Donald Trump Plane Change: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुर्की यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा व्यवस्था में अचानक और बेहद गोपनीय बदलाव किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से मिली संभावित धमकी के बाद ट्रंप को तुर्की से ब्रिटेन जाने के लिए उस विमान का इस्तेमाल नहीं करने दिया गया, जिससे वह अंकारा पहुंचे थे। इसके बजाय उन्हें अमेरिकी वायु सेना के छोटे C-32A विमान से चुपचाप ब्रिटेन भेजा गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश यात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, तुर्की से ब्रिटेन लौटते समय ट्रंप के विमान को लेकर अंतिम समय में ऐसा बदलाव किया गया, जिसकी जानकारी सार्वजनिक कार्यक्रम में भी नहीं थी। ट्रंप को एक छोटे अमेरिकी सैन्य विमान C-32A में बैठाकर ब्रिटेन ले जाया गया।
यह बदलाव ऐसे समय में किया गया था, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ा हुआ था और ट्रंप को कथित तौर पर ईरान से जुड़े संभावित खतरों का सामना करना पड़ रहा था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खतरे को देखते हुए राष्ट्रपति की यात्रा योजना को गोपनीय तरीके से बदलने का फैसला किया।
तुर्की जाने के लिए इस्तेमाल किया था नया बोइंग 747-8
डोनाल्ड ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए तुर्की की राजधानी अंकारा पहुंचे थे। तुर्की पहुंचने के लिए उन्होंने एक बोइंग 747-8 विमान का इस्तेमाल किया था। यह वही विमान है जिसे कतर की ओर से अमेरिका को उपहार के तौर पर दिए जाने और नए सिरे से तैयार किए जाने को लेकर काफी चर्चा हुई थी।
इस विमान को संभावित रूप से भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान Air Force One के तौर पर इस्तेमाल किए जाने की योजना से भी जोड़ा गया है। विमान को लेकर अमेरिका में पहले से ही राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी बहस चलती रही है।
लेकिन तुर्की से वापसी के समय ट्रंप इसी विमान से ब्रिटेन नहीं गए।
सुरक्षा कारणों से बदला गया ट्रंप का विमान
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की वापसी के लिए पहले से तय योजना अलग थी। सार्वजनिक कार्यक्रम के मुताबिक, उन्हें पुराने एयर फोर्स वन विमान से भी ब्रिटेन नहीं जाना था। इसके बजाय सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव करते हुए उन्हें अमेरिकी वायु सेना के C-32A विमान से रवाना किया गया।
यह बदलाव कथित तौर पर 8 जुलाई को किया गया था। उस समय अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का माहौल था। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि ट्रंप के खिलाफ ईरान से जुड़े प्रॉक्सी समूहों की ओर से संभावित धमकी की जानकारी सामने आई थी।
हालांकि, इस तरह के सुरक्षा फैसलों की पूरी जानकारी आमतौर पर सार्वजनिक नहीं की जाती। इसलिए विमान बदलने के पीछे मौजूद सभी सुरक्षा कारणों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना मुश्किल है।
पहले कैमरों के सामने पहुंचे पुराने एयर फोर्स वन तक
रिपोर्ट में यात्रा की पूरी प्रक्रिया को लेकर भी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। बताया गया है कि ट्रंप ने अंकारा एयरपोर्ट पर कैमरों के सामने पुराने एयर फोर्स वन विमान में सवार होने की औपचारिकता पूरी की थी।
इसके बाद घटनाक्रम को सार्वजनिक नजरों से दूर रखा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को एक कैटरिंग ट्रक के जरिए एयरपोर्ट के दूसरे हिस्से में ले जाया गया। वहां अमेरिकी वायु सेना का C-32A विमान मौजूद था। इसके बाद ट्रंप इसी विमान में सवार हुए और ब्रिटेन के लिए रवाना हो गए।
इस पूरी प्रक्रिया को कथित तौर पर बेहद गोपनीय रखा गया, ताकि राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा व्यवस्था की जानकारी सार्वजनिक न हो सके।
ट्रंप और मीडिया के विमान के पहुंचने में रहा अंतर
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन पहुंचे। खास बात यह थी कि पत्रकारों और यात्रा में शामिल अन्य कर्मचारियों को लेकर चल रहा पुराना एयर फोर्स वन विमान भी ब्रिटेन पहुंचा, लेकिन वह कुछ मिनट बाद वहां पहुंचा।
इससे यह स्पष्ट हुआ कि राष्ट्रपति को पहले से तय विमान के बजाय अलग विमान से रवाना किया गया था।
सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति के यात्रा कार्यक्रम में इस तरह के बदलाव असामान्य नहीं माने जाते। खासकर तब, जब किसी संभावित खतरे की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को मिलती है। हालांकि, इस मामले में बदलाव को लेकर इसलिए ज्यादा चर्चा हुई क्योंकि जिस विमान का इस्तेमाल किया गया, वह सामान्य राष्ट्रपति यात्रा के लिए इस्तेमाल होने वाले विमान से अलग था।
ईरान से कथित धमकी को माना जा रहा है बड़ी वजह
अमेरिकी मीडिया में पहले भी ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं कि ईरान से जुड़े संभावित खतरे के कारण ट्रंप को कतर से मिले नए विमान में तुर्की से ब्रिटेन की यात्रा नहीं कराई गई।
रिपोर्टों में दावा किया गया था कि संभावित खतरा ईरान से जुड़े प्रॉक्सी समूहों की ओर से हो सकता है। इसी आशंका के चलते ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया और उन्हें एक अलग अमेरिकी सैन्य विमान से ब्रिटेन भेजा गया।
तुर्की और ईरान की भौगोलिक निकटता भी इस पूरे घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बनाती है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के लिए राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा योजना को गोपनीय रखना और अंतिम समय पर विमान बदलना सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
क्या था C-32A विमान?
C-32A अमेरिकी वायु सेना का एक सैन्य परिवहन विमान है, जिसका इस्तेमाल उच्च पदस्थ अमेरिकी अधिकारियों की यात्रा के लिए किया जाता है। यह आकार में राष्ट्रपति के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बड़े बोइंग 747 आधारित एयर फोर्स वन विमान से छोटा है।
राष्ट्रपति की यात्रा में किसी छोटे सैन्य विमान का इस्तेमाल होने की जानकारी सामने आने के बाद इस मामले ने काफी ध्यान आकर्षित किया। हालांकि, किसी राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़ी यात्रा में विमान का चयन केवल आकार या सार्वजनिक कार्यक्रम के आधार पर नहीं किया जाता। सुरक्षा, मार्ग, संभावित खतरे और परिचालन जरूरतें भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं।
ट्रंप की सुरक्षा को लेकर क्यों अहम है यह बदलाव?
अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद जटिल होती है। यात्रा कार्यक्रम, विमान, रूट और राष्ट्रपति की वास्तविक लोकेशन जैसी जानकारियों को नियंत्रित रखना सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
ऐसे में अगर किसी संभावित खतरे की जानकारी मिलती है तो राष्ट्रपति की यात्रा योजना में अचानक बदलाव किया जा सकता है। तुर्की से ब्रिटेन की यात्रा के दौरान ट्रंप के साथ कथित तौर पर यही हुआ।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में विमान बदलने और ईरान से मिले संभावित खतरे के बीच संबंध बताया गया है, लेकिन सुरक्षा अधिकारियों की ओर से इस पूरे घटनाक्रम की सभी परिस्थितियों की विस्तृत सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है।
कुल मिलाकर, ट्रंप की तुर्की यात्रा से जुड़ा यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति को पहले से तय यात्रा योजना के बजाय एक अलग सैन्य विमान से ब्रिटेन भेजा गया। रिपोर्टों के मुताबिक, यह फैसला ईरान से जुड़े संभावित सुरक्षा खतरे को ध्यान में रखते हुए लिया गया था। इस दौरान ट्रंप की वास्तविक यात्रा व्यवस्था को भी काफी हद तक गोपनीय रखा गया।


