Share Market Crash: घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को बिकवाली का दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स इंट्रा-डे कारोबार में 580 प्वाइंट्स से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी भी फिसलकर 24,300 के नीचे पहुंच गया। बाजार में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब सरकारी बैंकों के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिल रही है। इसके बावजूद आईटी और एफएमसीजी जैसे बड़े सेक्टर्स की कमजोरी ने बाजार की धारणा पर दबाव बनाए रखा।
बुधवार को करीब 11:11 बजे सेंसेक्स 506.48 अंक यानी 0.65 फीसदी की गिरावट के साथ 77,647.77 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 भी 159.70 अंक यानी 0.65 फीसदी फिसलकर 24,312.00 पर आ गया। इससे पहले इंट्रा-डे कारोबार में सेंसेक्स 580.45 अंक टूटकर 77,573.80 और निफ्टी 178.35 अंक गिरकर 24,293.35 के स्तर तक पहुंच गया।
ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि आखिर सरकारी बैंकों की तेजी के बावजूद पूरे बाजार में कमजोरी क्यों दिखाई दे रही है।
Share Market Crash: अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता
शेयर बाजार में आज की गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव शामिल है। होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति सामान्य होने को लेकर अनिश्चितता ने ग्लोबल मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर किए गए दावों और ईरान की ओर से इसके विरोध के बीच तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच मुआवजे और अन्य मांगों को लेकर मतभेद भी किसी संभावित समाधान को मुश्किल बना रहे हैं।
इसके अलावा यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से एक कमर्शियल जहाज पर हमला किए जाने की खबर ने समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इस घटना में चार क्रू सदस्यों की मौत हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका के कारण निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाते हुए नजर आ रहे हैं।
भूराजनीतिक तनाव का असर सिर्फ शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहता। इससे सप्लाई चेन, शिपिंग लागत, ऊर्जा कीमतों और महंगाई की संभावनाओं पर भी असर पड़ सकता है। यही वजह है कि ऐसे समय में निवेशक बाजार में अधिक सतर्क हो जाते हैं।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमत बनी दूसरी बड़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने पर देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इससे रुपये, महंगाई और कंपनियों की लागत पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
तेल की कीमतों में लगातार तेजी बाजार के लिए इसलिए भी चिंता का विषय होती है क्योंकि इससे कई इंडस्ट्रीज की इनपुट कॉस्ट बढ़ सकती है। साथ ही महंगाई के दबाव की स्थिति में ब्याज दरों और आर्थिक नीतियों को लेकर भी बाजार की उम्मीदें प्रभावित हो सकती हैं।
यही कारण है कि क्रूड ऑयल में तेज उछाल को इक्विटी मार्केट के लिए नकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
आईटी और FMCG सेक्टर ने बढ़ाया बाजार पर दबाव
बाजार में आज सबसे दिलचस्प तस्वीर सेक्टोरल स्तर पर दिखाई दे रही है। एक तरफ सरकारी बैंकों के शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ आईटी और एफएमसीजी सेक्टर बाजार की गिरावट को बढ़ा रहे हैं।
निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। इसका मतलब है कि सरकारी बैंकों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। लेकिन केवल एक सेक्टर की तेजी पूरे बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुई।
आईटी सेक्टर में करीब 2 फीसदी की कमजोरी देखी गई। ग्लोबल स्तर पर अनिश्चितता और अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेतों के बीच आईटी शेयरों पर दबाव देखने को मिल रहा है।
एफएमसीजी सेक्टर भी बाजार के लिए कमजोर साबित हुआ। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। एफएमसीजी कंपनियों का बाजार में बड़ा वजन होने के कारण इस सेक्टर की कमजोरी का असर प्रमुख इंडेक्स पर भी पड़ता है।
इसके मुकाबले निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 1 फीसदी की बढ़त में रहा। निफ्टी रियल्टी आधे फीसदी से ज्यादा कमजोर रहा, जबकि निफ्टी प्राइवेट बैंक भी लाल निशान में कारोबार करता नजर आया।
सरकारी बैंकों में तेजी क्यों नहीं संभाल पाई मार्केट?
सरकारी बैंकों में खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन सेंसेक्स और निफ्टी पर कई बड़े सेक्टर्स का प्रभाव होता है। अगर इंडेक्स में ज्यादा वजन रखने वाले सेक्टर एक साथ कमजोर हो जाएं तो किसी एक सेक्टर की तेजी से बाजार की पूरी गिरावट की भरपाई करना मुश्किल होता है।
आज यही स्थिति देखने को मिल रही है। पीएसयू बैंकिंग शेयरों में मजबूत खरीदारी के बावजूद आईटी, एफएमसीजी और कुछ अन्य प्रमुख सेक्टर्स में बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
इसके अलावा वैश्विक स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित कर रहा है। क्रूड ऑयल में तेजी ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है।
आगे बाजार की दिशा किन संकेतों पर निर्भर करेगी?
अब निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़े अगले घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक बाजारों के रुख पर रहेगी। अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तथा क्रूड 90 डॉलर के आसपास या उससे ऊपर बना रहता है, तो भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
दूसरी तरफ, तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने पर बाजार को राहत मिल सकती है। घरेलू स्तर पर भी निवेशक सेक्टरवार प्रदर्शन और कंपनियों के फंडामेंटल पर नजर रखेंगे।
फिलहाल बाजार में गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण नजर आ रहे हैं—अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और आईटी-एफएमसीजी जैसे बड़े सेक्टर्स में कमजोरी। सरकारी बैंकों की तेजी ने बाजार को कुछ सहारा जरूर दिया, लेकिन वह सेंसेक्स और निफ्टी को लाल निशान से बाहर निकालने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी शेयर या निवेश उत्पाद में पैसा लगाने से पहले अपनी रिसर्च करें और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran की ओर से किसी भी निवेश की सलाह या गारंटी नहीं दी जाती है।


