुई दिवालिया प्रक्रिया जेपी समूह की मुश्किलें सबसे पहले उसकी सहायक कंपनी जेपी इंफ्राटेक के मामले में सामने आईं। अगस्त 2017 में कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की गई। बाद में सुरक्षा समूह ने समाधान प्रक्रिया के तहत जेपी इंफ्राटेक के अधिग्रहण की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, इससे पूरे जेपी समूह की वित्तीय परेशानियां खत्म नहीं हुईं। समूह की प्रमुख कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड भी भारी कर्ज के कारण संकट में फंस गई। 3 जून 2024 को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की इलाहाबाद पीठ ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के खिलाफ कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। इस मामले में वित्तीय लेनदारों ने करीब 57,185 करोड़ रुपये के बकाये का दावा किया था। इसके बाद कंपनी के कारोबार और संपत्तियों के समाधान के लिए बोली प्रक्रिया शुरू हुई। कई बड़े कारोबारी समूहों ने कंपनी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। ## वेदांता ने लगाई बड़ी बोली, लेकिन अदाणी ने मारी बाजी जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण की प्रक्रिया में वेदांता समूह और अदाणी समूह समेत कई कंपनियों ने हिस्सा लिया। सितंबर 2025 में वेदांता समूह की 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की बोली की खबर सामने आई थी। इससे माना जा रहा था कि कंपनी का नियंत्रण अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह के पास जा सकता है। हालांकि, बाद में समाधान प्रक्रिया में स्थिति बदल गई। नवंबर 2025 में वित्तीय लेनदारों ने अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस प्रस्ताव को कर्जदाताओं के करीब 89 फीसदी वोट मिले। इसके बाद 17 मार्च 2026 को NCLT की इलाहाबाद पीठ ने अदाणी एंटरप्राइजेज की समाधान योजना को मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता साफ हो गया। हालांकि, वेदांता समूह ने इस फैसले को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में चुनौती दी थी। मई 2026 में NCLAT ने वेदांता की अपील खारिज कर दी। इससे अदाणी समूह के अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ने का रास्ता मिला। ## अब अदाणी समूह के नियंत्रण में जेपी की संपत्तियां जयप्रकाश एसोसिएट्स के समाधान के बाद समूह की कई संपत्तियां और कारोबार अदाणी समूह की रणनीति का हिस्सा बन गए हैं। अदाणी समूह की अलग-अलग कंपनियां जेपी समूह की विभिन्न कारोबारी इकाइयों और परिसंपत्तियों में हिस्सेदारी हासिल कर रही हैं। इसी क्रम में अदाणी पावर ने जेपी पावर से जुड़ी हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया। वहीं, जेपी समूह के कुछ सीमेंट प्लांटों को अदाणी समूह ने डालमिया भारत को बेचने का फैसला किया। इस तरह जिस जेपी समूह ने कभी उत्तर भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई थी, उसका कारोबारी स्वरूप अब पूरी तरह बदल चुका है। जयप्रकाश गौड़ की कहानी कारोबार की दुनिया में बड़े सपने, तेजी से विस्तार और वित्तीय अनुशासन के महत्व को समझाती है। महज 10 हजार रुपये की बचत से शुरू हुआ सफर देश के बड़े कारोबारी साम्राज्य तक पहुंचा, लेकिन भारी कर्ज और नकदी की कमी ने अंततः इस साम्राज्य को दिवालिया प्रक्रिया तक पहुंचा दिया। **Source:** उपलब्ध कारोबारी रिपोर्टों और दिवालिया समाधान प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी पर आधारित। jp-associates-jayprakash-gaur-rise-fall-adani-takeover-story
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Reading: Market Cues: निफ्टी के लिए 24,200 पर तत्काल सपोर्ट, इसके नीचे जाने पर आ सकती है भारी गिरावट
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Market Cues: निफ्टी के लिए 24,200 पर तत्काल सपोर्ट, इसके नीचे जाने पर आ सकती है भारी गिरावट

Namam Sharma
Last updated: 2026/08/18 at 9:05 पूर्वाह्न
Namam Sharma - Senior Editor – Newsjagran
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9 Min Read
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Market Cues: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार के दौरान निवेशकों की नजर निफ्टी और बैंक निफ्टी के अहम तकनीकी स्तरों पर रहेगी। पिछले कारोबारी सत्र यानी 17 अगस्त को निफ्टी लगातार पांचवें ट्रेडिंग सेशन में गिरावट के साथ बंद हुआ। हालांकि, दिन के निचले स्तरों से इंडेक्स में कुछ रिकवरी देखने को मिली। मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निफ्टी अभी शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे कारोबार कर रहा है और बाजार में मंदी का मोमेंटम धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है।

Contents
लगातार पांचवें दिन गिरा निफ्टीनिफ्टी 50 के अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंसपिवट पॉइंट के आधार पर सपोर्टपिवट पॉइंट के आधार पर रेजिस्टेंसनिफ्टी के टेक्निकल संकेत क्या बता रहे हैं?बैंक निफ्टी में क्या है सेटअप?बैंक निफ्टी के पिवट पॉइंट लेवलफाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवलIndia VIX में हल्की बढ़तNifty Put-Call Ratio में मामूली सुधारF&O बैन में शामिल स्टॉक्सआज की ट्रेडिंग रणनीति क्या हो सकती है?

ऐसे में निफ्टी के लिए 24,200 का स्तर तत्काल सपोर्ट के तौर पर बेहद अहम हो गया है। अगर इंडेक्स इस स्तर के नीचे टिकता है तो बिकवाली का दबाव तेज हो सकता है और निफ्टी के 24,000 के स्तर की ओर फिसलने की आशंका बढ़ जाएगी। वहीं, ऊपर की तरफ 24,400-24,500 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस के रूप में काम कर सकता है।

लगातार पांचवें दिन गिरा निफ्टी

17 अगस्त को निफ्टी 50 में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट जारी रही और इंडेक्स 0.32 फीसदी टूटकर 24,288 के स्तर पर बंद हुआ। हालांकि, कारोबार के दूसरे हिस्से में निचले स्तरों से खरीदारी देखने को मिली, जिससे इंडेक्स ने अपनी कुछ गिरावट कम की।

टेक्निकल संकेतों की बात करें तो निफ्टी अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे आ चुका है। इसके अलावा इंडेक्स बोलिंगर बैंड्स की मिडलाइन से भी नीचे कारोबार कर रहा है। यह संकेत देता है कि फिलहाल शॉर्ट टर्म में बाजार पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, निफ्टी अभी भी 50-डे और 100-डे EMA के ऊपर है, इसलिए इन स्तरों को आगे महत्वपूर्ण सपोर्ट के तौर पर देखा जा सकता है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक निफ्टी 24,400-24,500 के ऊपर मजबूती के साथ नहीं निकलता, तब तक बाजार में सतर्कता बरतना बेहतर होगा। दूसरी तरफ, 24,200 के नीचे निर्णायक ब्रेकडाउन बाजार की कमजोरी को और बढ़ा सकता है।

निफ्टी 50 के अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस

निफ्टी 50: 24,288

पिवट पॉइंट के आधार पर सपोर्ट

  • 24,241
  • 24,209
  • 24,158

पिवट पॉइंट के आधार पर रेजिस्टेंस

  • 24,342
  • 24,374
  • 24,425

इन स्तरों के अलावा 24,200 को तत्काल सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो 24,000 की तरफ दबाव बढ़ सकता है। वहीं, 24,400-24,500 का जोन पार करने पर निफ्टी में शॉर्ट टर्म रिकवरी मजबूत हो सकती है।

निफ्टी के टेक्निकल संकेत क्या बता रहे हैं?

डेली टाइमफ्रेम पर निफ्टी ने लोअर शैडो वाली बेयरिश कैंडल बनाई है। इसका मतलब है कि निचले स्तरों पर खरीदारी जरूर आई, लेकिन बाजार में कुल मिलाकर कमजोरी बनी हुई है।

निफ्टी अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज और बोलिंगर बैंड्स की मिडलाइन से नीचे आ गया है। यह शॉर्ट टर्म ट्रेंड में कमजोरी की ओर इशारा करता है। हालांकि, इंडेक्स अभी 50-डे और 100-डे EMA के ऊपर बना हुआ है, जो आगे महत्वपूर्ण सपोर्ट का काम कर सकते हैं।

मोमेंटम इंडिकेटर्स भी बाजार में सावधानी का संकेत दे रहे हैं। RSI घटकर 49.26 पर आ गया है। वहीं, MACD में बेयरिश क्रॉसओवर और मजबूत हुआ है। इसका हिस्टोग्राम लगातार तीसरे सेशन में बढ़ा है। इन संकेतों से पता चलता है कि शॉर्ट टर्म में निफ्टी का ट्रेंड कमजोर है और मंदी का मोमेंटम धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है।

बैंक निफ्टी में क्या है सेटअप?

बैंक निफ्टी ने 17 अगस्त के कारोबार में दिन के शुरुआती नुकसान को काफी हद तक रिकवर किया और अंत में 7 अंक की बढ़त के साथ 57,498 के स्तर पर बंद हुआ।

डेली चार्ट पर बैंक निफ्टी ने लंबी अपर और लोअर शैडो वाली बुलिश कैंडल बनाई। यह कैंडल हाई वेव कैंडलस्टिक पैटर्न जैसी दिखाई देती है, जो बाजार में तेजड़ियों और मंदड़ियों के बीच असमंजस की स्थिति का संकेत देती है।

बैंक निफ्टी अपने शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से नीचे आ गया है, लेकिन मीडियम और लॉन्ग-टर्म मूविंग एवरेज से अभी भी काफी ऊपर कारोबार कर रहा है। इसलिए बैंकिंग इंडेक्स के ओवरऑल स्ट्रक्चर को फिलहाल पॉजिटिव माना जा सकता है, लेकिन शॉर्ट टर्म में सावधानी जरूरी है।

बैंक निफ्टी के पिवट पॉइंट लेवल

रेजिस्टेंस:

  • 57,702
  • 57,852
  • 58,096

सपोर्ट:

  • 57,215
  • 57,064
  • 56,821

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल

रेजिस्टेंस:

  • 57,685
  • 58,137

सपोर्ट:

  • 57,135
  • 56,870

बैंक निफ्टी का RSI फिलहाल एक सीमित दायरे में ऊपर-नीचे हो रहा है। इससे संकेत मिलता है कि इंडेक्स में फिलहाल किसी एक दिशा की मजबूत पकड़ नहीं है और बाजार कुछ समय तक रेंज में रह सकता है।

India VIX में हल्की बढ़त

बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला India VIX लगातार चार कारोबारी सत्रों तक गिरने के बाद 0.18 फीसदी बढ़कर 11.325 पर पहुंच गया। हालांकि, मामूली बढ़त के बावजूद VIX अभी भी काफी निचले स्तर पर बना हुआ है।

कम VIX आम तौर पर यह संकेत देता है कि बाजार में निकट अवधि की अनिश्चितता बहुत ज्यादा नहीं है। हालांकि, इंडेक्स में लगातार गिरावट और VIX में हल्की बढ़त को देखते हुए ट्रेडर्स को अचानक बढ़ने वाली वोलैटिलिटी के लिए तैयार रहना चाहिए।

Nifty Put-Call Ratio में मामूली सुधार

17 अगस्त को निफ्टी का Put-Call Ratio (PCR) बढ़कर 0.99 हो गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 0.98 था।

PCR में 0.7 से ऊपर का स्तर सामान्य तौर पर बाजार में अपेक्षाकृत सकारात्मक सेंटीमेंट का संकेत माना जाता है। वहीं, 1 के आसपास पहुंचना भी बाजार के मूड में सुधार की ओर इशारा कर सकता है। हालांकि, केवल PCR के आधार पर बाजार की दिशा तय करना उचित नहीं है। इसे प्राइस एक्शन और दूसरे टेक्निकल इंडिकेटर्स के साथ देखना जरूरी है।

F&O बैन में शामिल स्टॉक्स

F&O सेगमेंट में उन शेयरों को ट्रेडिंग प्रतिबंध के तहत रखा जाता है जिनमें ओपन पोजीशन मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से अधिक पहुंच जाती है।

F&O बैन में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

F&O बैन में पहले से शामिल स्टॉक:

  • बंधन बैंक
  • लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC)
  • मनप्पुरम फाइनेंस
  • SAIL

F&O बैन से बाहर हुए स्टॉक: कोई नहीं

आज की ट्रेडिंग रणनीति क्या हो सकती है?

मौजूदा टेक्निकल सेटअप को देखते हुए ट्रेडर्स के लिए 24,200 का स्तर सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन में से एक रहेगा। अगर निफ्टी इस स्तर के ऊपर बना रहता है और 24,400 के ऊपर मजबूती दिखाता है, तो रिकवरी की कोशिश देखने को मिल सकती है। इसके बाद 24,500 का स्तर अगला अहम रेजिस्टेंस होगा।

इसके विपरीत, अगर निफ्टी 24,200 के नीचे फिसलता है और वहां टिकता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में 24,000 का स्तर अगला महत्वपूर्ण लक्ष्य/सपोर्ट बन सकता है।

बैंक निफ्टी में 57,200-57,000 का जोन अहम सपोर्ट के रूप में देखा जा सकता है, जबकि 57,700-58,100 का क्षेत्र ऊपर की तरफ महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस रहेगा।

कुल मिलाकर, बाजार का शॉर्ट-टर्म सेटअप अभी कमजोर नजर आ रहा है। निफ्टी में लगातार पांच सत्रों की गिरावट, शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज के नीचे कारोबार और कमजोर होते मोमेंटम इंडिकेटर्स को देखते हुए ट्रेडर्स को जल्दबाजी में पोजीशन लेने से बचना चाहिए। 24,200 के नीचे कमजोरी और 24,400-24,500 के ऊपर मजबूती—दोनों स्तर बाजार की अगली दिशा के लिए बेहद अहम रहेंगे।

डिस्क्लेमर: NewsJagran.in पर प्रकाशित बाजार संबंधी विचार और विश्लेषण विशेषज्ञों के निजी विचारों पर आधारित हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट किसी भी निवेश निर्णय के लिए जिम्मेदार नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने सर्टिफाइड वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।

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By Namam Sharma Senior Editor – Newsjagran
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नमम शर्मा, Newsjagran के सीनियर एडिटर हैं। बिज़नेस न्यूज़, कमोडिटी बाज़ार, सोना-चांदी भाव, पेट्रोल-डीजल रेट और फाइनेंस में 9 साल का अनुभव। हिंदी डिजिटल पत्रकारिता के जानकार।
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