Share Market News: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 10 अगस्त को शुरुआती कारोबार के बाद उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। बाजार एक समय हरे निशान में खुला, लेकिन जल्द ही सेंसेक्स और निफ्टी 50 लाल निशान में पहुंच गए। सेंसेक्स अपने डे-हाई से 300 अंकों से ज्यादा फिसला, जबकि निफ्टी 50 भी 24,500 के करीब आ गया। हालांकि, बाजार को कुछ सेक्टर्स और वैश्विक संकेतों से सपोर्ट मिल रहा है, जिससे बड़ी गिरावट पर फिलहाल रोक लगाने की कोशिश दिख रही है।
एक तरफ अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, बाजार में उतार-चढ़ाव और सरकारी बैंक-FMCG शेयरों में कमजोरी बाजार पर दबाव बना रहे हैं। दूसरी तरफ IT और Auto शेयरों में खरीदारी, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदली उम्मीदें और विदेशी निवेशकों की खरीदारी बाजार को संभालने की कोशिश कर रही है।
यही वजह है कि घरेलू बाजार में फिलहाल किसी एक दिशा में मजबूत ट्रेंड नजर नहीं आ रहा है।
सेंसेक्स और निफ्टी की क्या है स्थिति?
पिछले कारोबारी सत्र यानी 7 अगस्त को सेंसेक्स 455.59 अंक यानी 0.58 फीसदी की गिरावट के साथ 78,499.17 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 50 में 65.35 अंक यानी 0.27 फीसदी की गिरावट रही और यह 24,570.65 पर बंद हुआ था।
सोमवार के कारोबार में शुरुआती तेजी के बाद बिकवाली हावी हुई। सुबह 10:07 बजे सेंसेक्स 61.28 अंक यानी 0.08 फीसदी गिरकर 78,437.89 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 50 भी 24.60 अंक यानी 0.10 फीसदी की गिरावट के साथ 24,546.05 पर था।
इंट्रा-डे कारोबार में सेंसेक्स पहले 177.81 अंक चढ़कर 78,676.98 तक पहुंचा, लेकिन इसके बाद 378.06 अंक तक फिसलकर 78,298.92 के स्तर पर आ गया। इसी तरह निफ्टी 50 ने भी 50.30 अंक की बढ़त के साथ 24,620.95 का स्तर छुआ, लेकिन बाद में 109.85 अंक तक टूटकर 24,511.10 पर आ गया।
इससे साफ है कि बाजार में फिलहाल तेजी और गिरावट के बीच जोरदार रस्साकशी चल रही है।
बाजार पर दबाव बनाने वाली 4 बड़ी वजहें
1. अमेरिका-ईरान तनाव ने बढ़ाई चिंता
बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर अमेरिका के सामने कई बड़ी मांगें रखी हैं।
इन मांगों में अरबों डॉलर के अमेरिकी भुगतान, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करने जैसी शर्तें शामिल हैं। इस घटनाक्रम ने भू-राजनीतिक जोखिम को बढ़ाया है और इसका असर निवेशकों की धारणा पर दिखाई दे रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ईरान से जुड़े घटनाक्रम के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय शेयर बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया है।
ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1 फीसदी से ज्यादा की तेजी के साथ 84 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में क्रूड महंगा होने से देश के आयात बिल, करेंट अकाउंट और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है।
खास तौर पर तेल की ऊंची कीमतें महंगाई की चिंता बढ़ाती हैं, इसलिए बाजार इस घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहा है।
3. India VIX में उतार-चढ़ाव
बाजार में अस्थिरता का संकेत देने वाला India VIX भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बना हुआ है। कारोबार के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव देखा गया।
India VIX को आम तौर पर बाजार में अगले करीब 30 दिनों की संभावित वोलैटिलिटी के संकेतक के तौर पर देखा जाता है। इसमें तेज बदलाव निवेशकों की धारणा और जोखिम लेने की क्षमता पर असर डाल सकता है।
हालांकि दिए गए आंकड़ों के मुताबिक India VIX इस समय 4.64 फीसदी गिरकर 12.72 पर था, लेकिन बाजार में मौजूद अन्य जोखिमों के कारण निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं।
4. PSU बैंक और FMCG शेयरों में कमजोरी
सेक्टोरल स्तर पर सरकारी बैंक और FMCG शेयर बाजार पर दबाव डाल रहे हैं। दोनों सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स में करीब आधे फीसदी की कमजोरी दिखाई दी।
बड़े और हैवीवेट शेयरों में गिरावट का सीधा असर प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स पर पड़ता है। यही कारण है कि IT और Auto जैसे मजबूत सेक्टरों में खरीदारी के बावजूद सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव बना हुआ है।
बाजार को सपोर्ट देने वाली 3 बड़ी वजहें
1. IT और Auto शेयरों में खरीदारी
बाजार में गिरावट को रोकने में IT और Auto सेक्टर अहम भूमिका निभा रहे हैं। दोनों सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स में करीब आधे फीसदी की बढ़त देखी गई।
IT शेयरों को अमेरिकी बाजारों में मजबूती और ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों से सपोर्ट मिला है। वहीं ऑटो शेयरों में खरीदारी ने भी घरेलू बाजार को संभालने में मदद की।
अगर इन सेक्टर्स में खरीदारी बनी रहती है तो यह निफ्टी और सेंसेक्स को निचले स्तरों से रिकवर करने में मदद कर सकती है।
2. अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर उम्मीद बदली
अमेरिका की जुलाई की जॉब रिपोर्ट उम्मीद से कमजोर रहने के बाद वहां ब्याज दरों को लेकर बाजार की धारणा में बदलाव आया है।
सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका कमजोर होने से अमेरिकी शेयर बाजारों में जोरदार तेजी देखने को मिली। अमेरिकी बाजारों की मजबूती का असर एशियाई और भारतीय बाजारों की धारणा पर भी पड़ा।
अगर अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर नरमी की उम्मीद मजबूत होती है तो इससे उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह को भी सपोर्ट मिल सकता है।
3. FIIs की नेट खरीदारी
विदेशी निवेशकों की गतिविधि भी बाजार के लिए राहत देने वाली रही। शुक्रवार, 7 अगस्त को FIIs ने ₹480.24 करोड़ के शेयरों की नेट खरीदारी की।
लगातार दो कारोबारी सत्रों में नेट बिकवाली के बाद विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार की धारणा को कुछ सपोर्ट मिला है।
हालांकि, विदेशी निवेशकों की खरीदारी कितनी टिकाऊ रहती है, यह आगे बाजार की दिशा के लिए अहम होगा।
Nifty के लिए 24,500 का स्तर अहम
सोमवार के कारोबार में निफ्टी 50 के 24,500 के करीब पहुंचने से यह स्तर निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। अगर इंडेक्स इस क्षेत्र के आसपास मजबूती बनाए रखता है और खरीदारी लौटती है तो बाजार में रिकवरी की कोशिश देखने को मिल सकती है।
वहीं, अगर 24,500 के आसपास भी बिकवाली का दबाव बना रहता है और निफ्टी इस स्तर से नीचे टिकता है तो बाजार में कमजोरी और बढ़ सकती है। इसलिए आज के कारोबार में 24,500 के आसपास का व्यवहार खास तौर पर महत्वपूर्ण रहेगा।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
मौजूदा बाजार में एक साथ कई घरेलू और वैश्विक फैक्टर काम कर रहे हैं। कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद, FIIs की खरीदारी और सेक्टोरल प्रदर्शन—इन सभी का असर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।
ऐसे माहौल में केवल एक-दो संकेतों के आधार पर बाजार की दिशा तय करना जोखिम भरा हो सकता है। निवेशकों को इंडेक्स के अहम स्तरों के साथ-साथ सेक्टोरल ट्रेंड और वैश्विक बाजारों पर भी नजर रखनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना और बाजार की स्थिति समझाने के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। NewsJagran.in किसी भी शेयर या निवेश में पैसा लगाने की सलाह नहीं देता है।


