Success Story of Vibhor and Ishita Jain: राजस्थान के जयपुर के रहने वाले विभोर जैन और उनकी पत्नी इशिता ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर खेती और पशुपालन को अपना करियर बनाया। दोनों का यह फैसला आज करोड़ों रुपये के कारोबार में बदल चुका है। जयपुर से करीब 35 किलोमीटर दूर उनका ‘किनाया ऑर्गेनिक फार्म्स’ सस्टेनेबल फार्मिंग और पशुपालन का उदाहरण बन गया है।
2018 में शुरू हुए इस फार्म में अब करीब 100 गिर गायें हैं। यहां रोजाना 250-300 लीटर A2 दूध का उत्पादन होता है और पारंपरिक बिलौना विधि से करीब 9 लीटर घी तैयार किया जाता है। फार्म का मासिक रेवेन्यू 18-20 लाख रुपये के आसपास है। इस हिसाब से सालाना कारोबार करीब ₹2.16 करोड़ से ₹2.4 करोड़ तक पहुंच गया है।
9-टू-5 की नौकरी नहीं करना चाहते थे विभोर

विभोर ने बेंगलुरु से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया है, जबकि उनकी पत्नी इशिता ने नागपुर से बीटेक और पुणे से एमबीए किया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों के सामने कॉर्पोरेट करियर का रास्ता था, लेकिन विभोर पारंपरिक 9-टू-5 नौकरी नहीं करना चाहते थे।
एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह शुरू से स्पष्ट थे कि उन्हें 9-टू-5 की कॉर्पोरेट नौकरी नहीं करनी है। इसी दौरान उनके परिवार में दो गायें आईं और विभोर की दिलचस्पी देसी गिर गायों की नस्ल में बढ़ने लगी।
उन्होंने महसूस किया कि देश में शुद्ध गिर गायों की संख्या सीमित है और इस नस्ल को संरक्षित करने के साथ-साथ इससे जुड़े उत्पादों के लिए बेहतर बाजार भी बनाया जा सकता है।
गुजरात जाकर सीखा पशुपालन का तरीका
2017 में विभोर गुजरात के काठियावाड़ पहुंचे। यहां उन्होंने पीढ़ियों से पशुपालन कर रहे परिवारों से देसी गायों को पालने और उनकी देखभाल के तरीके सीखे।
उनका मानना था कि ग्रामीण इलाकों में अच्छी नस्ल की गायें और पारंपरिक ज्ञान तो मौजूद है, लेकिन किसानों और पशुपालकों को शहरी ग्राहकों तक सीधी पहुंच नहीं मिलती। इसी गैप को उन्होंने बिजनेस के अवसर के रूप में देखा।
2018 में उन्होंने जयपुर के पास पट्टे पर जमीन लेकर करीब 20 गिर गायों के साथ अपना काम शुरू किया। शुरुआती वर्षों में उन्होंने पशुपालन के साथ बाजार, ग्राहक और प्रोडक्ट क्वालिटी को समझने पर ध्यान दिया।
किराए की जमीन से अपनी जमीन तक का सफर

करीब तीन साल तक किराए की जमीन पर काम करने के बाद विभोर ने जयपुर से लगभग 35 किलोमीटर दूर अपनी जमीन खरीदी। यहां उन्होंने सिर्फ डेयरी फार्म बनाने के बजाय खेती, पशुपालन और प्राकृतिक संसाधनों को एक-दूसरे से जोड़ने वाला मॉडल तैयार किया।
2022 में इशिता ने भी अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह इस बिजनेस में शामिल हो गईं। इसके बाद दोनों ने मिलकर मल्टी-लेवल एग्रोफॉरेस्ट्री और सर्कुलर फार्मिंग मॉडल विकसित किया।
उन्होंने पूसा संस्थान और इंडो-इजरायल सेंटरों से पौधे लेकर फार्म पर 2,000 से ज्यादा पेड़ लगाए। इनमें करीब 40 किस्मों के 500 से ज्यादा आम के पेड़ और 300 से अधिक सफेद चंदन के पेड़ भी शामिल हैं।
खेती और पशुपालन को जोड़ा
फार्म की खासियत यह है कि यहां पशुपालन को खेती से अलग नहीं रखा गया है। पेड़ों की कतारों के बीच गायों के लिए सुपर नेपियर, ज्वार, बाजरा, सहजन और शतावरी जैसी फसलें उगाई जाती हैं।
गायों से मिलने वाले गोबर का इस्तेमाल भी किया जाता है। इससे बायोगैस तैयार की जाती है और जैविक खाद के रूप में भी इसका इस्तेमाल खेतों में किया जाता है। इस तरह फार्म में उपलब्ध संसाधनों को दोबारा उपयोग करने की कोशिश की जाती है।
यह मॉडल लागत कम करने के साथ-साथ खेती और पशुपालन को एक-दूसरे का पूरक बनाने में मदद करता है।
दूध के साथ कई वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट

आज किनाया ऑर्गेनिक फार्म्स में करीब 100 गिर गायें हैं। यहां रोजाना लगभग 250-300 लीटर दूध का उत्पादन होता है।
इसमें से करीब 30-35 फीसदी दूध लिक्विड फॉर्म में बेचा जाता है। बाकी दूध का इस्तेमाल पारंपरिक बिलौना विधि से घी बनाने में किया जाता है। इससे रोजाना करीब 9 लीटर घी तैयार होता है।
फार्म पर सिर्फ दूध और घी ही नहीं बेचा जाता। यहां लकड़ी की घानी से सरसों, मूंगफली, नारियल और तिल का तेल तैयार किया जाता है। इसके अलावा -60 डिग्री सेल्सियस पर फ्रीज-ड्राय तकनीक से कोलोस्ट्रम पाउडर और जैविक सब्जियां भी तैयार की जाती हैं।
इस तरह कपल ने एक ही प्रोडक्ट पर निर्भर रहने के बजाय कई वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट तैयार किए हैं।
₹150 लीटर दूध और ₹3,490 लीटर घी
किनाया फार्म्स अपने A2 दूध को करीब ₹150 प्रति लीटर की कीमत पर बेचता है। वहीं, बिलौना घी की कीमत करीब ₹3,490 प्रति लीटर बताई गई है।
दूध और सब्जियों की सप्लाई मुख्य रूप से जयपुर के स्थानीय बाजार में की जाती है। दूसरी तरफ घी और अन्य वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की डिलीवरी देश के अलग-अलग हिस्सों में की जाती है।
यानी कारोबार का मॉडल सिर्फ स्थानीय डेयरी बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रीमियम और प्रोसेस्ड प्रोडक्ट्स के जरिए व्यापक बाजार तक पहुंच बनाया गया है।
अब सालाना ₹2.4 करोड़ तक का कारोबार

वर्तमान में किनाया ऑर्गेनिक फार्म्स का मासिक रेवेन्यू करीब ₹18-20 लाख बताया जाता है। इसमें मवेशियों की बिक्री से होने वाली आय शामिल नहीं है।
इस रन रेट के आधार पर फार्म का सालाना कारोबार लगभग ₹2.16 करोड़ से ₹2.4 करोड़ तक पहुंचता है।
विभोर और इशिता की कहानी दिखाती है कि पारंपरिक खेती और पशुपालन को आधुनिक बिजनेस मॉडल के साथ जोड़ा जाए तो इससे बड़ा कारोबार खड़ा किया जा सकता है। हालांकि किसी भी कृषि या डेयरी बिजनेस में निवेश, जमीन, पशु-स्वास्थ्य, चारा, श्रम, बाजार और संचालन लागत को ध्यान में रखना जरूरी है।
क्या है इस Success Story से सीख?
विभोर और इशिता की यात्रा से कारोबार शुरू करने वालों को कुछ महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं। पहला, किसी पारंपरिक क्षेत्र में भी नए बिजनेस अवसर तलाशे जा सकते हैं। दूसरा, सिर्फ कच्चा उत्पाद बेचने के बजाय वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट तैयार करके कमाई के नए रास्ते बनाए जा सकते हैं।
तीसरा, खेती और पशुपालन को अलग-अलग गतिविधियों के बजाय एक इंटीग्रेटेड मॉडल के रूप में चलाया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों ने नौकरी छोड़ने के बाद तुरंत बड़े स्तर पर निवेश करने के बजाय पहले अनुभव हासिल किया और फिर धीरे-धीरे अपना मॉडल विकसित किया।
विभोर और इशिता का मुख्य उद्देश्य लोगों को देसी गायों और A2 दूध के बारे में जागरूक करना है। उनकी कहानी बताती है कि सही रिसर्च, लंबे समय की योजना और बाजार की जरूरत को समझकर पारंपरिक क्षेत्र में भी एक सफल बिजनेस मॉडल बनाया जा सकता है।

