Jharkhand Students Protest: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के साथ-साथ 2014 से आउटसोर्स एजेंसी TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं और उससे जुड़े परिणामों की भी जांच कराने का फैसला किया है। सरकार के इस ऐलान के बाद आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 16 दिन से जारी अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है।
JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने का फैसला
झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लंबे आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया।
JSSC-CGL यानी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा लंबे समय से विवादों में रही है। अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे थे। छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षा रद्द करना और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराना शामिल था।
सरकार के फैसले के बाद अब इस परीक्षा से जुड़े उम्मीदवारों और भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण को लेकर भी स्थिति बदल गई है। परीक्षा रद्द होने से उन अभ्यर्थियों पर भी असर पड़ेगा, जिन्होंने परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल की है।
2014 से TDPL की परीक्षाएं भी जांच के दायरे में
सरकार ने सिर्फ JSSC-CGL पर फैसला नहीं लिया है। आउटसोर्स एजेंसी TDPL यानी TSR Data Processing Private Limited के जरिए आयोजित परीक्षाओं और जारी किए गए परिणामों को भी जांच के दायरे में लाने की घोषणा की गई है।
सरकार के मुताबिक 2014 से TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं की जांच की जाएगी। इसका मतलब है कि जांच केवल हाल की भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रहने वाली है। पुराने वर्षों में एजेंसी के माध्यम से आयोजित हुई परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को भी देखा जाएगा।
यह जांच इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि छात्र संगठन लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कहीं परीक्षा प्रक्रिया, परिणाम तैयार करने या भर्ती से जुड़े किसी अन्य चरण में अनियमितता तो नहीं हुई।
देवेंद्र नाथ महतो ने खत्म की 16 दिन की भूख हड़ताल
छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल देवेंद्र नाथ महतो पिछले 16 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। उनका आंदोलन JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग को लेकर चल रहा था।
सरकार की ओर से JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की जांच के फैसले के बाद देवेंद्र महतो ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी।
हालांकि, आंदोलनकारी छात्रों की सभी मांगें पूरी होने का दावा अभी नहीं किया गया है। छात्र संगठनों की एक प्रमुख मांग पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI से कराने की भी है। इसी वजह से आंदोलन को लेकर आगे की स्थिति जांच और सरकार के अगले कदमों पर निर्भर करेगी।
सरकार ने परीक्षा सुधार समिति बनाने का भी ऐलान किया
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भर्ती परीक्षाओं में सुधार के लिए एक परीक्षा सुधार समिति गठित करने की घोषणा भी की है। इस समिति की अध्यक्षता वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशल करेंगे।
सरकार का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार करना और भविष्य में ऐसी शिकायतों को रोकने के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार करना है।
राज्य सरकार पहले ही प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने के लिए कानून लागू कर चुकी है। सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।
हेमंत सोरेन ने परीक्षा गिरोह को लेकर जताई चिंता
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य में काम कर रही कुछ कंपनियां एक बड़े परीक्षा गिरोह से जुड़ी हो सकती हैं। उन्होंने भर्ती परीक्षाओं से संबंधित मामलों को गंभीरता से लेने की बात कही।
इस पूरे मामले में सरकार की ओर से जांच के जरिए वास्तविक स्थिति सामने लाने की कोशिश की जाएगी। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता
JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले से उन उम्मीदवारों में भी चिंता बढ़ गई है, जिन्होंने परीक्षा पास करने के बाद सरकारी नौकरी हासिल की है।
रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे उम्मीदवारों ने झारखंड सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि यदि पूरी परीक्षा रद्द कर दी जाती है तो करीब 2,000 उम्मीदवारों की नौकरी प्रभावित हो सकती है।
इन अभ्यर्थियों के सामने अब अपने भविष्य को लेकर कानूनी और प्रशासनिक दोनों तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि जिन अभ्यर्थियों से संबंधित परीक्षा को निरस्त किया गया है, वे कानूनी रास्ता अपनाने के लिए स्वतंत्र हैं।
यानी अब इस मामले में अदालत की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। परीक्षा रद्द होने के बाद नियुक्त अभ्यर्थियों के अधिकार, भर्ती प्रक्रिया की वैधता और आगे की कार्रवाई जैसे मुद्दों पर कानूनी प्रक्रिया के जरिए स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
छात्रों की मुख्य मांग क्या थी?
झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें कई स्तरों पर रही हैं। इनमें सबसे अहम मांग JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की थी।
छात्र संगठन पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग भी कर रहे हैं। उनका तर्क है कि जांच ऐसी एजेंसी से होनी चाहिए जो पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच कर सके।
आंदोलनकारी अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जिम्मेदारी तय करने की मांग भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकारी नौकरी की परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है।
सरकार के फैसले के बाद भी आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं
राज्य सरकार ने छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक यानी JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला जरूर लिया है, लेकिन आंदोलन पूरी तरह खत्म होने की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
‘JPSC-JSSC Reforms Manch’ से जुड़े आंदोलनकारी CBI जांच की मांग पर अब भी कायम हैं। संगठन का कहना है कि जब तक उनकी अन्य प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रह सकता है।
सरकार की ओर से आंदोलनकारी छात्रों से प्रदर्शन खत्म करने की अपील की गई है। राज्य सरकार का कहना है कि उसने छात्रों की प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है और अब परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
अब 2014 से लेकर अब तक की परीक्षाओं पर नजर
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू TDPL से जुड़ी 2014 से आयोजित परीक्षाओं की जांच है। अगर जांच का दायरा वास्तव में इतने लंबे समय तक की भर्ती परीक्षाओं तक जाता है, तो इससे पुराने परीक्षा परिणाम और भर्ती प्रक्रियाएं भी जांच के दायरे में आ सकती हैं।
जांच में परीक्षा आयोजन, प्रक्रिया, परिणाम और भर्ती से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को देखा जा सकता है। यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, फिलहाल जांच के अंतिम परिणाम का इंतजार करना होगा। किसी भी परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
JSSC-CGL विवाद में आगे क्या होगा?
सरकार के फैसले के बाद अब इस पूरे मामले में तीन चीजें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहेंगी। पहली, JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद आगे की भर्ती प्रक्रिया किस तरह होगी। दूसरी, TDPL के जरिए 2014 से आयोजित परीक्षाओं की जांच में क्या सामने आता है। और तीसरी, छात्रों की CBI जांच की मांग पर सरकार का रुख क्या रहता है।
इसके अलावा परीक्षा रद्द होने से प्रभावित नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों के मामले में कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी। यदि प्रभावित उम्मीदवार अदालत का रुख करते हैं तो इस विवाद का एक बड़ा हिस्सा न्यायिक प्रक्रिया के जरिए तय हो सकता है।
फिलहाल झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने, TDPL से जुड़ी परीक्षाओं और परिणामों की जांच कराने तथा परीक्षा सुधार समिति गठित करने का फैसला लिया है। वहीं, छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 16 दिन बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है।
अब सभी की नजर जांच की प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों पर रहेगी। यही तय करेगा कि झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए सरकार कौन से नए कदम उठाती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं का उल्लेख आंदोलन और उपलब्ध जानकारी के संदर्भ में किया गया है। किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष जांच के परिणाम आने के बाद ही माना जाना चाहिए।


