Market Trend: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 11 अगस्त को ग्लोबल संकेतों के बीच कारोबार की शुरुआत मामूली गिरावट के साथ हुई। बाजार के सामने इस समय कई सकारात्मक संकेत मौजूद हैं, लेकिन ब्रेंट क्रूड की बढ़ती कीमत, मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव और एक्सपायरी के कारण बढ़ी हुई अस्थिरता निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। दूसरी तरफ विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी, रुपये में स्थिरता और कंपनियों के उम्मीद से बेहतर पहली तिमाही के नतीजे बाजार को सपोर्ट दे रहे हैं।
ब्रेंट क्रूड बना बाजार के लिए बड़ी चिंता
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक भारतीय बाजार के कई फंडामेंटल मजबूत दिखाई दे रहे हैं, लेकिन ब्रेंट क्रूड की बढ़ती कीमतें फिलहाल बाजार के लिए बड़ा निगेटिव फैक्टर बनी हुई हैं।
उनका कहना है कि बाजार में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। FIIs अब भारतीय बाजार में खरीदार बनते दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा कंपनियों के Q1 नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं और रुपये में भी स्थिरता आई है। इन दोनों कारकों से विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है।
घरेलू खपत मजबूत रहने की स्थिति में FY27 तक कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी जारी रहने की उम्मीद है। वहीं, FCNR(B) खातों में बढ़ता निवेश रुपये को सहारा दे सकता है। रुपये में मजबूती आने पर विदेशी निवेशकों की भारत में निवेश करने की क्षमता और आकर्षक हो सकती है।
भारत की तरफ बढ़ रहा FII का पैसा
मार्केट में एक दिलचस्प ट्रेंड यह है कि FIIs दक्षिण कोरिया और ताइवान के चिप ट्रेड से पैसा निकालकर भारतीय शेयर बाजार में लगा रहे हैं। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो भारतीय इक्विटी मार्केट को अतिरिक्त सपोर्ट मिल सकता है।
हालांकि, विदेशी निवेशकों की पसंद भी ध्यान देने वाली है। वे अच्छे वैल्यूएशन वाले बड़े बैंकों की तुलना में टेलीकॉम, रिन्यूएबल एनर्जी, कैपिटल गुड्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर के महंगे शेयरों में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं।
इससे संकेत मिलता है कि बाजार में निवेश का रुख केवल वैल्यूएशन पर आधारित नहीं है, बल्कि निवेशक भविष्य की ग्रोथ और सेक्टोरल थीम को भी प्राथमिकता दे रहे हैं।
बाजार में सुस्ती के संकेत
चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर के मुताबिक भारतीय इक्विटी मार्केट में फिलहाल सुस्ती के संकेत दिखाई दे रहे हैं। ग्लोबल संकेत भी मिले-जुले हैं।
निवेशक एक तरफ अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर कम होती चिंता को देख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कच्चे तेल की ऊंची कीमत और मिडिल ईस्ट में जारी जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता बाजार की धारणा पर दबाव बना रही है।
इस सप्ताह अमेरिका के जुलाई महीने के रिटेल महंगाई आंकड़े भी सामने आने वाले हैं। ऐसे में निवेशक महंगाई और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर सतर्क रह सकते हैं। अगर महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा आते हैं तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है।
निफ्टी पर क्या है आज की रणनीति?
सीएनबीसी-आवाज के वीरेंद्र कुमार के मुताबिक निफ्टी के लिए 24,632-24,678 का स्तर पहला रजिस्टेंस है, जबकि 24,711-24,767/24,788 का क्षेत्र बड़ा रजिस्टेंस माना जा रहा है।
वहीं नीचे की तरफ 24,471-24,509 पहला बेस है और 24,383-24,411 बड़ा बेस है।
पिछले कारोबारी सत्र में बेस-1 से रजिस्टेंस-1 के बीच की रेंज ने अच्छा काम किया। कैश मार्केट में FIIs की खरीदारी देखने को मिली, लेकिन इंडेक्स में बिकवाली का दबाव बना रहा। इंडेक्स में नेट शॉर्ट पोजिशन करीब 1.52 लाख रही और नई शॉर्ट पोजिशन भी जुड़ी।
आज एक्सपायरी होने के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। 24,600, 24,700 और 24,800 के स्तर पर कॉल राइटिंग, जबकि 24,500 और 24,400 पर पुट राइटिंग देखने को मिली है।
तकनीकी तौर पर 24,471 पर 10 DEMA और 24,383 पर 200 DEMA मौजूद है। इसलिए एक्सपायरी को देखते हुए फिलहाल रेंज में ट्रेड करने की रणनीति बेहतर हो सकती है।
24,471 के नीचे निफ्टी फिसलता है तो बाजार में दबाव बढ़ सकता है और इसके बाद 24,383-24,411 के बड़े बेस की तरफ गिरावट देखने को मिल सकती है। दूसरी तरफ बेस-1 से मजबूत रिवर्सल आने पर रजिस्टेंस-1 के आसपास मुनाफावसूली की रणनीति अपनाई जा सकती है।
अगर निफ्टी 24,711 के ऊपर टिकता है, तो रेंज ब्रेकआउट देखने को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में दिन के दौरान अतिरिक्त 70-80 अंकों की चाल की संभावना बन सकती है।
बैंक निफ्टी की स्थिति कैसी है?
बैंक निफ्टी भी फिलहाल छोटी रेंज में फंसा हुआ है। वीरेंद्र कुमार के अनुसार इसके लिए 57,941-58,086 पहला रजिस्टेंस जोन है, जबकि 58,278-58,389/58,534 बड़ा रजिस्टेंस क्षेत्र है।
नीचे की तरफ 57,432-57,550 पहला बेस और 56,959-57,117/57,236 बड़ा बेस है।
पिछले सत्र में बैंक निफ्टी में भी साइडवेज कारोबार देखने को मिला। खासकर PSU बैंकों में दबाव रहा। 58,000-58,100-58,200 के स्तरों पर कॉल राइटिंग देखने को मिली है। वहीं 57,000 पुट में अच्छा OI मौजूद है और इसी क्षेत्र में 10/20 DEMA भी दिखाई दे रहा है।
ऐसे में शुरुआती कारोबार में रेंज ट्रेडिंग की रणनीति रखी जा सकती है। कच्चे तेल में तेजी को देखते हुए अगर बैंक निफ्टी का पहला बेस टूटता है तो दूसरे बेस तक दबाव बढ़ने की संभावना रहेगी। इसके विपरीत बेस-1 से रिवर्सल मिलने पर पहले रजिस्टेंस जोन के आसपास मुनाफा बुक किया जा सकता है।
आज इन दो शेयरों पर नजर
बाजार में आज के ट्रेडिंग आइडिया के लिए Mantri FinMart के अरुण कुमार मंत्री ने दो शेयरों पर खरीदारी की राय दी है। इनमें JSW Energy और Maruti शामिल हैं।
JSW Energy Share Price Target
अरुण कुमार मंत्री ने JSW Energy में करीब ₹577 के स्तर पर खरीदारी की सलाह दी है। इस ट्रेड में ₹571 का स्टॉप लॉस रखने और ₹586 का टारगेट देखने की सलाह दी गई है।
इस तरह ट्रेड का सेटअप सीमित जोखिम के साथ ऊपर की तरफ संभावित चाल को पकड़ने पर आधारित है। हालांकि बाजार में क्रूड और एक्सपायरी से जुड़ी अस्थिरता को देखते हुए स्टॉप लॉस का पालन करना महत्वपूर्ण रहेगा।
Maruti Share Price Target
दूसरा पसंदीदा शेयर Maruti है। इसमें करीब ₹14,090 के आसपास खरीदारी की सलाह दी गई है। इसके लिए ₹13,910 का स्टॉप लॉस और ₹14,545 का टारगेट दिया गया है।
मारुति के ट्रेड में भी दिए गए स्तरों के आधार पर रिस्क मैनेजमेंट महत्वपूर्ण रहेगा। बाजार अगर कमजोर होता है तो मजबूत दिखने वाले शेयरों में भी अचानक मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।
निवेशकों के लिए आज का निष्कर्ष
11 अगस्त के कारोबार में बाजार की दिशा तय करने में ब्रेंट क्रूड, FIIs की गतिविधि, निफ्टी के 24,471-24,711 के स्तर और अमेरिकी महंगाई आंकड़ों से जुड़ी उम्मीदें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
एक तरफ विदेशी निवेशकों की खरीदारी और बेहतर Q1 नतीजे बाजार को सहारा दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और मिडिल ईस्ट का तनाव जोखिम बढ़ा रहा है। एक्सपायरी के कारण इंट्राडे उतार-चढ़ाव भी तेज रह सकता है।
ऐसे में निफ्टी में 24,471 के ऊपर मजबूती और 24,711 के ऊपर ब्रेकआउट महत्वपूर्ण संकेत होंगे। वहीं 24,471 के नीचे कमजोरी बढ़ने पर 24,383-24,411 का क्षेत्र अहम सपोर्ट बन सकता है। बैंक निफ्टी में भी बेस और रजिस्टेंस के बीच रेंज को ध्यान में रखकर ही ट्रेडिंग रणनीति बनाना बेहतर होगा।
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