8th Pay Commission Latest News Today: 8वें वेतन आयोग को लेकर दिल्ली में चल रहा परामर्श दौर 10 अगस्त को पूरा हो गया। इन बैठकों में दिल्ली और आसपास के पंजीकृत केंद्रीय कर्मचारी संगठनों, यूनियनों, पेंशनर्स और विभिन्न एसोसिएशनों ने वेतन, पेंशन और भत्तों में संशोधन से जुड़ी अपनी मांगें आयोग के सामने रखीं। हालांकि, दिल्ली में बैठकें पूरी होने के बावजूद कर्मचारियों और संगठनों से सुझाव लेने की प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है।
8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी संगठनों की सबसे अहम मांगों में न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी और नए फिटमेंट फैक्टर को लेकर बदलाव शामिल है। इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने आयोग को दिए अपने ज्ञापन में न्यूनतम वेतन को ₹52,600 प्रति माह करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए एसोसिएशन ने 2.92 के फिटमेंट फैक्टर को आधार बनाने की मांग की है।
यह मांग लागू होती है या नहीं, इसका फैसला अभी नहीं हुआ है। अंतिम वेतन कितना होगा, यह 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और उसके बाद केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर करेगा।
7वें वेतन आयोग में ₹18,000 था न्यूनतम वेतन

7वें वेतन आयोग के तहत केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 प्रति माह तय किया गया था। वेतन आयोग के दौरान फिटमेंट फैक्टर को कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी निर्धारित करने में महत्वपूर्ण आधार माना गया था।
अब 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी संगठन महंगाई, बदलती जीवनशैली और परिवार के बढ़ते खर्चों को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम वेतन में पर्याप्त वृद्धि की मांग कर रहे हैं।
IRTSA के प्रस्ताव के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में कर्मचारियों के खर्चों की गणना पुराने मानकों के आधार पर नहीं की जानी चाहिए। एसोसिएशन ने इंटरनेट, पैकेज्ड पीने का पानी, बच्चों की शिक्षा, मेडिकल इंश्योरेंस और अन्य आधुनिक पारिवारिक खर्चों को भी वेतन निर्धारण के आधार में शामिल करने की मांग की है।
₹52,600 कैसे बनता है? समझिए फिटमेंट फैक्टर का गणित
फिटमेंट फैक्टर वह गुणक है जिसके आधार पर पुराने बेसिक पे को संशोधित करके नया बेसिक पे निर्धारित किया जाता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी कर्मचारी का मौजूदा बेसिक पे ₹18,000 है और 2.92 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है, तो गणना इस तरह होगी:
₹18,000 × 2.92 = ₹52,560
यानी 2.92 के गुणक से गणना करने पर रकम करीब ₹52,600 बैठती है। यही वजह है कि IRTSA ने न्यूनतम बेसिक सैलरी को लगभग ₹52,600 करने की मांग रखी है।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि यह IRTSA का प्रस्ताव है, सरकार या 8वें वेतन आयोग का अंतिम फैसला नहीं। इसलिए ₹52,600 को अभी 8वें वेतन आयोग की तय न्यूनतम सैलरी मानना सही नहीं होगा।
सभी कर्मचारियों के लिए एक जैसा फिटमेंट फैक्टर नहीं
IRTSA ने 8वें वेतन आयोग के सामने केवल न्यूनतम वेतन बढ़ाने की मांग नहीं रखी है। एसोसिएशन ने अलग-अलग पे-लेवल और कर्मचारियों की जिम्मेदारियों के आधार पर अलग फिटमेंट फैक्टर लागू करने का सुझाव भी दिया है।
एसोसिएशन का तर्क है कि तकनीकी, सुरक्षा और अधिक जिम्मेदारी वाली श्रेणियों में काम करने वाले कर्मचारियों की भूमिका और जिम्मेदारियां अलग होती हैं। इसलिए पे-लेवल बढ़ने के साथ फिटमेंट फैक्टर में भी अंतर होना चाहिए।
विशेष रूप से रेलवे की तकनीकी और सुरक्षा से जुड़ी श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए पे-लेवल 6 से ऊपर अधिक फिटमेंट फैक्टर देने की मांग की गई है।
नोट: फिटमेंट फैक्टर और वेतन से जुड़े ये आंकड़े IRTSA द्वारा 8वें वेतन आयोग को दिए गए ज्ञापन में रखे गए प्रस्तावों पर आधारित हैं। इन पर अंतिम निर्णय आयोग की सिफारिश और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।
सालाना इंक्रीमेंट 3% से बढ़ाकर 5% करने की मांग
IRTSA ने कर्मचारियों के वेतन ढांचे में केवल शुरुआती बेसिक पे बढ़ाने की मांग नहीं की है। एसोसिएशन ने सालाना वेतन वृद्धि को भी मौजूदा व्यवस्था से बेहतर करने का सुझाव दिया है।
फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सामान्य वार्षिक इंक्रीमेंट 3% है। IRTSA ने इसे बढ़ाकर 5% करने का प्रस्ताव रखा है। इससे कर्मचारियों की लंबी अवधि की वेतन वृद्धि और करियर प्रोग्रेशन में सुधार हो सकता है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को स्वीकार करना या नहीं करना भी 8वें वेतन आयोग और सरकार के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।
SSE को ग्रुप-B गजेटेड स्टेटस देने की मांग
रेलवे के तकनीकी कर्मचारियों के करियर प्रोग्रेशन से जुड़े मुद्दे भी IRTSA के ज्ञापन में शामिल हैं। एसोसिएशन ने जूनियर इंजीनियर्स (JE) और सीनियर सेक्शन इंजीनियर्स (SSE) के करियर में आने वाले ठहराव को दूर करने की मांग की है।
इसके तहत SSE को ग्रुप-B गजेटेड स्टेटस देने का प्रस्ताव रखा गया है। एसोसिएशन का मानना है कि इससे तकनीकी कर्मचारियों के पद, जिम्मेदारी और करियर प्रोग्रेशन के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकेगा।
MACP और अलग-अलग भत्तों में बदलाव की मांग
IRTSA ने Modified Assured Career Progression (MACP) से जुड़े नियमों में भी बदलाव की मांग की है। इसके अलावा कर्मचारियों को मिलने वाले विभिन्न भत्तों को मौजूदा महंगाई और काम की परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
इनमें खास तौर पर:
- नाइट ड्यूटी अलाउंस
- ओवरटाइम
- रिस्क अलाउंस
- हार्डशिप अलाउंस
जैसे भत्ते शामिल हैं।
एसोसिएशन का कहना है कि कठिन परिस्थितियों, रात की ड्यूटी और जोखिम वाले काम में तैनात कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों की राशि को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से अपडेट किया जाना चाहिए।
दिल्ली के बाद इन शहरों में होंगी बैठकें
दिल्ली में 8वें वेतन आयोग की बैठकें पूरी होने के बाद भी परामर्श प्रक्रिया जारी रहेगी। आयोग देश के अलग-अलग हिस्सों में कर्मचारी संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव लेगा।
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार:
- 31 अगस्त–1 सितंबर: जयपुर
- 7–8 सितंबर: चेन्नई
- 9 सितंबर: पुडुचेरी
- 16–18 सितंबर: चंडीगढ़
इन बैठकों में कर्मचारी संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से वेतन, पेंशन, भत्तों और सेवा शर्तों से जुड़े सुझाव लिए जाएंगे।
कब आएगी 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिश?
फिलहाल 8वें वेतन आयोग की ओर से न्यूनतम बेसिक सैलरी या फिटमेंट फैक्टर पर कोई अंतिम आंकड़ा घोषित नहीं किया गया है। अलग-अलग कर्मचारी संगठन अपनी मांगें और सुझाव आयोग के सामने रख रहे हैं।
आयोग इन सुझावों, आर्थिक परिस्थितियों, सरकारी वित्तीय क्षमता और कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के बाद अपनी सिफारिश तैयार करेगा। उपलब्ध कार्यक्रम के मुताबिक आयोग मई-जून 2027 तक अपनी अंतिम सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंप सकता है।
इसके बाद सरकार इन सिफारिशों पर विचार करेगी और लागू होने वाली नई वेतन व्यवस्था को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
कर्मचारियों के लिए अभी क्या समझना जरूरी है?
8वें वेतन आयोग को लेकर ₹52,600 न्यूनतम बेसिक सैलरी और 2.92 फिटमेंट फैक्टर की खबर से केंद्रीय कर्मचारियों के बीच उम्मीदें बढ़ सकती हैं, लेकिन अभी इसे अंतिम वेतन वृद्धि नहीं माना जाना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ₹52,600 IRTSA की मांग और प्रस्तावित गणना है, न कि 8वें वेतन आयोग द्वारा घोषित नई न्यूनतम बेसिक सैलरी। इसी तरह 2.92 फिटमेंट फैक्टर भी फिलहाल एक प्रस्ताव है।
आयोग द्वारा विभिन्न कर्मचारी संगठनों की मांगों पर विचार करने और अपनी सिफारिश सरकार को सौंपने के बाद ही तस्वीर स्पष्ट होगी। इसलिए कर्मचारियों को अंतिम घोषणा के लिए आयोग और केंद्र सरकार के आधिकारिक फैसले का इंतजार करना होगा।


