Ethanol-Petrol Controversy: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद जनार्दन मिश्रा ने केंद्र की एथेनॉल-ब्लेंडिंग नीति का खुलकर बचाव करते हुए आलोचकों पर निशाना साधा। उन्होंने शुद्ध पेट्रोल की मांग करने वालों से सवाल करते हुए विवादित अंदाज में कहा कि जब देश में शुद्ध पेट्रोल है ही नहीं तो यह आएगा कहां से। उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और इसको लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
Ethanol-Petrol Controversy: पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लेकर देश में जारी बहस के बीच मध्य प्रदेश के रीवा से बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्रा का एक बयान चर्चा में आ गया है। रविवार, 9 अगस्त को रीवा से भोपाल और कोलकाता के लिए नई उड़ान सेवाओं के उद्घाटन के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में सांसद ने सरकार की एथेनॉल-ब्लेंडिंग नीति का बचाव किया।
अपने संबोधन के दौरान जनार्दन मिश्रा ने उन लोगों पर निशाना साधा जो पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत अपनी जरूरत का पूरा कच्चा तेल देश में पैदा नहीं करता, बल्कि बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करना पड़ता है। ऐसे में एथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना जरूरी है।
इसी दौरान उन्होंने बघेली भाषा में तीखे अंदाज में कहा, “आंदोलन हो रहा है एथेनॉल नहीं चलेगा, शुद्ध पेट्रोल चलेगा। शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा? शुद्ध पेट्रोल है ही नहीं देश में तो कहां से आएगा?” उनके इस बयान का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
एथेनॉल ब्लेंडिंग का बीजेपी सांसद ने किया बचाव
पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने पर आंदोलन हो रहा, शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा, शुद्ध पेट्रोल देश में है हीं नहीं – जनार्दन मिश्रा… रीवा सांसद pic.twitter.com/e3xsks0cIJ
— Brajesh Rajput (@drbrajeshrajput) August 9, 2026 जनार्दन मिश्रा ने अपने संबोधन में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की केंद्र सरकार की नीति का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की आपूर्ति और परिवहन से जुड़ी परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति को लेकर कुछ लोग विरोध कर रहे हैं। मिश्रा के मुताबिक, देश को पेट्रोलियम ईंधन के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम करना चाहिए।
बीजेपी सांसद ने सवाल उठाया कि अगर एथेनॉल का उत्पादन नहीं होगा तो देश में पेट्रोल और डीजल की जरूरत कैसे पूरी होगी। उन्होंने एथेनॉल को देश की ऊर्जा सुरक्षा से जोड़ते हुए इसके इस्तेमाल का समर्थन किया।
‘एथेनॉल से गाड़ियों को नुकसान नहीं’
जनार्दन मिश्रा ने एथेनॉल-ब्लेंडिंग ईंधन से वाहनों के इंजन को नुकसान होने की आशंकाओं को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों की राय है कि एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल का इस्तेमाल वाहनों में किया जा सकता है।
उन्होंने ब्राजील का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां एथेनॉल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है और कई वाहन उच्च मात्रा वाले एथेनॉल ईंधन पर भी चलते हैं। उनके मुताबिक, भारत में भी वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को लेकर लोगों को आशंकाओं के बजाय तकनीकी और वैज्ञानिक तथ्यों को देखना चाहिए।
हालांकि, पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ने को लेकर वाहन मालिकों और विशेषज्ञों के बीच ईंधन की माइलेज, पुराने वाहनों की अनुकूलता और लंबे समय में इंजन पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे मुद्दों पर बहस जारी है।
क्या है E20 पेट्रोल?
E20 पेट्रोल वह ईंधन है जिसमें पेट्रोल के साथ करीब 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है। भारत सरकार इसे देश की ऊर्जा जरूरतों और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तौर पर बढ़ावा दे रही है।
एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से किया जा सकता है। सरकार का तर्क है कि घरेलू स्तर पर एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार हो सकता है और पेट्रोलियम आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा को कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, E20 को लेकर सबसे बड़ी बहस वाहनों की कम्पैटिबिलिटी और फ्यूल एफिशिएंसी को लेकर है। खासतौर पर पुराने वाहनों के मालिकों के बीच यह चिंता रहती है कि ज्यादा एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल से उनकी गाड़ी के माइलेज या इंजन के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ेगा।
सरकार का क्या कहना है?
केंद्र सरकार लगातार पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग बढ़ाने पर जोर देती रही है। सरकार के अनुसार, E20 पेट्रोल के इस्तेमाल और इससे जुड़े परीक्षणों में इंजन के असामान्य रूप से खराब होने, जंग लगने या वाहन की उम्र कम होने का कोई निर्णायक प्रमाण सामने नहीं आया है।
सरकार का व्यापक उद्देश्य पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर निर्भरता घटाना, घरेलू स्तर पर वैकल्पिक ईंधन का उत्पादन बढ़ाना और कृषि क्षेत्र से जुड़े उत्पादों का बेहतर इस्तेमाल करना है।
इसके साथ ही सरकार बायोगैस, CNG और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को भी बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में एथेनॉल ब्लेंडिंग को ऊर्जा सुरक्षा की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
ब्राजील का उदाहरण क्यों दिया?
ब्राजील लंबे समय से एथेनॉल आधारित ईंधन के इस्तेमाल के लिए जाना जाता है। वहां गन्ने से बड़े पैमाने पर एथेनॉल का उत्पादन होता है और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के कारण पेट्रोल तथा एथेनॉल के अलग-अलग मिश्रणों का इस्तेमाल संभव है।
जनार्दन मिश्रा ने इसी उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि जब ब्राजील में एथेनॉल का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो सकता है तो भारत में भी इसे लेकर अनावश्यक डर नहीं होना चाहिए।
हालांकि, भारत और ब्राजील की ईंधन व्यवस्था, वाहन बेड़े, कृषि संरचना और नीतिगत परिस्थितियां अलग हैं। इसलिए दोनों देशों की तुलना करते समय इन अंतर को ध्यान में रखना भी जरूरी है।
विवादित बयान पर सियासत तेज
जनार्दन मिश्रा का बयान सामने आने के बाद एथेनॉल के मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने बीजेपी सांसद के शब्दों को लेकर सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर भी उनके बयान की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
एक तरफ जहां समर्थक उनके बयान को एथेनॉल नीति के समर्थन में दिया गया तर्क बता रहे हैं, वहीं आलोचक उनके बोलने के तरीके और ‘तुम्हारे बाप के घर से आएगा’ जैसे शब्दों को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल, बीजेपी सांसद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है और इसी के साथ E20 पेट्रोल, वाहन माइलेज, इंजन की अनुकूलता और भारत की तेल आयात निर्भरता को लेकर बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
एथेनॉल नीति के सामने चुनौती क्या है?
एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य सिर्फ पेट्रोल में एक वैकल्पिक ईंधन मिलाना नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा नीति से भी जुड़ा विषय है। देश की बढ़ती ईंधन मांग और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को देखते हुए सरकार घरेलू विकल्पों को बढ़ावा देना चाहती है।
लेकिन दूसरी तरफ उपभोक्ताओं की चिंताओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वाहन मालिकों के लिए माइलेज, वाहन की उम्र, सर्विस लागत और इंजन की अनुकूलता सीधे आर्थिक असर से जुड़े मुद्दे हैं।
इसी वजह से एथेनॉल ब्लेंडिंग पर बहस केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। इसमें ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय, विदेशी मुद्रा बचत, पर्यावरण, ऑटोमोबाइल तकनीक और आम उपभोक्ता की लागत—सभी पहलू शामिल हैं।
जनार्दन मिश्रा का बयान इसी व्यापक बहस के बीच आया है। उनके विवादित शब्दों ने E20 पेट्रोल की चर्चा को एक बार फिर राजनीतिक सुर्खियों में ला दिया है।


