Gold Silver Price: अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बाजार का नजरिया बदलने के बावजूद इंटरनेशनल मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों में फिलहाल ज्यादा हलचल नहीं दिख रही है। हालिया अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को कमजोर किया है। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली नीति दिशा और बैठक के मिनट्स पर है।
सोना और चांदी दोनों ही नॉन-यील्डिंग एसेट्स हैं, यानी इनसे बॉन्ड या बैंक डिपॉजिट की तरह नियमित ब्याज नहीं मिलता। इसलिए जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो निवेशकों के लिए ब्याज देने वाली संपत्तियां अधिक आकर्षक हो सकती हैं। वहीं, दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कम होने पर सोना-चांदी रखने की अवसर लागत घटती है और इनकी मांग को सपोर्ट मिल सकता है।
इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी का हाल
कॉमेक्स पर सोना $4,467.70 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था। यह पिछले बंद भाव $4,473.40 प्रति औंस से करीब 0.13 फीसदी नीचे था। कारोबार के दौरान सोने ने $4,493.10 प्रति औंस का ऊपरी स्तर और $4,466 प्रति औंस का निचला स्तर छुआ।
इसी तरह चांदी करीब $66.07 प्रति औंस पर रही। यह पिछले बंद भाव $65.895 प्रति औंस से लगभग 0.24 फीसदी नीचे थी। दिन के दौरान चांदी ने $66.685 प्रति औंस का हाई और $65.760 प्रति औंस का लो बनाया।
स्पॉट मार्केट में हालांकि सोने में करीब 0.2 फीसदी की तेजी देखी गई और यह $4,424.28 प्रति औंस तक पहुंचा। वहीं दिसंबर डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी करीब 0.2 फीसदी की बढ़त रही। स्पॉट सिल्वर करीब 0.9 फीसदी बढ़कर $66.40 प्रति औंस पर पहुंच गई।
सोने और चांदी की कीमतों को क्या दे रहा है सपोर्ट?
1. अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदली उम्मीद
सोने और चांदी की कीमतों के लिए इस समय सबसे अहम फैक्टर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति है। हालिया अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने सितंबर में दरों में बढ़ोतरी की संभावना को कमजोर किया है।
जुलाई में रोजगार के कमजोर आंकड़े, कंज्यूमर प्राइस इंफ्लेशन में नरमी और कमजोर रिटेल बिक्री ने बाजार को अमेरिकी मौद्रिक नीति के संभावित रुख का दोबारा आकलन करने पर मजबूर किया है।
जब ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद कम होती है तो सोना-चांदी जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स की अवसर लागत घट जाती है। इससे निवेशकों के बीच इनकी मांग बढ़ सकती है।
2. कमजोर अमेरिकी डॉलर से बुलियन को फायदा
अमेरिकी डॉलर कई प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले कमजोर बना हुआ है। डॉलर की कमजोरी आम तौर पर सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है।
डॉलर कमजोर होने पर दूसरी मुद्राओं में कमाई करने वाले निवेशकों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है। इससे इसकी मांग को सपोर्ट मिल सकता है। यही प्रभाव चांदी की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
फेड के मिनट्स पर निवेशकों की नजर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति इस समय सोने और चांदी के लिए बड़ा ट्रिगर बनी हुई है। 12 से 17 अगस्त के बीच हुए रॉयटर्स के सर्वे में ज्यादातर अर्थशास्त्रियों ने अनुमान जताया कि फेड 2026 के अंत तक अपनी मुख्य ब्याज दर में बदलाव नहीं करेगा।
अब बाजार की नजर फेड की हालिया बैठक के मिनट्स पर है, जो 19 अगस्त को जारी होने वाले हैं। इन मिनट्स से यह समझने में मदद मिल सकती है कि फेड के अधिकारी महंगाई, रोजगार और ब्याज दरों के भविष्य को लेकर क्या सोच रहे हैं।
अगर मिनट्स में फेड का रुख नरम यानी डोविश दिखाई देता है तो सोने और चांदी को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है। इसके उलट, अगर फेड का रुख सख्त यानी हॉकिश रहता है तो डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी आ सकती है, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव बन सकता है।
चांदी के लिए सिर्फ ब्याज दरें ही नहीं हैं अहम
चांदी की कीमतों को सोने की तुलना में एक अतिरिक्त सपोर्ट औद्योगिक मांग से मिलता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई अन्य इंडस्ट्रियल सेक्टर में चांदी का इस्तेमाल होता है।
इसलिए चांदी की कीमत पर एक तरफ ब्याज दर और डॉलर जैसे मैक्रो फैक्टर असर डालते हैं, तो दूसरी तरफ औद्योगिक मांग भी इसकी दिशा तय करती है। यही वजह है कि कई बार चांदी की चाल सोने से अलग दिखाई दे सकती है।
निवेशकों को किन संकेतों पर नजर रखनी चाहिए?
आने वाले दिनों में कीमती धातुओं के निवेशकों के लिए अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और फेड की कमेंट्री बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। खास तौर पर सितंबर की मौद्रिक नीति बैठक से पहले महंगाई और रोजगार के आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
तकनीकी नजरिए से बाजार की कमेंट्री के मुताबिक, सोने के लिए $4,450-$4,460 प्रति औंस का क्षेत्र अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है। वहीं चांदी के लिए $63 प्रति औंस का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारतीय बाजार में क्यों अलग हो सकती है कीमत?
भारतीय निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा घरेलू बाजार में बिल्कुल उसी अनुपात में दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है।
भारत में कीमती धातुओं की कीमतों पर रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट, इंपोर्ट कॉस्ट, टैक्स, स्थानीय मांग और बाजार की स्थितियों का भी असर पड़ता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतों में सीमित बढ़त देखने को मिल सकती है।
आगे क्या है सोने-चांदी का आउटलुक?
फिलहाल सोने और चांदी को कई फैक्टर्स से सपोर्ट मिल रहा है। अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों में कमी, कमजोर डॉलर और लगातार बनी जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता कीमती धातुओं के लिए सकारात्मक माहौल बना रहे हैं।
हालांकि, फेड के मिनट्स और आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा बदल सकते हैं। इसलिए निवेशकों को केवल एक फैक्टर के आधार पर सोने या चांदी में फैसला लेने के बजाय ब्याज दर, डॉलर, बॉन्ड यील्ड, महंगाई और वैश्विक जोखिम सभी संकेतकों पर नजर रखनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए विचार और बाजार संबंधी जानकारी केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं। यह किसी भी तरह की निवेश सलाह नहीं है। सोना, चांदी या किसी अन्य एसेट में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।


