PM Modi message to Gen Z: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 12 अगस्त को युवाओं को सोशल मीडिया और रील्स के दौर में एक अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज का युवा रील्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से काफी प्रभावित है, लेकिन जीवन में सफलता हासिल करने के लिए शॉर्टकट के बजाय लंबे और सार्थक रास्ते को चुनना जरूरी है। पीएम मोदी ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने और दूसरों के संघर्षों से सीख लेने की भी अपील की।
PM Modi message to reel-loving Gen Z: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देश की नई पीढ़ी, खासकर Gen Z को संबोधित करते हुए कहा कि सोशल मीडिया और रील्स के दौर में युवाओं को यह याद रखना चाहिए कि हर चीज तुरंत हासिल नहीं होती।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज सोशल मीडिया का दौर है। रील्स कुछ ही सेकंड में मनोरंजन या जानकारी उपलब्ध करा देती हैं और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स युवाओं का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं। लेकिन वास्तविक जीवन की सफलता का रास्ता इतना छोटा नहीं होता। इसके लिए मेहनत, धैर्य, संघर्ष और लगातार सीखने की जरूरत होती है।
पीएम मोदी ने इसी संदर्भ में कहा कि युवाओं को शॉर्टकट से सावधान रहना चाहिए। उन्होंने रेलवे स्टेशन पर लिखे एक संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि ‘शॉर्टकट आपको नुकसान पहुंचा सकता है।’ प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब युवाओं के बीच Instagram Reels, शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया कंटेंट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।
युवाओं को आत्मकथाएं पढ़ने की सलाह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने की विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की आत्मकथा केवल उसकी निजी जिंदगी की कहानी नहीं होती, बल्कि उसके समय, समाज और परिस्थितियों को समझने का माध्यम भी होती है।
उनके मुताबिक, जब कोई व्यक्ति अपने जीवन के संघर्षों और अनुभवों को खुद लिखता है तो पाठकों को उस दौर को करीब से समझने का मौका मिलता है। इससे युवा यह जान सकते हैं कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद किसी व्यक्ति ने किस तरह अपने लक्ष्य को हासिल किया।
पीएम मोदी ने रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके जीवन में कई मुश्किल परिस्थितियां आईं, लेकिन उन्होंने कभी परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी। उनका सफर युवाओं के लिए इस बात की मिसाल है कि कठिन शुरुआत किसी व्यक्ति की अंतिम मंजिल तय नहीं करती।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को ऐसे लोगों के जीवन से सीखना चाहिए जिन्होंने संघर्ष के बाद सफलता हासिल की। सोशल मीडिया पर कुछ सेकंड में दिखाई देने वाली सफलता की कहानियों के पीछे छिपे वर्षों के संघर्ष को समझना भी उतना ही जरूरी है।
रील्स के दौर में क्यों दिया शॉर्टकट का संदेश?
प्रधानमंत्री की टिप्पणी को मौजूदा डिजिटल दौर से जोड़कर देखा जा रहा है। आज बड़ी संख्या में युवा Instagram और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शॉर्ट वीडियो और रील्स देखते हैं। कई बार सोशल मीडिया पर सफलता बेहद आसान और तुरंत मिलने वाली चीज के रूप में दिखाई जाती है।
हालांकि वास्तविक जिंदगी में किसी भी क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाने के लिए लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ती है। पढ़ाई, नौकरी, कारोबार, खेल या किसी रचनात्मक क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए लगातार प्रयास और असफलताओं से सीखना जरूरी होता है।
पीएम मोदी का संदेश इसी अंतर की ओर इशारा करता है। उनका कहना था कि युवा तत्काल लोकप्रियता या आसान रास्ते के पीछे भागने के बजाय ऐसे रास्ते को चुनें जिससे उनका व्यक्तित्व, ज्ञान और क्षमता लंबे समय में मजबूत हो।
उन्होंने युवाओं को यह भी संदेश दिया कि किसी दूसरे व्यक्ति की उपलब्धि को देखकर केवल उसका परिणाम नहीं देखना चाहिए, बल्कि उसके पीछे की मेहनत और संघर्ष को भी समझना चाहिए।
कोविंद के जीवन को बताया प्रेरणा का स्रोत
प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उनका सफर दृढ़ संकल्प और संघर्ष की मिसाल है। एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना आसान नहीं था।
उन्होंने कोविंद के बचपन की एक दुखद घटना का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने बताया कि बचपन में घर का सामान बचाने की कोशिश के दौरान लगी आग में रामनाथ कोविंद ने अपनी मां को खो दिया था। प्रधानमंत्री के मुताबिक, यह घटना किसी भी व्यक्ति को भीतर से तोड़ सकती थी, लेकिन कोविंद ने इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
इसके बजाय उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों से सीख ली और आगे बढ़ते रहे। पीएम मोदी ने कहा कि कोविंद का जीवन यह बताता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प और मेहनत के जरिए उन्हें बदला जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ नाम उनकी आत्मकथा के लिए बिल्कुल उपयुक्त है। कोविंद के व्यक्तिगत संघर्ष भले ही उनके अपने थे, लेकिन उनकी सफलता भारतीय लोकतंत्र की भी जीत है।
राष्ट्रपति पद के बाद भी सक्रिय हैं रामनाथ कोविंद
पीएम मोदी ने रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति पद से हटने के बाद की सक्रियता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी कोविंद ने खुद को सार्वजनिक जीवन से अलग नहीं किया।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहे हैं। उनके प्रयास भारतीय लोकतंत्र में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े व्यापक विमर्श का हिस्सा हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि पद पर रहना ही किसी व्यक्ति के योगदान की पहचान नहीं होती। पद छोड़ने के बाद भी समाज और देश के लिए काम करते रहना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कोविंद के इस प्रयास को लोकतंत्र को मजबूत करने में उनके निरंतर योगदान के रूप में देखा।
कोविंद के संघर्षों से नई पीढ़ी क्या सीख सकती है?
रामनाथ कोविंद के जीवन की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश को ऐसे और युवाओं की जरूरत है जो परिस्थितियों से हार न मानें। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में चुनौतियों से पार पाने का मजबूत इरादा होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में ऐसे युवाओं की आवश्यकता होगी जो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दे सकें। इसके लिए केवल डिग्री या तकनीकी ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि धैर्य, अनुशासन और मुश्किल समय में टिके रहने की क्षमता भी जरूरी है।
यही वजह है कि पीएम मोदी ने आत्मकथाओं को युवाओं के लिए उपयोगी बताया। उनके अनुसार, किताबों में दर्ज वास्तविक संघर्ष युवाओं को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि सफलता रातोंरात नहीं मिलती।
अच्छे संस्कारों का भी किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने रामनाथ कोविंद के व्यक्तित्व में अच्छे संस्कारों की भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कोविंद में अच्छे संस्कार डालने में उनके पिता की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पीएम मोदी ने राष्ट्रपति भवन में कोविंद के साथ हुई अपनी मुलाकातों को भी याद किया। उन्होंने बताया कि प्रोटोकॉल के बावजूद कोविंद कई बार उन्हें खुद कार तक छोड़ने आते थे। प्रधानमंत्री के मना करने के बावजूद वह ऐसा करते थे।
पीएम मोदी ने उनके इस व्यवहार को उनके संस्कारों और सहज व्यक्तित्व से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी विनम्रता और सामान्य व्यवहार को बनाए रखना किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व की बड़ी खूबी होती है।
बारिश में टपकती थी घर की छत
कार्यक्रम के दौरान रामनाथ कोविंद ने भी अपने बचपन और शुरुआती जीवन के संघर्षों को याद किया। उन्होंने बताया कि उनके घर की छत से बारिश के दौरान पानी टपकता था। ऐसे समय में परिवार को बारिश रुकने का इंतजार करना पड़ता था।
कोविंद ने कहा कि आज सरकारी आवास योजनाओं के जरिए करोड़ों गरीब परिवारों को सिर पर छत मिली है। इससे उन्हें न केवल रहने की सुविधा मिली, बल्कि सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर भी मिला है।
उनकी यह बात इस बात को रेखांकित करती है कि व्यक्तिगत अनुभव किसी व्यक्ति के नजरिए को किस तरह प्रभावित करते हैं। जिन परिस्थितियों को उन्होंने खुद झेला, बाद में उन्हीं अनुभवों ने उन्हें समाज के कमजोर वर्गों की जरूरतों को समझने में मदद की।
पीएम मोदी खुद भी शेयर कर रहे हैं रील्स
दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं भी पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर युवाओं तक पहुंचने के लिए रील्स और शॉर्ट वीडियो का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में उनका शॉर्टकट से बचने का संदेश सोशल मीडिया के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके संतुलित इस्तेमाल की सलाह के तौर पर देखा जा सकता है।
सोशल मीडिया आज युवाओं के लिए जानकारी, शिक्षा, करियर और मनोरंजन का बड़ा माध्यम बन चुका है। लेकिन किसी भी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किस तरह किया जाए, यह महत्वपूर्ण है। रील्स से मनोरंजन या नई जानकारी हासिल करना गलत नहीं है, लेकिन उन्हें वास्तविक जीवन की सफलता का पैमाना मान लेना नुकसानदेह हो सकता है।
पीएम मोदी का संदेश मूल रूप से युवाओं को यह याद दिलाता है कि कुछ सेकंड की रील और वर्षों की वास्तविक मेहनत में बड़ा अंतर होता है। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली उपलब्धि के पीछे अक्सर लंबा संघर्ष छिपा होता है।
युवाओं के लिए पीएम मोदी का संदेश क्या है?
प्रधानमंत्री के पूरे संबोधन को देखें तो उनका संदेश केवल रील्स देखने से बचने तक सीमित नहीं है। वह युवाओं को तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में भी धैर्य और गहराई के साथ आगे बढ़ने की सलाह दे रहे हैं।
आज जब तुरंत सफलता, वायरल होने और तेजी से लोकप्रिय बनने की चाहत बढ़ रही है, ऐसे में पीएम मोदी ने युवाओं को लंबे रास्ते की अहमियत समझाने की कोशिश की। उनका कहना है कि जीवन में मजबूत सफलता के लिए मेहनत, संघर्ष और निरंतर सीखने की जरूरत होती है।
रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि कठिन परिस्थितियां किसी व्यक्ति की राह को रोक सकती हैं, लेकिन यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास जारी रहें तो वही परिस्थितियां सफलता की कहानी का हिस्सा बन सकती हैं।
इसलिए युवाओं के लिए संदेश साफ है—रील्स देखिए, सोशल मीडिया का इस्तेमाल कीजिए, लेकिन वास्तविक जिंदगी में शॉर्टकट के भरोसे मत रहिए। सीखने, मेहनत करने और संघर्ष से गुजरने का रास्ता भले लंबा हो, लेकिन यही रास्ता ज्यादा मजबूत और टिकाऊ सफलता की ओर ले जाता है।


